बयाना. सरकार की बजट घोषणाओं और विकास के दावों के बीच बयाना क्षेत्र के नगला शीशों गांव की एक पुरानी समस्या आज भी समाधान का इंतजार कर रही है। गांव के पास प्रस्तावित रेलवे अण्डरपास (आरयूबी) का निर्माण कार्य स्वीकृति और बजट जारी होने के बावजूद शुरू नहीं हो सका है। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि स्कूली बच्चों, महिलाओं और ग्रामीणों को आज भी रोजाना जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक पार करना पड़ रहा है।
ग्रामीण के अनुसार यह मांग करीब 40 से 50 साल पुरानी है। लंबे संघर्ष और कई बार ज्ञापन देने के बाद वर्ष 2022-23 के बजट में रेलवे अण्डरपास निर्माण को स्वीकृति मिली थी। इसके लिए करीब 1 करोड़ 76 लाख रुपए की राशि भी मंजूर की गई, लेकिन आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। ग्रामीणों का आरोप है कि राशि रेलवे कोटा मंडल को हस्तांतरित नहीं होने के कारण काम अटका हुआ है।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि गांव के बच्चे रोज स्कूल जाने के लिए रेलवे लाइन पार करते हैं। कई बार ट्रेनों की आवाजाही के बीच हादसे का खतरा बना रहता है। महिलाओं, बुजुर्गों और किसानों को भी खेतों और बाजार तक पहुंचने के लिए यही रास्ता अपनाना पड़ता है। बरसात के दिनों में हालात और ज्यादा खतरनाक हो जाते हैं।ग्रामीण देवी सिंह ने बताया कि गांव के लोग वर्षों से इस अण्डरपास की मांग कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की उदासीनता के कारण आज तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। उनका कहना है कि जब बजट स्वीकृत हो चुका है तो फिर निर्माण कार्य शुरू क्यों नहीं किया जा रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द काम शुरू नहीं हुआ तो ग्रामीण आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
ग्रामीणों ने रामकिशन सैनी के नेतृत्व में किशन स्वरूप सैनी, ख्याली राम, हुकमसिंह, सुनील सैनी, देवीराम, बाबू लाल, किशन सिंह, पूरन सिंह, कुमरसिंह, कृष्णा सहित ग्रामीणों की उपस्थिति में तहसीलदार बयाना को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर 25 मई तक निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो गांव नगला शीशों और आसपास के लोग बड़ा आंदोलन करेंगे तथा आवश्यकता पड़ने पर रेल रोको आंदोलन भी किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ अण्डरपास का मुद्दा नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और लोगों की जिंदगी से जुड़ा सवाल है।
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