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बद्रीनाथ धाम, उत्तराखंड । इन दिनों धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री उत्तराखंड के पवित्र बद्रीनाथ धाम में साधना और कथा प्रवास पर हैं। हिमालय की शांत वादियों के बीच महाराज जी लगातार युवाओं, सनातन समाज और देश की अर्थव्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दे रहे हैं। हाल ही में उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने कहा कि — “जो लोग कहते हैं कि पैसा सब कुछ नहीं होता, ऐसा कहने के लिए भी पैसा होना चाहिए

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पहली नजर में यह बात कुछ लोगों को कठोर लग सकती है, लेकिन यदि इस कथन की गहराई को समझा जाए तो यह केवल धन कमाने की प्रेरणा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और जिम्मेदार जीवन का संदेश है। बागेश्वर धाम सरकार का यह कथन आज के युवाओं के लिए एक जागरण है, जो उन्हें मेहनत, रोजगार, व्यापार और आर्थिक मजबूती की ओर प्रेरित करता है।

धन का विरोध नहीं, धन के दुरुपयोग का विरोध

सनातन संस्कृति ने कभी धन का विरोध नहीं किया। हमारे शास्त्रों में माता लक्ष्मी को धन की देवी माना गया है। समस्या धन में नहीं होती, बल्कि धन के गलत उपयोग में होती है। महाराज जी भी यही समझाना चाहते हैं कि गरीबी कोई महानता का प्रतीक नहीं है। यदि व्यक्ति के पास धन होगा तो वह अपने परिवार की मदद करेगा, समाज सेवा करेगा, मंदिर बनवाएगा, गौशाला चलाएगा और जरूरतमंदों की सहायता भी कर सकेगा।

आज के समय में शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, खेती, यात्रा और यहां तक कि धार्मिक कार्यों के लिए भी धन की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में युवाओं को मेहनत कर आर्थिक रूप से मजबूत बनने की प्रेरणा देना गलत नहीं बल्कि समय की मांग है।

युवा कमाएंगे तो देश मजबूत होगा

भारत दुनिया का सबसे युवा देश माना जाता है। करोड़ों युवा यदि रोजगार करेंगे, व्यापार करेंगे और नए अवसर पैदा करेंगे तो देश की अर्थव्यवस्था तेजी से मजबूत होगी। महाराज जी का संदेश भी इसी दिशा में दिखाई देता है।

यदि युवा केवल भाग्य या दूसरों पर निर्भर रहेंगे तो समाज आगे नहीं बढ़ पाएगा। लेकिन यदि वही युवा कौशल सीखकर रोजगार शुरू करें, खेती में तकनीक अपनाएं, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करें या उद्योग स्थापित करें तो न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा देश आगे बढ़ेगा।

आज सरकार भी “स्टार्टअप इंडिया”, “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसे अभियानों पर जोर दे रही है। ऐसे समय में धार्मिक संतों द्वारा युवाओं को कर्म और आर्थिक मजबूती का संदेश देना समाज में सकारात्मक ऊर्जा पैदा करता है।

सनातन में कर्म का महत्व

बागेश्वर धाम सरकार अक्सर अपने प्रवचनों में कहते हैं कि केवल भाग्य के भरोसे बैठना उचित नहीं है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी गीता में कर्म को सर्वोपरि बताया है। मेहनत करने वाला व्यक्ति ही सफलता प्राप्त करता है।

धन कमाना गलत नहीं है, बल्कि ईमानदारी से कमाया गया धन व्यक्ति को सम्मान और आत्मविश्वास देता है। आज कई युवा बेरोजगारी, तनाव और भविष्य की चिंता से परेशान हैं। ऐसे समय में यदि कोई संत उन्हें मेहनत और आत्मनिर्भरता का मार्ग दिखाता है तो यह समाज के लिए लाभकारी है।

परिवार और समाज की जिम्मेदारी

एक गरीब व्यक्ति कई बार अपने माता-पिता का इलाज तक नहीं करा पाता। बच्चों की अच्छी शिक्षा नहीं दे पाता। जरूरत के समय दूसरों के सामने हाथ फैलाना पड़ता है। ऐसे में आर्थिक मजबूती व्यक्ति को सम्मान के साथ जीना सिखाती है।

महाराज जी का संदेश यही है कि युवा इतने सक्षम बनें कि अपने परिवार का सहारा बन सकें। जब घर मजबूत होगा तभी समाज मजबूत होगा और जब समाज मजबूत होगा तभी राष्ट्र शक्तिशाली बनेगा।

धर्म और अर्थ का संतुलन जरूरी

सनातन धर्म में चार पुरुषार्थ बताए गए हैं — धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। इसमें “अर्थ” यानी धन को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसका मतलब साफ है कि जीवन में आर्थिक मजबूती भी जरूरी है। लेकिन धन कमाने के साथ धर्म और नैतिकता का पालन होना चाहिए।

यदि धन ईमानदारी से कमाया जाए और उसका उपयोग अच्छे कार्यों में हो तो वही धन पुण्य का कारण बनता है। मंदिरों का निर्माण, गरीबों की सहायता, भंडारे, शिक्षा संस्थान और सेवा कार्य सभी आर्थिक शक्ति से ही चलते हैं।

बद्रीनाथ धाम से दिया गया संदेश

इन दिनों महाराज जी बद्रीनाथ धाम में कथा और साधना कर रहे हैं। हिमालय की पवित्र भूमि से दिया गया उनका यह संदेश केवल आर्थिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक भी है। उनका कहना है कि व्यक्ति को इतना सक्षम बनना चाहिए कि वह खुद भी सम्मान से जिए और दूसरों की मदद भी कर सके।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लोग उनके इस विचार की चर्चा कर रहे हैं। कई युवा इसे प्रेरणादायक बता रहे हैं, क्योंकि आज के समय में केवल आदर्शवादी बातें नहीं बल्कि वास्तविक जीवन की जरूरतों को समझना भी जरूरी है।

मेहनत से भागना नहीं चाहिए

आज कुछ लोग मेहनत की बजाय शॉर्टकट ढूंढते हैं। लेकिन सफलता उन्हीं को मिलती है जो लगातार संघर्ष करते हैं। महाराज जी का संदेश युवाओं को आलस्य छोड़कर कर्म करने की प्रेरणा देता है।

यदि गांव का युवा खेती में नई तकनीक अपनाए, छोटा व्यापार शुरू करे, ऑनलाइन काम सीखे या कोई हुनर विकसित करे तो उसकी जिंदगी बदल सकती है। यही आर्थिक क्रांति देश को आगे ले जाएगी।

बागेश्वर धाम सरकार का यह कथन केवल पैसे की महिमा बताने के लिए नहीं है, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर और जिम्मेदार बनाने का संदेश है। “पैसा सब कुछ नहीं है” यह बात सही हो सकती है, लेकिन जीवन की मूलभूत जरूरतों और सम्मानपूर्वक जीवन के लिए आर्थिक मजबूती आवश्यक है।

आज जरूरत इस बात की है कि युवा मेहनत करें, कौशल सीखें, रोजगार पैदा करें और अपने परिवार व देश को मजबूत बनाएं। धर्म और कर्म के संतुलन के साथ कमाया गया धन समाज और राष्ट्र दोनों के विकास में योगदान देता है। बद्रीनाथ धाम की पवित्र भूमि से दिया गया यह संदेश निश्चित रूप से लाखों युवाओं को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।

लेखक: सुरेंद्र फौजी सनातनी संत रिपोर्टर “साधक बागेश्वर बालाजी”

By Sanatani Sant Reporter

I am an exserviceman presently sadhak Bageshwar Balaji. Presently Working as a religious and social news reporter .

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