दो महीने पहले अधिकारी को अवगत कराने के बावजूद नहीं सुधरे हालात; हरिजन बस्ती के सामने रोज भरता है पानी, बाइक सवारों के गिरने का दावा
बयाना। शहरवासियों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संभालने वाले जलदाय विभाग की व्यवस्थाओं पर तीन अलग-अलग तस्वीरों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग के एक भूमिगत जल भंडारण टैंक की छत कई स्थानों से टूटी और खुली पड़ी है। कुंडा क्षेत्र की हरिजन बस्ती के पास बने दूसरे टैंक का क्षतिग्रस्त ऊपरी हिस्सा पक्की छत के बजाय हरे रंग की तिरपाल अथवा जाली जैसे अस्थायी आवरण से ढका हुआ है। वहीं बयाना–हिंडौन मार्ग पर हरिजन बस्ती के सामने पेयजल पाइपलाइन में कथित लीकेज के कारण सड़क पर पानी भर रहा है और बड़ा गड्ढा दुर्घटना को न्योता दे रहा है।
इन तीनों स्थानों की तस्वीरें जलापूर्ति व्यवस्था के नियमित निरीक्षण, मरम्मत और सुरक्षा प्रबंधों पर सवाल उठाती हैं। मामला केवल पानी की बर्बादी तक सीमित नहीं है, बल्कि शहरवासियों के स्वास्थ्य, सड़क सुरक्षा और सरकारी संपत्ति के रखरखाव से भी जुड़ा है।
पहले टैंक की छत कई स्थानों से टूटी

जलदाय विभाग परिसर में स्थित भूमिगत जल भंडारण टैंक की छत का सीमेंट और ईंटों वाला हिस्सा कई स्थानों से क्षतिग्रस्त दिखाई दे रहा है। छत में बड़े-बड़े खुले भाग बने हुए हैं तथा उनके नीचे टैंक की गहराई नजर आती है। आसपास घास भी उगी हुई है।
ऐसी स्थिति में किसी कर्मचारी, बच्चे अथवा जानवर के असावधानीवश टैंक में गिरने का खतरा बना रहता है। खुले हिस्से से धूल, मिट्टी, पत्तियां, कीड़े-मकोड़े अथवा अन्य बाहरी सामग्री अंदर पहुंचने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
इस टैंक की खराब स्थिति करीब दो महीने पहले भी देखी गई थी। उस समय जलदाय विभाग के अधिकारी मनेन्द्र गुर्जर को मामले से अवगत कराया गया था। इसके बावजूद दो महीने बाद भी मौके पर प्रभावी मरम्मत अथवा मजबूत अस्थायी सुरक्षा व्यवस्था दिखाई नहीं दी।
दूसरा टैंक फटी तिरपाल के भरोसे

कुंडा क्षेत्र की हरिजन बस्ती के पास बने दूसरे जल भंडारण टैंक की स्थिति भी चिंताजनक दिखाई देती है। स्थानीय स्तर पर जानकारी करने पर बताया गया कि टैंक का ऊपरी हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के कारण उसे हरे रंग की तिरपाल अथवा जाली जैसे आवरण से ढका गया है।
तस्वीरों में यह आवरण कई स्थानों से फटा और छेदयुक्त नजर आ रहा है। इसका बीच वाला हिस्सा नीचे की ओर झुका हुआ है, जहां पानी, मिट्टी, पत्तियां तथा गंदगी जैसी सामग्री जमा दिखाई देती है। टैंक के आसपास भी सफाई की स्थिति संतोषजनक नजर नहीं आती।
हालांकि विभागीय पुष्टि के बिना यह नहीं कहा जा सकता कि टैंक की पूरी छत टूटी हुई है अथवा उसका कितना हिस्सा क्षतिग्रस्त है। फिर भी पेयजल भंडारण टैंक पर इस प्रकार का फटा हुआ अस्थायी आवरण सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर जांच की मांग करता है।
पाइपलाइन का लीकेज नहीं रुका, सड़क पर बना गड्ढा

जलदाय विभाग की व्यवस्थाओं से जुड़ी तीसरी समस्या बयाना–हिंडौन मार्ग पर कुंडा क्षेत्र की हरिजन बस्ती के सामने दिखाई दी। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां पेयजल पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के बाद सड़क खोदी गई थी, लेकिन पाइपलाइन का लीकेज पूरी तरह बंद नहीं हुआ और गड्ढे को भी समतल नहीं किया गया।
तस्वीर में सड़क के बड़े हिस्से पर पानी भरा दिखाई दे रहा है। गड्ढे और उसके आसपास सड़क की सतह क्षतिग्रस्त है तथा बजरी बिखरी हुई नजर आ रही है। पानी भरा होने के कारण वाहन चालकों को गड्ढे की वास्तविक गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पाइपलाइन से निकलने वाला पानी प्रतिदिन यहां भर जाता है। मार्ग से गुजरने वाले दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक परेशानी होती है और कई बाइक सवार असंतुलित होकर गिर भी चुके हैं। हालांकि किसी गंभीर दुर्घटना की आधिकारिक सूचना सामने नहीं आई है, लेकिन सड़क की मौजूदा स्थिति दुर्घटना की आशंका जरूर पैदा करती है।
लीकेज से पानी और सड़क दोनों का नुकसान
पेयजल पाइपलाइन में लगातार लीकेज रहने से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद हो सकता है। सड़क पर लगातार पानी जमा रहने से डामर और सड़क की निचली परत कमजोर होने की आशंका भी रहती है। इससे छोटा गड्ढा धीरे-धीरे बड़ा हो सकता है और वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ सकता है।
लीकेज वाले स्थान पर जमा गंदा पानी पाइपलाइन में नकारात्मक दबाव की स्थिति बनने पर अंदर प्रवेश कर सकता है या नहीं, इसकी तकनीकी जांच विभाग को करनी चाहिए। इसलिए केवल ऊपर से गड्ढा भर देना पर्याप्त नहीं होगा। पहले पाइपलाइन के लीकेज को पूरी तरह बंद कराकर परीक्षण करना और उसके बाद सड़क को निर्धारित मानकों के अनुसार बहाल करना आवश्यक है।
तस्वीर से पानी दूषित होने की पुष्टि नहीं
इन तस्वीरों के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि टैंकों या पाइपलाइन का पानी निश्चित रूप से दूषित हो चुका है। पानी की गुणवत्ता की पुष्टि अधिकृत प्रयोगशाला में नमूने की जांच के बाद ही हो सकती है। हालांकि टैंकों के असुरक्षित आवरण, आसपास दिखाई दे रही गंदगी और पाइपलाइन लीकेज को देखते हुए विभाग को सावधानी के तौर पर पानी की जांच अवश्य करानी चाहिए।
दोनों टैंकों तथा संबंधित आपूर्ति क्षेत्र से पानी के नमूने लेकर बैक्टीरियोलॉजिकल और आवश्यक रासायनिक जांच कराई जानी चाहिए। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने से स्थानीय लोगों की आशंकाएं भी दूर हो सकेंगी।
सुरक्षित जल भंडारण के लिए क्या जरूरी?
पेयजल भंडारण टैंक की छत मजबूत, साफ और पूरी तरह बंद होनी चाहिए। निरीक्षण के लिए बनाए गए मैनहोल पर सुरक्षित तथा ताले वाला ढक्कन होना चाहिए। वेंटिलेशन और ओवरफ्लो पाइप पर जाली, परिसर में घेराबंदी, नियमित सफाई, कीटाणुशोधन और पानी की गुणवत्ता की जांच जैसी व्यवस्थाएं भी जरूरी हैं।
टैंक की छत क्षतिग्रस्त होने पर स्थायी मरम्मत तक खुले हिस्से को मजबूत सामग्री से बंद किया जाना चाहिए। साधारण तिरपाल या फटी हुई जाली को लंबे समय तक पक्की छत का विकल्प नहीं माना जा सकता।
विकसित भारत के दावों के बीच जमीनी तस्वीर
देश और प्रदेश में विकास तथा सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन शहर को पानी पहुंचाने वाले टैंकों की टूटी छत, फटी तिरपाल और लीकेज से सड़क पर बने गड्ढे की तस्वीरें इन दावों के जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल उठाती हैं।
विकास केवल नई परियोजनाओं और घोषणाओं से नहीं, बल्कि पहले से मौजूद बुनियादी सुविधाओं के नियमित रखरखाव से भी दिखाई देता है। जब मामला हजारों लोगों की पेयजल सुरक्षा और रोजाना गुजरने वाले वाहन चालकों की जान से जुड़ा हो, तब शिकायत पर त्वरित कार्रवाई और विभागीय जवाबदेही बेहद जरूरी हो जाती है।
जलदाय विभाग से प्रमुख सवाल
- क्या दोनों जल भंडारण टैंक वर्तमान में शहर की पेयजल आपूर्ति के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं?
- दोनों टैंकों की छत कब और किस कारण क्षतिग्रस्त हुई?
- कुंडा स्थित टैंक को तिरपाल से कब से ढका गया है?
- फटा आवरण बदलकर स्थायी छत की मरम्मत क्यों नहीं कराई गई?
- दोनों टैंकों की आखिरी सफाई और कीटाणुशोधन कब हुआ?
- पानी की अंतिम प्रयोगशाला जांच कब कराई गई?
- दो महीने पहले जानकारी देने के बाद पहले टैंक पर क्या कार्रवाई हुई?
- हरिजन बस्ती के सामने पाइपलाइन का लीकेज कब से है?
- लीकेज और सड़क के गड्ढे की मरम्मत कब तक होगी?
- दुर्घटना रोकने के लिए मौके पर बैरिकेड अथवा चेतावनी संकेत क्यों नहीं लगाए गए?
जलदाय विभाग को तत्काल तीनों स्थानों का निरीक्षण कराना चाहिए। दोनों टैंकों की स्थायी मरम्मत, पानी की गुणवत्ता की जांच, पाइपलाइन लीकेज को पूरी तरह बंद करने और सड़क के गड्ढे को सुरक्षित तरीके से भरवाने की आवश्यकता है।
इस संबंध में जलदाय विभाग के अधिशासी अभियंता (XEN) करण मीणा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
