बयाना। पहाड़िया मुर्रकी स्थित श्री कृष्णा वृद्ध आश्रम में 97 वर्षीय दिवंगत बसंती शर्मा की आत्मा की शांति के लिए गरुड़ पुराण का पाठ श्रद्धा और विधि-विधान के साथ किया जा रहा है। बसंती शर्मा के निधन के बाद से आश्रम परिवार द्वारा धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। उनके देवलोक गमन के 11वें दिन आश्रम परिसर में गरुड़ पुराण कथा का आयोजन जारी है, जिसमें बड़ी संख्या में वृद्धजन, आश्रम परिवार, स्थानीय ग्रामीण एवं श्रद्धालु उपस्थित होकर धर्मोपदेश सुन रहे हैं।

गरुड़ पुराण का वाचन विद्वान पंडित मदन मोहन शर्मा द्वारा किया जा रहा है। वहीं इस धार्मिक आयोजन के मुख्य सहयोगकर्ता एवं यजमान के रूप में वृद्ध आश्रम संचालक राधेलाल शर्मा के भतीजे निरंजन शर्मा अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आश्रम में रह रहे बुजुर्गों के साथ-साथ आसपास के गांवों के लोग भी प्रतिदिन कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं।
आश्रम परिवार ने बताया कि दिवंगत बसंती शर्मा को परिवार के सदस्य के रूप में सम्मान दिया गया था और उनके निधन के बाद भी सभी धार्मिक परंपराओं का पालन उसी भाव से किया जा रहा है, जिस प्रकार किसी परिवार में अपने सदस्य के लिए किया जाता है। शुक्रवार को तेरहवीं संस्कार एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जिसमें क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों एवं ग्रामीणों के शामिल होने की संभावना है।
गरुड़ पुराण का पाठ क्यों किया जाता है?

हिंदू धर्म में गरुड़ पुराण को अठारह महापुराणों में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। यह ग्रंथ भगवान विष्णु और उनके वाहन गरुड़ के मध्य हुए संवाद पर आधारित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मृत्यु के उपरांत आत्मा की यात्रा, कर्मों का फल, धर्म-अधर्म, मोक्ष तथा जीवन के आध्यात्मिक पक्षों का विस्तृत वर्णन गरुड़ पुराण में मिलता है।
किसी व्यक्ति के निधन के बाद गरुड़ पुराण का पाठ करवाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसका उद्देश्य केवल दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करना ही नहीं, बल्कि जीवित लोगों को भी धर्म, सदाचार और जीवन की वास्तविकता का ज्ञान कराना है। कथा के माध्यम से लोगों को यह समझाया जाता है कि मनुष्य को अपने जीवन में अच्छे कर्म करने चाहिए, क्योंकि प्रत्येक कर्म का फल अवश्य प्राप्त होता है।
जीवन की नश्वरता का संदेश
गरुड़ पुराण का एक प्रमुख संदेश यह है कि संसार में जन्म और मृत्यु एक शाश्वत सत्य हैं। मनुष्य चाहे कितना भी धन, वैभव या प्रतिष्ठा अर्जित कर ले, अंततः उसे इस संसार को छोड़कर जाना ही पड़ता है। इसलिए जीवन को अहंकार, लोभ और मोह में व्यर्थ न गंवाकर धर्म, सेवा और सद्कर्मों के मार्ग पर चलना चाहिए।
पंडित मदन मोहन शर्मा कथा के दौरान श्रद्धालुओं को यही संदेश दे रहे हैं कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है और इसका उपयोग समाज, परिवार तथा धर्म के हित में किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि गरुड़ पुराण केवल मृत्यु का ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह जीवन को सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक ज्ञान भी प्रदान करता है।
गरुड़ पुराण सुनने के धार्मिक और सामाजिक लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गरुड़ पुराण के श्रवण से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक विचारों का विकास होता है। कथा मनुष्य को अपने कर्मों का मूल्य समझाती है और जीवन में नैतिकता, करुणा तथा सेवा भाव को बढ़ावा देती है।
गरुड़ पुराण के पाठ से जुड़े प्रमुख लाभ इस प्रकार बताए जाते हैं—
जीवन और मृत्यु के वास्तविक स्वरूप की समझ विकसित होती है।
अच्छे कर्मों और सदाचार के प्रति प्रेरणा मिलती है।
परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारी का बोध होता है।
धार्मिक और आध्यात्मिक चिंतन बढ़ता है।
दिवंगत आत्मा के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने का अवसर मिलता है।
मन में वैराग्य और आत्मचिंतन की भावना उत्पन्न होती है।
दुख की घड़ी में परिवार को मानसिक और आध्यात्मिक संबल प्राप्त होता है।
धार्मिक विद्वानों का मानना है कि ऐसे अवसरों पर आयोजित कथा केवल शोक प्रकट करने का माध्यम नहीं होती, बल्कि जीवन के गूढ़ सत्य को समझने का अवसर भी प्रदान करती है।
आश्रम में परिवार जैसा वातावरण
श्री कृष्णा वृद्ध आश्रम लंबे समय से निराश्रित एवं जरूरतमंद वृद्धजनों की सेवा का कार्य कर रहा है। यहां रहने वाले बुजुर्गों को भोजन, आवास, स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं और पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। आश्रम से जुड़े लोगों का कहना है कि यहां रहने वाले सभी वृद्धजन परिवार के सदस्य की तरह हैं और उनके सुख-दुख में पूरा आश्रम सहभागी बनता है।
बसंती शर्मा के निधन के बाद आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में यह पारिवारिक भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। आश्रम के बुजुर्ग भी कथा श्रवण कर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। कई बुजुर्गों ने कहा कि आश्रम में सभी एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी हैं और किसी सदस्य के जाने का दुख पूरे परिवार को होता है।
ग्रामीणों की भी उमड़ रही है आस्था

गरुड़ पुराण कथा में आसपास के गांवों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी कथाएं समाज को धर्म और संस्कारों से जोड़ने का कार्य करती हैं। कथा के माध्यम से नई पीढ़ी को भी भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों और धार्मिक परंपराओं की जानकारी मिलती है।
कई श्रद्धालुओं ने कहा कि वर्तमान समय में भौतिकता की दौड़ के बीच ऐसे धार्मिक आयोजन लोगों को आत्मचिंतन और आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित करते हैं। यही कारण है कि कथा में प्रतिदिन लोगों की उपस्थिति बनी हुई है।
कल होगा तेरहवीं संस्कार कार्यक्रम
आश्रम परिवार के अनुसार दिवंगत बसंती शर्मा की स्मृति में शनिवार को तेरहवीं संस्कार एवं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठानों के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी तथा दिवंगत आत्मा की शांति के लिए सामूहिक प्रार्थना की जाएगी।
आश्रम से जुड़े लोगों का कहना है कि बसंती शर्मा ने अपने जीवन का अंतिम समय आश्रम परिवार के बीच बिताया और सभी ने उन्हें मां के समान सम्मान दिया। उनके निधन के बाद भी सभी धार्मिक परंपराओं का पालन पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ किया जा रहा है।
इस अवसर पर गरुड़ पुराण का संदेश एक बार फिर लोगों को यह याद दिला रहा है कि मानव जीवन क्षणभंगुर है, लेकिन अच्छे कर्म, सेवा और सदाचार ही व्यक्ति की वास्तविक पहचान बनते हैं। यही भारतीय संस्कृति का मूल संदेश है और यही गरुड़ पुराण की शिक्षाओं का सार भी माना जाता है।
