जहाज (भरतपुर)। भरतपुर जिले के जहाज गांव में लोक आस्था के प्रमुख केंद्र श्री कारिस देव बाबा के मेले का श्रद्धा, उत्साह और पारंपरिक उल्लास के बीच शुभारंभ हुआ। मेले के उद्घाटन कार्यक्रम में राजस्थान सरकार के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम सहित क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, सरपंच और गणमान्य लोग शामिल हुए। शाम करीब 5 बजे फीता काटकर मेले का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस दौरान देव बाबा के जयकारों से पूरा मेला परिसर भक्तिमय हो उठा।
आयोजन से जुड़े राजेश जहाजिया के अनुसार, कार्यक्रम में पहुंचे अतिथियों का मेला कमेटी और ग्रामीणों की ओर से भव्य स्वागत किया गया। गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम सहित अतिथियों का 51 किलो की विशाल माला पहनाकर अभिनंदन किया गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
मेले के शुभारंभ पर उमड़ा उत्साह

कार्यक्रम के दौरान श्री कारिस देव बाबा के जयकारे गूंजते रहे। मेले के शुभारंभ को लेकर जहाज गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में उत्साह देखने को मिला। आयोजन में ग्रामीणों और युवा टीम ने व्यवस्था संभालने में सहयोग किया।
मेला कमेटी से जुड़े राजेश जहाजिया ने कार्यक्रम के आयोजन एवं संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कार्यक्रम में पहुंचे सभी अतिथियों का देव मंदिर कमेटी, जहाज बस्ती के ग्रामीणों और युवा टीम की ओर से आभार जताया तथा भविष्य में भी इसी प्रकार सहयोग बनाए रखने की अपील की।
ये अतिथि रहे मौजूद

शुभारंभ कार्यक्रम में गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम के साथ हाकिम बैंसला, केदार बारा, प्रहलाद खटाना, अतर सिंह छावड़ी, सामाजिक कार्यकर्ता लोकेश पीपलखेड़ा, गोपाल बस्सी, नरोत्तम अड्डा, दरवारी सरपंच, निहाल सरपंच, रामवीर सरपंच, बीरेंद्र बुढ़वार, डॉ. गोविंद गुर्जर, चतर सूपा, सत्य प्रकाश छावड़ी, अशोक पटेल रुदावल सहित मध्यप्रदेश से आए परमाल गुर्जर एवं अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम में मंच संचालन अतर सिंह छावड़ी ने किया। अतिथियों के स्वागत के साथ मेले की धार्मिक एवं सामाजिक परंपरा को आगे बढ़ाने और क्षेत्र में आपसी भाईचारा बनाए रखने का संदेश भी दिया गया।
जहाज में श्री कारिस देव बाबा की आस्था का प्रमुख केंद्र
भरतपुर जिले का जहाज गांव श्री कारिस देव बाबा की आस्था के प्रमुख केंद्रों में माना जाता है। उपलब्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक जानकारियों के अनुसार नगला जहाज स्थित देव बाबा का स्थान विशेष रूप से प्रसिद्ध है। राजस्थान की लोक संस्कृति से संबंधित विभिन्न स्रोतों में भी देव बाबा के मुख्य स्थल के रूप में नगला जहाज का उल्लेख मिलता है।
लोकमान्यताओं के अनुसार देव बाबा को विशेष रूप से पशुपालकों और ग्रामीण समाज की आस्था से जोड़कर देखा जाता है। क्षेत्र के श्रद्धालुओं में देव बाबा के प्रति गहरी आस्था है और वर्षों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते रहे हैं।
ग्रामीण अंचल में देव बाबा से जुड़ी लोक परंपराएं पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही हैं। यही कारण है कि जहाज का मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रहकर क्षेत्र की लोक संस्कृति, सामाजिक मेलजोल और पारंपरिक आस्था का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।
वर्ष में दो बार मेले की परंपरा
राजस्थान की लोक संस्कृति से संबंधित उपलब्ध जानकारियों में बताया गया है कि नगला जहाज में श्री देव बाबा का मेला वर्ष में दो प्रमुख अवसरों—भाद्रपद शुक्ल पंचमी और चैत्र शुक्ल पंचमी—पर आयोजित होने की परंपरा है।
भाद्रपद में लगने वाले मेले का ग्रामीण क्षेत्र में विशेष महत्व माना जाता है। राजस्थान के साथ-साथ आसपास के राज्यों से भी श्रद्धालुओं के यहां पहुंचने की परंपरा रही है। मेले के दौरान देव बाबा के दर्शन, पूजा-अर्चना और परंपरागत धार्मिक गतिविधियों में श्रद्धालु भाग लेते हैं।
समय के साथ मेले का स्वरूप भी विस्तृत हुआ है। धार्मिक आस्था के साथ यहां ग्रामीण संस्कृति और सामाजिक मेलजोल की झलक देखने को मिलती है। दूर-दराज से आने वाले लोगों के कारण मेले के दिनों में जहाज गांव और आसपास का क्षेत्र श्रद्धालुओं की आवाजाही से गुलजार रहता है।
लोकदेवता के रूप में गहरी आस्था
राजस्थान में लोकदेवताओं की परंपरा ग्रामीण संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय लोकदेवताओं से जुड़ी मान्यताएं और धार्मिक परंपराएं आज भी जीवंत हैं। भरतपुर क्षेत्र में श्री कारिस देव बाबा के प्रति ऐसी ही गहरी श्रद्धा देखने को मिलती है।
लोकमान्यता के अनुसार देव बाबा का संबंध पशुपालकों और पशुओं की रक्षा से भी जोड़ा जाता है। कई सांस्कृतिक स्रोतों में उन्हें ग्वालों और पशुपालक समाज के आराध्य लोकदेवता के रूप में उल्लेखित किया गया है। हालांकि इन कथाओं को धार्मिक एवं लोकमान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए देव बाबा का स्थान केवल मंदिर नहीं बल्कि आस्था और विश्वास का केंद्र है। कई परिवार पीढ़ियों से यहां दर्शन करने आते रहे हैं। इसी परंपरा के कारण जहाज का नाम दूर-दराज के क्षेत्रों में भी देव बाबा के धार्मिक स्थल के रूप में जाना जाता है।
धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक समागम
ग्रामीण भारत में मेले सदियों से केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहे हैं। वे लोगों के आपसी मेलजोल, संस्कृति और सामाजिक संबंधों को मजबूत करने का माध्यम भी रहे हैं। जहाज का श्री कारिस देव बाबा मेला भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाता दिखाई देता है।
मेला कमेटी और स्थानीय ग्रामीणों की सहभागिता से आयोजित होने वाले इस आयोजन में गांव के युवाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और कार्यक्रमों के संचालन के लिए स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाएं की जाती हैं।
इस बार भी मेला शुभारंभ कार्यक्रम में बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोगों की भागीदारी देखने को मिली। अतिथियों के स्वागत से लेकर कार्यक्रम के संचालन तक ग्रामीणों और युवा टीम ने सक्रिय भूमिका निभाई।
मेला कमेटी ने जताया सभी का आभार
कार्यक्रम के आयोजन से जुड़े राजेश जहाजिया ने गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम सहित सभी अतिथियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, ग्रामीणों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि देव मंदिर कमेटी, जहाज बस्ती एवं समस्त युवा टीम की ओर से कार्यक्रम में पहुंचे सभी अतिथियों का धन्यवाद है। धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में इसी प्रकार सभी का सहयोग मिलता रहे, जिससे क्षेत्र की परंपराओं को आगे बढ़ाया जा सके।
कार्यक्रम के समापन पर श्री कारिस देव बाबा के जयकारे लगाए गए और श्रद्धालुओं ने क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।
जय श्री देव बाबा।

