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34 वर्षों की गौरवमयी राजकीय सेवा के उपलक्ष्य में पीटीआइ ज्ञानसिंह के निज निवास पर अध्यात्म का अनूठा समागम

बयाना (सुरेंद्र फौजी)। निकटवर्ती ग्राम वस्त्रावली में इन दिनों भक्ति, श्रद्धा और अध्यात्म की त्रिवेणी बह रही है। शिक्षा विभाग में 34 वर्षों तक अपनी उत्कृष्ट, समर्पित और गौरवमयी सेवाएँ पूर्ण करने के उपलक्ष्य में सेवानिवृत्त पीटीआइ (P.T.I.) श्री ज्ञानसिंह जी के निज निवास पर भव्य ‘श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ’ का आयोजन किया जा रहा है। इस धार्मिक अनुष्ठान से न केवल वस्वावली, बल्कि संपूर्ण बयाना क्षेत्र का वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय और पवित्र हो गया है।

राजकीय सेवा से निवृत्ति को अमूमन लोग आराम का काल मानते हैं, लेकिन श्री ज्ञानसिंह जी ने अपनी इस नई पारी की शुरुआत समाज और परिवार के कल्याण के लिए ईश्वरीय आराधना से करने का अनुकरणीय निर्णय लिया है। इस भव्य आयोजन में प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं, जिससे पंडाल छोटा पड़ता दिखाई दे रहा है।

व्यासपीठ से बरस रहा ज्ञान: पंडित चिन्तामणि शर्मा के व्यासपीठ से बरस रहा ज्ञान: पंडित चिन्तामणि शर्मा के मुखारविंद से कथा का रसपान से कथा का रसपान

इस ज्ञान यज्ञ के मुख्य कथावाचक जगनेर (उत्तर प्रदेश) के सुप्रसिद्ध और विद्वान पंडित श्री चिन्तामणि शर्मा (गोपालाचार्य) हैं। पंडित जी अपनी अद्वितीय और ओजस्वी शैली में भागवत महापुराण के गूढ़ रहस्यों को अत्यंत सरल और सुबोध भाषा में आम जनमानस के सामने रख रहे हैं। उनके श्रीमुख से निकलने वाली वाणी श्रोताओं के सीधे हृदय में उतर रही है।

कथा के विभिन्न प्रसंगों, जैसे श्रीकृष्ण जन्म, माखन चोरी, गोवर्धन लीला और रुक्मणी विवाह के दौरान समूचा पांडल करतल ध्वनि और “जय श्रीकृष्ण” के जयकारों से गुंजायमान हो उठता है। पंडित चिन्तामणि शर्मा ने भागवत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि साक्षात श्रीकृष्ण का वांग्मय स्वरूप है। जो भी मनुष्य इसे सच्चे मन से सुनता है, उसके जीवन के सभी कष्ट और पाप स्वतः ही नष्ट हो जाते हैं।

भक्ति रस में सराबोर हुए श्रद्धालु: नाच-गाने के साथ दिव्य आनंद

कथा पंडाल का दृश्य अत्यंत विहंगम और अलौकिक नजर आ रहा है। कथा श्रवण करने के लिए दूर-दराज के गांवों से हजारों की संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु भाग ले रहे हैं। पंडित जी के भजनों और संगीतमय प्रस्तुतियों पर सभी श्रोता अपनी सुध-बुध भूलकर भक्ति रस में पूरी तरह डूब जाते हैं।

वृद्ध, युवा और बच्चे सभी को पंडाल में झूमते और नृत्य करते हुए देखा जा सकता है। भक्ति का यह पूरा आनंद और उत्साह क्षेत्र में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर रहा है। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि ऐसा भव्य और अनुशासित आयोजन क्षेत्र में लंबे समय बाद देखने को मिला है, जहाँ हर व्यक्ति केवल और केवल ईश्वर की भक्ति में लीन है।

ध्रुवघटा वाले स्वामीजी का आगमन: “कलियुग केवल नाम अधारा”

इस धार्मिक महोत्सव को और अधिक दिव्य तब बल मिला, जब ध्रुवघटा के परम पूज्य स्वामीजी ने कथा पंडाल में अपने शिष्यों सहित विशेष रूप से पदार्पण किया। संतों के आगमन से पंडाल में उपस्थित जनसमुदाय भाव-विभोर हो उठा और सभी ने खड़े होकर परम पूज्य स्वामीजी का स्वागत व वंदन किया।

व्यासपीठ से भक्तों को संबोधित करते हुए स्वामीजी ने आध्यात्मिक उपदेशों की वर्षा की। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास जी की चौपाई को उद्धृत करते हुए कहा:

कलियुग केवल नाम अधारा, सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा।”

स्वामीजी ने विस्तार से समझाया कि सतयुग, त्रेता और द्वापर की तुलना में कलियुग में मोक्ष प्राप्त करना सबसे सरल है। इस युग में न तो कठिन तपस्या की आवश्यकता है और न ही बड़े-बड़े यज्ञों की। यदि मनुष्य सच्चे और निर्मल मन से प्रभु श्रीराम और राधेश्याम के नाम का संकीर्तन और स्मरण मात्र कर ले, तो उसके अज्ञान का अंधकार दूर हो जाता है और कल्याण के चक्षु (ज्ञान की आँखें) स्वतः ही खुल जाते हैं। उनके इस सारगर्भित प्रवचन ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

सामूहिक एकता की मिसाल: संपूर्ण ग्रामवासियों का अभूतपूर्व योगदान

इस विशाल और भव्य आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता वस्वावली गांव की एकता और सद्भावना है। आयोजन को सुव्यवस्थित और निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए संपूर्ण गांववासियों ने अपना शानदार और अनुकरणीय योगदान दिया है। गाँव के हर घर से लोग अपनी क्षमता और स्वेच्छा से सेवा कार्य में जुटे हुए हैं।

चाहे कथा पंडाल की व्यवस्था हो, आने वाले अतिथियों का सत्कार हो, या फिर भंडारे और पेयजल की व्यवस्था—हर मोर्चे पर ग्रामीण मुस्तैदी से डटे हुए हैं। गाँव के युवाओं की टोलियाँ वाहनों की पार्किंग से लेकर वृद्ध श्रद्धालुओं को पंडाल तक ससम्मान पहुँचाने के कार्य में निस्वार्थ भाव से लगी हुई हैं।

इस आयोजन की सफलता के पीछे एक मजबूत प्रबंध समिति और क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों का विशेष परिश्रम है। मुख्य रूप से:श्री ज्ञानसिंह जी (P.T.I.): मुख्य आयोजक, जिन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति को इस पुनीत कार्य से जोड़ा।दूल्हेराम पटेल: व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने में अग्रणी भूमिका।लेखराम (प्रधानाचार्य): बौद्धिक और प्रबंधकीय व्यवस्थाओं की देखरेख।समयसिंह, भीमसिंह एवं जुगल सिंह: पंडाल, अतिथि सत्कार और सुरक्षा व्यवस्थाओं के प्रमुख सूत्रधार।

इन सभी प्रमुख व्यक्तित्वों के साथ-साथ समस्त ग्रामवासियों का विशेष और सराहनीय योगदान इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाने में मील का पत्थर साबित हो रहा है।

धार्मिक आयोजनों से मजबूत होती है सामाजिक समरसता

संवाददाताओं से बातचीत करते हुए ग्रामीणों और क्षेत्र के बुद्धिजीवियों ने कहा कि आज के आधुनिक और आपाधापी वाले युग में इस प्रकार के सामूहिक धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने का काम करते हैं। जाति-पाति और ऊंच-नीच के भेदभाव से परे हटकर जब पूरा गाँव एक ही पंडाल में नीचे बैठकर भगवान की कथा सुनता है और एक साथ प्रसाद ग्रहण करता है, तो इससे सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारा बेहद मजबूत होता है।

श्री ज्ञानसिंह जी के परिवार ने इस आयोजन के माध्यम से समाज के सामने एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है कि अपनी जीवन की जमापूंजी और समय का उपयोग किस प्रकार लोक-कल्याण और धर्म के कार्यों में किया जा सकता है।

आगामी कार्यक्रम और भंडारे की तैयारी

सप्ताह भर चलने वाले इस ज्ञान यज्ञ के समापन के अवसर पर एक विशाल पूर्णाहुति यज्ञ और भव्य महाप्रसादी (भंडारे) का आयोजन किया जाएगा। आयोजन समिति ने बयाना क्षेत्र और आसपास के सभी गांवों के धर्मप्रेमी बंधुओं से सपरिवार कथा में सम्मिलित होने और महाप्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ कमाने की भावभीनी अपील की है। वस्वावली की इस पावन धरा पर चल रहा यह भक्ति उत्सव आने वाले लंबे समय तक क्षेत्र के लोगों के मानस पटल पर अंकित रहेगा।

By Sanatani Sant Reporter

I am an exserviceman presently sadhak Bageshwar Balaji. Presently Working as a religious and social news reporter .

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