ग्रामीणों का दावा—लगभग तीन साल से टंकी से नहीं मिली पानी की आपूर्ति; विभाग ने ठेकेदार को कई बार नोटिस देने की बात कही
सिंघाड़ा। ग्राम पंचायत सिंघाड़ा के गांव सिंघाड़ा में जल जीवन मिशन से जुड़ी पानी की टंकी के परिसर की बदहाली ने सफाई, रखरखाव और विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिसर में कचरा बिखरा हुआ है, झाड़ियां उगी हैं और लकड़ियां रखी दिखाई दे रही हैं। ग्रामीणों ने यहां उपले रखने, कथित अतिक्रमण और खुले में शौच की भी शिकायत की है। जिस परिसर का उपयोग गांव की पेयजल व्यवस्था के लिए होना चाहिए, उसकी ऐसी स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है।

मौके की तस्वीरों में प्रवेश क्षेत्र से लेकर परिसर के भीतर तक सफाई की जरूरत स्पष्ट दिखाई देती है। जमीन पर कचरा और प्लास्टिक बिखरे नजर आते हैं। परिसर के एक हिस्से में लकड़ियां रखी हैं, जबकि आसपास घास और झाड़ियां बढ़ी हुई हैं। यह स्थिति सवाल उठाती है कि सार्वजनिक पेयजल परिसर की नियमित देखरेख और निरीक्षण किस स्तर पर हो रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोग परिसर में लकड़ियां और उपले रखकर जगह का निजी उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने इसे अतिक्रमण बताते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की है। हालांकि कथित अतिक्रमण की वास्तविक स्थिति विभागीय निरीक्षण, जमीन के रिकॉर्ड और परिसर की सीमा की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी व्यक्ति को अतिक्रमणकारी घोषित नहीं किया जा सकता।
ग्रामीणों ने यह भी शिकायत की है कि कुछ लोग यहां खुले में शौच करने आते हैं। यह बात ग्रामीणों के कथन पर आधारित है और उपलब्ध तस्वीरों से इसकी पुष्टि नहीं होती। फिर भी पेयजल परिसर से जुड़ी इस शिकायत की जांच और परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है।
गंदगी की शिकायत अधिकारी के संज्ञान में नहीं थी

इस विषय में सनातनी संत रिपोर्टर ने जलदाय विभाग के अधिशासी अभियंता करण मीणा से बातचीत की। परिसर में गंदगी और कथित अतिक्रमण के बारे में अधिकारी ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था। उन्होंने स्थिति दिखवाकर कार्रवाई करने की बात कही।
अधिकारी का यह जवाब परिसर की निगरानी को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल सामने लाता है। सार्वजनिक उपयोग के परिसर में कचरा जमा होने, झाड़ियां बढ़ने और सामग्री रखे जाने की स्थिति विभाग तक क्यों नहीं पहुंची? नियमित निरीक्षण और जिम्मेदारी तय होने पर ऐसी समस्याओं की पहचान समय रहते हो सकती है।
फिलहाल परिसर की तस्वीरें रखरखाव में कमी की ओर संकेत करती हैं। हालांकि किस संस्था या कर्मचारी पर सफाई और सुरक्षा की जिम्मेदारी है, यह संबंधित रिकॉर्ड से स्पष्ट होना बाकी है। विभाग और संबंधित स्थानीय निकाय को जिम्मेदारी तय करके परिसर की सफाई तथा शिकायतों का निस्तारण कराना चाहिए।
ग्रामीणों का दावा—तीन साल से पानी का इंतजार

परिसर की बदहाली के साथ टंकी का संचालन भी ग्रामीणों की नाराजगी का कारण है। ग्रामीणों का दावा है कि टंकी बने लगभग तीन साल हो चुके हैं, लेकिन इससे गांव में एक दिन भी पेयजल आपूर्ति नहीं हुई। उनका कहना है कि निर्माण के बाद पानी मिलने की उम्मीद जगी थी, मगर अब तक इसका लाभ नहीं मिल पाया है।
लगभग तीन साल की अवधि और एक दिन भी पानी नहीं मिलने का दावा ग्रामीणों के कथन पर आधारित है। निर्माण पूर्ण होने की तारीख, परीक्षण और संचालन के विभागीय रिकॉर्ड से इसकी पुष्टि हो सकेगी। हालांकि अधिशासी अभियंता ने बातचीत में यह बताया कि टंकी से पानी की आपूर्ति अभी प्रारंभ नहीं हुई है।
कई नोटिस के बाद भी काम पूरा क्यों नहीं हुआ?
अधिशासी अभियंता करण मीणा ने बताया कि संबंधित ठेकेदार को कई बार नोटिस दिए जा चुके हैं। उनके अनुसार, नोटिस मिलने पर ठेकेदार काम करता है, लेकिन बाद में फिर काम बंद कर देता है। बातचीत के दौरान आपूर्ति शुरू होने की निश्चित तारीख स्पष्ट नहीं हो सकी।
इस स्थिति ने कार्य की निगरानी और नोटिस के अनुपालन पर भी सवाल खड़े किए हैं। जब विभाग को काम बार-बार रुकने की जानकारी है, तो उसे पूरा कराने के लिए क्या कदम उठाए गए? कौन से कार्य बाकी हैं और उन्हें पूरा करने की समयसीमा क्या है? इन सवालों के स्पष्ट जवाब ग्रामीणों को मिलने चाहिए।
नोटिस जारी करना विभागीय प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इसका परिणाम काम पूरा होने के रूप में सामने आना चाहिए। संबंधित अनुबंध और कार्रवाई के दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि ठेकेदार के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई या नहीं। विभाग को इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
सफाई, सुरक्षा और संचालन—तीनों पर कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों की मांग है कि परिसर की सफाई कराई जाए, झाड़ियां हटवाई जाएं और कथित अतिक्रमण की जांच हो। यदि परिसर का अनधिकृत उपयोग पाया जाता है, तो उसे रोककर नियमित निगरानी की व्यवस्था की जाए। साथ ही लंबित कार्य पूरे कर टंकी से पानी की आपूर्ति शुरू कराई जाए।
परिसर में गंदगी दिखाई देने के आधार पर टंकी के पानी को दूषित नहीं कहा जा सकता। पानी की गुणवत्ता का निष्कर्ष जांच के बाद ही निकल सकता है। लेकिन पेयजल व्यवस्था से जुड़े परिसर को साफ और सुरक्षित रखना आवश्यक है। संचालन शुरू करने से पहले जरूरी तकनीकी परीक्षण और पानी की गुणवत्ता संबंधी प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए।
सिंघाड़ा का यह मामला सार्वजनिक संसाधन की देखरेख और विभागीय जवाबदेही से जुड़ा है। परिसर में दिखाई देती गंदगी, ग्रामीणों की शिकायतें और आपूर्ति शुरू नहीं होने की जानकारी के बाद अब ठोस कार्रवाई की जरूरत है। ग्रामीणों को इंतजार है कि परिसर की बदहाली कब दूर होगी और जिस उद्देश्य से टंकी बनी थी, वह कब पूरा होगा।
