भरतपुर। रक्षाबंधन के अगले दिन शनिवार, 29 अगस्त 2026 को भरतपुर जिले के प्रसिद्ध बंध बरेठा में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचे। बारिश के मौसम में पानी से लबालब जलाशय, चारों ओर फैली हरी-भरी पहाड़ियां और शांत प्राकृतिक वातावरण लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। परिवारों और युवाओं की भीड़ ने यहां के मनोरम नजारों का आनंद लिया। तस्वीरों में भी जलाशय के किनारे और व्यू-पॉइंट पर पर्यटकों की अच्छी-खासी मौजूदगी दिखाई दे रही है।
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लेकिन बंध बरेठा को केवल एक पिकनिक स्पॉट या खूबसूरत बांध समझना इसकी अहमियत को कम करके आंकना होगा। यह स्थान पर्यटन, इतिहास, वन्यजीव, पक्षी संरक्षण और जल संसाधन—इन सभी दृष्टियों से भरतपुर की महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहरों में शामिल है।
भरतपुर के इतिहास से जुड़ा है बंध बरेठा

राजस्थान पर्यटन विभाग के अनुसार बंध बरेठा भरतपुर के तत्कालीन शासकों का पुराना वन्यजीव क्षेत्र रहा है और वर्तमान में इसका वन क्षेत्र वन विभाग के प्रशासन में है। यहां ककुंद नदी पर बांध का निर्माण महाराजा जसवंत सिंह ने 1866 में शुरू कराया था और 1897 में महाराजा राम सिंह के शासनकाल में इसे पूरा किया गया। बांध के पास स्थित शाही महल का निर्माण महाराजा किशन सिंह ने कराया था और यह भरतपुर राजपरिवार की निजी संपत्ति है।
यानी आज जिस विशाल जलराशि और पहाड़ियों के बीच पर्यटक तस्वीरें खिंचवाते हैं, उसके पीछे करीब डेढ़ शताब्दी का इतिहास भी मौजूद है। यही ऐतिहासिक विरासत बंध बरेठा को सामान्य जलाशयों से अलग पहचान देती है।
सिर्फ पानी नहीं, जैव विविधता का बड़ा संसार
बंध बरेठा की असली ताकत इसकी प्राकृतिक और पारिस्थितिक संपदा है। राजस्थान वन विभाग के उपलब्ध आंकड़ों में Band Baretha Wildlife Sanctuary का क्षेत्रफल 368.5048 वर्ग किलोमीटर दर्ज है।
भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय से संबंधित दस्तावेज में इस इलाके को उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन क्षेत्र बताया गया है। यहां सांभर, चीतल, नीलगाय और जंगली सूअर जैसे वन्यजीवों के साथ मॉनिटर लिजार्ड और इंडियन पाइथन जैसे सरीसृप भी पाए जाते हैं। वनस्पतियों में बबूल, सागौन, बेर और खैर जैसी प्रजातियों का उल्लेख मिलता है।
सबसे खास पहचान यहां के पक्षियों की है। राजस्थान पर्यटन विभाग के अनुसार बंध बरेठा में 200 से अधिक प्रजातियों के पक्षी देखे जा सकते हैं और दुर्लभ माने जाने वाले ब्लैक बिटर्न का भी यहां उल्लेख मिलता है। इसी कारण यह क्षेत्र पक्षी प्रेमियों और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों के लिए विशेष महत्व रखता है।
इस लिहाज से बंध बरेठा केवल घूमने की जगह नहीं, बल्कि भरतपुर के प्राकृतिक पर्यावरण को सुरक्षित रखने वाली एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी संपदा भी है।
मानसून में बदल जाता है नजारा
बारिश के दिनों में बंध बरेठा की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। जलाशय में पानी बढ़ने के साथ आसपास की पहाड़ियां हरी चादर ओढ़ लेती हैं। पहाड़ियों और विशाल जलराशि का मेल राजस्थान के इस हिस्से में ऐसा दृश्य तैयार करता है, जो पहली बार आने वाले पर्यटक को चौंका सकता है।
इस वर्ष भी मानसून के दौरान बांध में पानी तेजी से बढ़ा। 7 अगस्त 2026 की रिपोर्ट में जलस्तर 26 फीट पार पहुंचने की जानकारी सामने आई थी और निचले क्षेत्रों के लोगों को सतर्क किया गया था।
यही भरपूर पानी और मानसूनी हरियाली रक्षाबंधन जैसे त्योहारों के आसपास यहां पर्यटकों की संख्या बढ़ने का बड़ा कारण बनती है।
बंध बरेठा कितनी दूर?
सड़क मार्ग और शुरुआती स्थान के अनुसार दूरी में कुछ अंतर हो सकता है। उपलब्ध पर्यटन जानकारी के अनुसार बयाना से बंध बरेठा करीब 10–11 किमी और भरतपुर शहर से करीब 43–44 किमी पड़ता है। आगरा से लगभग 80 किमी और जयपुर से करीब 187 किमी की दूरी बताई गई है।
दिल्ली से आने वाले यात्रियों के लिए मार्ग के अनुसार दूरी बदल सकती है, इसलिए यात्रा शुरू करने से पहले वर्तमान नेविगेशन से सड़क मार्ग और यातायात की स्थिति देखना बेहतर रहेगा। बयाना रेलवे जंक्शन नजदीकी प्रमुख रेल संपर्कों में से एक है।
इस भौगोलिक स्थिति का एक बड़ा फायदा है—बंध बरेठा भरतपुर–आगरा–फतेहपुर सीकरी–बयाना पर्यटन सर्किट का हिस्सा बनने की मजबूत क्षमता रखता है।
एक यात्रा में देख सकते हैं कई पर्यटन स्थल

बंध बरेठा आने वाले पर्यटक चाहें तो अपनी यात्रा को एक दिन की पिकनिक तक सीमित न रखकर आसपास के ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों से जोड़ सकते हैं।
सबसे नजदीक बयाना है, जिसका अपना समृद्ध इतिहास है। क्षेत्र में बयाना किला ऐतिहासिक पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। एक स्थानीय पर्यटन गाइड इसे बंध बरेठा से लगभग 22 किमी बताती है। मानसून में दर्र बरहाना का मौसमी झरना भी आकर्षण बनता है, जिसे उसी स्रोत में बंध बरेठा से करीब 9 किमी बताया गया है।
इसके अलावा पर्यटक भरतपुर पहुंचकर विश्व प्रसिद्ध केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, लोहागढ़ किला, भरतपुर पैलेस एवं संग्रहालय जैसे स्थान देख सकते हैं। उत्तर की ओर यात्रा बढ़ाने पर डीग के महल, उद्यान और किला भी महत्वपूर्ण विकल्प हैं। भारत सरकार का Incredible India पोर्टल भी भरतपुर के आसपास डीग को प्रमुख पर्यटन आकर्षण के रूप में प्रस्तुत करता है।
आगरा की ओर जाने वाले पर्यटक फतेहपुर सीकरी और ताजमहल को भी यात्रा कार्यक्रम में जोड़ सकते हैं। उपलब्ध दूरी संबंधी जानकारी में फतेहपुर सीकरी लगभग 44 किमी तथा आगरा लगभग 80 किमी बताया गया है।
इस तरह यदि व्यवस्थित पर्यटन सर्किट विकसित किया जाए तो कोई पर्यटक प्रकृति + वन्यजीव + इतिहास + ब्रज संस्कृति का अनुभव एक ही क्षेत्र में कर सकता है।
वाटर-बेस्ड और ईको-एडवेंचर पर्यटन की भी योजना
बंध बरेठा के पर्यटन भविष्य से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बात यह है कि राजस्थान सरकार के पर्यटन संबंधी दस्तावेज में इसे वाटर-बेस्ड पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए ईको-एडवेंचर टूरिज्म साइट के रूप में विकसित किए जाने वाले स्थानों में शामिल किया गया था। इसी सूची में जयपुर के नेवता व कानोता बांध, जोधपुर के कायलाना व सुरसागर जैसे स्थान भी शामिल थे।
इसलिए इसे केवल सामान्य अर्थ में “वाटर पार्क बनने जा रहा है” लिखने के बजाय अधिक तथ्यात्मक रूप से यह कहना उचित होगा कि बंध बरेठा में वाटर-बेस्ड/ईको-एडवेंचर पर्यटन गतिविधियों के विकास की सरकारी घोषणा/योजना सामने आ चुकी है।
यदि यह विकास पर्यावरणीय नियमों और वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए होता है, तो बंध बरेठा भरतपुर जिले के पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से उभर सकता है।
पर्यटन बढ़े, लेकिन प्रकृति की कीमत पर नहीं
शनिवार को दिखाई दी पर्यटकों की भीड़ एक सकारात्मक संकेत है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और छोटे कारोबार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। स्थानीय युवाओं के लिए गाइडिंग, खान-पान, स्थानीय उत्पाद, परिवहन और अन्य पर्यटन सेवाओं में अवसर तैयार हो सकते हैं।
लेकिन एक वन्यजीव अभयारण्य और महत्वपूर्ण जलाशय होने के कारण यहां स्वच्छता और सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। प्लास्टिक, डिस्पोजेबल सामग्री और खाने-पीने का कचरा जलाशय या वन क्षेत्र में छोड़ना प्राकृतिक सुंदरता के साथ वन्यजीवों के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है।
पर्यटकों को भी निर्धारित सुरक्षित स्थानों तक ही रहना चाहिए। बारिश में पहाड़ी चट्टानें और फिसलन वाले क्षेत्र जोखिमपूर्ण हो सकते हैं। इसी प्रकार गहरे पानी में उतरना, प्रतिबंधित क्षेत्र में जाना या वन्यजीवों के बहुत करीब पहुंचना पर्यटन नहीं बल्कि दुर्घटना को निमंत्रण दे सकता है। जल-गतिविधियां भी केवल अधिकृत और सुरक्षा-व्यवस्था वाली सुविधा के अंतर्गत ही की जानी चाहिए।
भरतपुर का “नेचर टूरिज्म हब” बन सकता है बंध बरेठा
भरतपुर की पहचान दुनिया भर में केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान से है, लेकिन जिले के दक्षिणी हिस्से में मौजूद बंध बरेठा में भी प्रकृति पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। एक तरफ विशाल जलाशय, दूसरी तरफ पहाड़ियां, वन क्षेत्र और सैकड़ों प्रजातियों के पक्षी तथा साथ में ऐतिहासिक विरासत—ये सभी चीजें इसे एक संपूर्ण पर्यटन स्थल बनने की क्षमता देती हैं।
रक्षाबंधन के अगले दिन यहां उमड़ी पर्यटकों की भीड़ इसी संभावना की एक तस्वीर है। आवश्यकता है कि पर्यटन सुविधाओं का विस्तार हो, लेकिन ऐसा विकास प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण के साथ संतुलन बनाकर किया जाए।
बंध बरेठा की सबसे बड़ी पूंजी कोई कंक्रीट का निर्माण नहीं, बल्कि उसका पानी, पहाड़, जंगल, पक्षी और प्राकृतिक शांति है। यदि इन्हें सुरक्षित रखते हुए पर्यटन विकसित किया गया तो आने वाले वर्षों में बंध बरेठा सिर्फ भरतपुर जिले का बड़ा बांध नहीं, बल्कि पूर्वी राजस्थान के प्रमुख ईको-टूरिज्म और नेचर डेस्टिनेशन के रूप में अपनी अलग पहचान बना सकता है।
— सनातनी संत रिपोर्टर | विशेष पर्यटन रिपोर्ट

