सनातन शक्ति की वृद्धि हेतु ‘एकांतवास’ पर निकले बागेश्वर सरकार: बद्रीनाथ की वादियों में 21 दिनों की कठिन साधना
देहरादून/छतरपुर: सनातन धर्म के प्रचार और लोक कल्याण के लिए समर्पित, बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी एक बार फिर आध्यात्मिक शक्ति के संचय के लिए ‘एकांतवास’ पर निकल गए हैं। पूज्य माता जी के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेने और श्री बालाजी महाराज को नमन करने के पश्चात, वे देवभूमि उत्तराखंड के पवित्र बद्रीनाथ धाम के लिए रवाना हो चुके हैं।
क्यों खास है यह साधना?
भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से ही ऋषि-मुनि, सिद्ध संत और यहाँ तक कि चक्रवर्ती राजा-महाराजा भी अपनी आंतरिक शक्तियों और राष्ट्र की उन्नति के लिए एकांत साधना करते आए हैं। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए, पूज्य गुरुदेव सनातन की शक्तियों को प्रगाढ़ करने और मानवता के कल्याण के उद्देश्य से हिमालय की पवित्र गुफाओं और पहाड़ों के बीच तपस्या करेंगे।
📋 कार्यक्रम की पूरी जानकारी (विशेष सूचना)
सोशल मीडिया और आधिकारिक माध्यमों से जारी सूचना के अनुसार, गुरुदेव का आगामी कार्यक्रम इस प्रकार रहेगा:
| अवधि / स्थान | विवरण |
|---|---|
| प्रारंभ तिथि | 6 मई से पूरे माह तक |
| स्थान | बद्रीनाथ के पवित्र पर्वत |
| साधना काल | सन्यासी बाबा की आज्ञा से 21 दिनों की कठिन तप साधना |
| कथा आयोजन | साधना पूर्ण होने के पश्चात वहीं 5 दिवसीय कथा का श्रवण कराएंगे |
भक्तों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश:
- कार्यक्रमों पर विराम: साधना की इस अवधि (मई माह) में गुरुदेव का कोई भी ‘दरबार’, ‘कथा’ या अन्य सार्वजनिक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा।
- भक्तों से अपील: सभी श्रद्धालु भक्तों से अनुरोध किया गया है कि वे इस सूचना को ध्यान में रखें और गुरुदेव की इस आध्यात्मिक यात्रा में बाधक न बनें।
साधना का उद्देश्य: सनातन का गौरव
हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, एकांतवास में की गई तपस्या से न केवल व्यक्ति की आत्मशक्ति बढ़ती है, बल्कि इससे पूरे समाज और राष्ट्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। बागेश्वर सरकार ने हमेशा ‘हिंदू राष्ट्र’ और ‘सनातन धर्म’ की एकता की बात की है।
“साधना से ही सिद्धि है और सिद्धि से ही जनकल्याण संभव है।”
