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बयाना | भरतपुर राजस्थान के भरतपुर जिले में ऐतिहासिक और प्राकृतिक महत्व रखने वाला बयाना क्षेत्र अपने किलों, पहाड़ियों, जंगलों और ऐतिहासिक स्थलों के साथ-साथ प्राकृतिक खूबसूरती के लिए भी जाना जाता है। इसी क्षेत्र में डांग एवं पहाड़ी इलाके के बीच स्थित दर्रा बराहना मानसून के दिनों में प्रकृति प्रेमियों और स्थानीय लोगों के आकर्षण का केंद्र बन जाता है। स्थानीय स्तर पर इसे दर्रा बरहम या दरबराना के नाम से भी जाना जाता है।

चट्टानी पहाड़ियां हरियाली की चादर ओढ़ लेती हैं। पहाड़ों से बारिश का पानी नीचे की ओर बहता हुआ जब चट्टानों के बीच से गुजरता है तो कई स्थानों पर झरने का मनमोहक रूप दिखाई देता है। यही प्राकृतिक नजारा दर्रा बराहना को मानसून के दौरान खास बना देता है।

बारिश में बदल जाता है पूरा नजारा

गर्मी और सूखे मौसम में सामान्य नजर आने वाला यह पहाड़ी क्षेत्र बारिश के दिनों में बिल्कुल अलग दिखाई देता है। चारों ओर हरियाली, पहाड़ियों से गिरता पानी, चट्टानों के बीच बहती पानी की धार और जंगलों का प्राकृतिक वातावरण यहां आने वाले लोगों को आकर्षित करता है।

मानसून के दौरान जब क्षेत्र में अच्छी बारिश होती है तो पहाड़ी ढलानों से पानी तेजी से नीचे आता है और प्राकृतिक झरने का रूप ले लेता है। पानी के बहाव के साथ चट्टानों पर बनते छोटे-छोटे जलप्रपात और आसपास की हरियाली इस स्थान की खूबसूरती को और बढ़ा देती है।यही वजह है कि बारिश के मौसम में बयाना, भरतपुर और आसपास के गांवों के लोग यहां घूमने और प्रकृति का आनंद लेने पहुंचते हैं। उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे इलाकों से भी स्थानीय लोग इस प्राकृतिक स्थल तक पहुंचते हैं।

पिकनिक और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण

दर्रा बराहना स्थानीय लोगों के लिए एक तरह का प्राकृतिक पिकनिक स्पॉट बन चुका है। परिवार, युवा समूह और प्रकृति प्रेमी मानसून के दौरान यहां पहुंचकर पहाड़ी वातावरण का आनंद लेते हैं।कुछ लोग पहाड़ी क्षेत्र में घूमते हैं तो युवा ट्रैकिंग और प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेते नजर आते हैं।

बारिश के बाद पहाड़ियों पर दिखाई देने वाली हरियाली और झरने का दृश्य मोबाइल कैमरों में कैद करने के लिए भी लोग उत्साहित रहते हैं।हालांकि यह स्थान किसी बड़े विकसित पर्यटन स्थल की तरह व्यवस्थित नहीं है। यहां आने वाले लोगों को प्राकृतिक वातावरण में ही घूमना पड़ता है। यही इसकी खूबसूरती भी है और चुनौती भी।

दर्रा बराहना कैसे पहुंचें?

दर्रा बराहना तक पहुंचने के लिए बयाना क्षेत्र से बयाना-तरसूमा मार्ग की ओर जाना होता है। मुख्य सड़क से आगे स्थानीय रास्ते और पहाड़ी मार्ग के जरिए इस प्राकृतिक स्थल तक पहुंचा जा सकता है।

पहाड़ी रास्ते होने के कारण पहली बार आने वाले लोगों को स्थानीय लोगों से रास्ते की जानकारी लेना उपयोगी रहता है। बरसात के दौरान रास्तों की स्थिति बदल सकती है, इसलिए वाहन लेकर जाने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी

खूबसूरती के साथ खतरा भी, सावधानी जरूरी

दर्रा बराहना जितना खूबसूरत है, उतना ही यहां सावधानी बरतना भी जरूरी है। खासकर मानसून के दौरान पहाड़ियों पर फिसलन बढ़ जाती है और अचानक बारिश होने पर पानी का बहाव तेज हो सकता है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यहां पर्यटकों के लिए किसी बड़े विकसित पर्यटन स्थल जैसी विशेष सुरक्षा व्यवस्था, रेलिंग, गार्ड, चेंजिंग रूम, मेडिकल सुविधा या अन्य पर्यटन सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

इसलिए यहां घूमने आने वाले लोगों को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी स्वयं भी समझनी चाहिए। तेज बहाव वाले पानी में जाने, गहरे पानी में उतरने या झरने के ठीक नीचे खड़े होने से बचना चाहिए।

पहाड़ी चट्टानों पर चढ़ते समय भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि बारिश के कारण चट्टानें बेहद फिसलन भरी हो सकती हैं।बच्चों को पानी और पहाड़ी किनारों से दूर रखना जरूरी है। यदि लगातार बारिश हो रही हो या मौसम अचानक खराब हो जाए तो पहाड़ी क्षेत्र में रुकने के बजाय सुरक्षित स्थान की ओर लौटना बेहतर है।स्थानीय स्तर पर पुलिस प्रशासन की निगरानी रहती है, लेकिन इसके बावजूद पर्यटकों को सुरक्षा नियमों और मौसम की परिस्थितियों को गंभीरता से लेना चाहिए।

पर्यटन की संभावनाएं

दर्रा बराहना जैसे प्राकृतिक स्थलों में स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने की काफी संभावनाएं हैं। यदि भविष्य में यहां सुरक्षित रास्ते, उचित संकेतक, पार्किंग, स्वच्छता व्यवस्था, प्राथमिक चिकित्सा, सुरक्षा रेलिंग और अन्य मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएं तो यह बयाना क्षेत्र के महत्वपूर्ण प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है।

इसके साथ ही स्थानीय प्रशासन और आम लोगों की जिम्मेदारी भी है कि इस प्राकृतिक स्थल को प्लास्टिक और कचरे से बचाया जाए। यहां घूमने आने वाले लोगों को भी खाने-पीने की वस्तुओं के पैकेट और प्लास्टिक इधर-उधर फेंकने के बजाय अपने साथ वापस ले जाने चाहिए।

प्रकृति हमें खूबसूरत स्थान देती है, लेकिन उनकी खूबसूरती बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है।

कब जाएं दर्रा बराहना?

दर्रा बराहना घूमने का सबसे अच्छा समय सामान्यतः मानसून यानी जुलाई से सितंबर के बीच माना जा सकता है। अच्छी बारिश के बाद यहां झरने और हरियाली का प्राकृतिक रूप सबसे बेहतर दिखाई देता है। हालांकि मौसम और बारिश की स्थिति हर साल अलग हो सकती है।अगर आप दर्रा बराहना जाने की योजना बना रहे हैं तो मौसम की स्थिति की जानकारी लेकर ही जाएं और बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्र में अतिरिक्त सावधानी बरतें।

दर्रा बराहना सिर्फ एक झरना नहीं, बल्कि बयाना की पहाड़ियों में छिपी प्रकृति की एक खूबसूरत तस्वीर है। जरूरत है इसे देखने के साथ-साथ इसकी सुरक्षा और स्वच्छता का भी ध्यान रखने की।

By Sanatani Sant Reporter

I am an exserviceman presently sadhak Bageshwar Balaji. Presently Working as a religious and social news reporter .

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