बयाना. बन्ध बारैठा वन्य जीव अभ्यारण्य क्षेत्र में खनन माफिया के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि अब वे न केवल सरकारी कार्रवाई को खुली चुनौती दे रहे हैं, बल्कि वन विभाग और सुरक्षा बलों पर जानलेवा हमले से भी नहीं चूक रहे। कोट की पुलिया पर अवैध खनन और परिवहन रोकने के लिए लगाए गए अस्थायी नाके पर 12 दिसम्बर शुक्रवार रात जो हुआ, उसने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले में अब दर्ज करायी गयी एफआईआर के अनुसार, रात करीब 8.30 बजे वन विभाग और सीमा सुरक्षा गृह बल की संयुक्त टीम अवैध खनन रोकथाम के लिए नाके पर तैनात थी। इसी दौरान परऊआ गांव की ओर से 10-12 लोग मोटरसाइकिलों पर पहुंचे और कुछ ही देर बाद 4-5 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सैण्ड स्टोन के भारी ब्लॉक लेकर मौके पर आए। जब टीम ने ट्रैक्टर रोकने का प्रयास किया, तो पहले से मौजूद लोगों ने अचानक पथराव शुरू कर दिया।
हमले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सीमा सुरक्षा गृह बल के जवान से एसएलआर छीनने तक का प्रयास किया गया। अंधेरे का फायदा उठाकर खनन माफिया ट्रैक्टर-ट्रॉलियां भगाकर ले गया, जबकि पथराव में सरकारी बोलेरो कैम्पर को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। अधिकारी व जवान किसी तरह जान बचाकर नाके तक पहुंचे।
एफआईआर में बबलू उर्फ बॉली, सूरज और बन्टी तीनों परऊआ निवासी को नामजद किया गया है, जबकि 8-10 अन्य आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। चौंकाने वाली बात यह है कि मुख्य आरोपी बबलू उर्फ बॉली के खिलाफ पहले भी सरकारी कार्य में बाधा और मारपीट का मामला दर्ज है, इसके बावजूद वह खुलेआम फिर वारदात को अंजाम दे रहा है।
घटना के बाद नाका ध्वस्त पाया गया और दोबारा लौटते समय सरकारी वाहन पर फिर पथराव किया गया। यह सीधा संकेत है कि खनन माफिया अब कानून, प्रशासन और हथियारबंद बलों तक को डराने की स्थिति में आ चुका है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सरकारी कर्मचारी, वनकर्मी और सुरक्षा बल भी सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा का क्या भरोसा ? यह घटना स्पष्ट करती है कि यदि अब भी कठोर और मिसाल कायम करने वाली कार्रवाई नहीं हुई, तो खनन माफिया का यह आतंक और बढ़ेगा।



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