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भरतपुर: राजस्थान के भरतपुर जिले के बझेरा गांव स्थित अपना घर आश्रम ने मानव सेवा के क्षेत्र में इतिहास रचते हुए पूरी दुनिया में भारत का गौरव बढ़ाया है। निराश्रित, बेसहारा और मानसिक रूप से अस्वस्थ महिलाओं की सेवा को समर्पित इस आश्रम का नाम अब आधिकारिक रूप से गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया है। यह आश्रम अब दुनिया का सबसे बड़ा महिला आश्रय गृह बन चुका है।

यह उपलब्धि केवल भरतपुर या राजस्थान के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय बन गई है। वर्षों की सेवा, समर्पण और करुणा के बाद अपना घर आश्रम ने वह मुकाम हासिल किया है, जिसकी कल्पना भी मुश्किल मानी जाती थी।


दो दिन तक चला गहन सत्यापन, हर व्यवस्था की हुई जांच

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की अधिकृत टीम के प्रमुख ऋषिनाथ अपने सहयोगियों के साथ भरतपुर पहुंचे और उन्होंने लगातार दो दिनों तक आश्रम की व्यवस्थाओं, भवन क्षमता, आवासीय सुविधाओं और दस्तावेजों का विस्तृत निरीक्षण किया।

इस दौरान टीम ने आश्रम में रह रही महिलाओं की वास्तविक संख्या, रहने की स्थिति, भोजन व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाएं, साफ-सफाई, सुरक्षा व्यवस्था और उपलब्ध स्थान का भौतिक सत्यापन किया। जांच के दौरान हर पहलू को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप परखा गया।

लगभग छह महीने तक चली ऑनलाइन स्क्रूटनी के बाद यह ऑफलाइन वेरिफिकेशन किया गया। सभी मानकों पर सफल पाए जाने के बाद गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की टीम ने आश्रम को आधिकारिक प्रमाण पत्र सौंप दिया।

जैसे ही यह घोषणा हुई, पूरे आश्रम परिसर में खुशी की लहर दौड़ गई। आश्रम के सेवादारों, चिकित्सकों, कर्मचारियों और वहां रह रही महिलाओं के चेहरों पर गर्व और भावुकता साफ दिखाई दी।


अमेरिका का रिकॉर्ड टूटा, भारत ने बनाया नया इतिहास

अब तक दुनिया का सबसे बड़ा महिला शेल्टर अमेरिका के मियामी शहर स्थित लोटस हाउस वूमन शेल्टर को माना जाता था। वहां लगभग 1,500 महिलाओं, युवाओं और बच्चों को आश्रय दिया जाता है।

लेकिन भरतपुर के अपना घर आश्रम ने यह रिकॉर्ड तोड़ते हुए नया विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। गिनीज टीम द्वारा सत्यापित आंकड़ों के अनुसार आश्रम में 3,295 निराश्रित एवं असहाय महिलाओं को नियमित रूप से आश्रय दिया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान कुल महिला आवासियों की संख्या 3,473 दर्ज की गई, जिसमें बच्चे और बुजुर्ग शामिल नहीं थे।

यह आंकड़ा केवल संख्या नहीं, बल्कि उन हजारों जिंदगियों की कहानी है जिन्हें समाज ने कभी ठुकरा दिया था, लेकिन अपना घर आश्रम ने उन्हें सम्मान और नया जीवन दिया।


हर महिला को सम्मानजनक जीवन देने की व्यवस्था

अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार किसी भी महिला आश्रय गृह में प्रति व्यक्ति कम से कम 100 वर्ग फुट जगह होना आवश्यक माना जाता है। लेकिन भरतपुर के अपना घर आश्रम ने इस मानक से भी बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराई है।

यहां प्रत्येक महिला को लगभग 126 वर्ग फुट खुला और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया गया है। आश्रम लगभग 9.10 लाख वर्ग फीट क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें 5.22 लाख वर्ग फीट क्षेत्र में आधुनिक निर्माण किया गया है।

आश्रम परिसर में रहने वाली महिलाओं के लिए अलग-अलग आवासीय ब्लॉक, भोजनालय, चिकित्सा केंद्र, ध्यान स्थल, हरित क्षेत्र और मनोरंजन सुविधाएं उपलब्ध हैं। साफ-सफाई और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

यहां नियमित स्वास्थ्य जांच, दवाइयों की व्यवस्था, मानसिक स्वास्थ्य उपचार और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है। जिन महिलाओं को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है, उनके लिए अलग चिकित्सा सहायता भी उपलब्ध रहती है।


मानवता की मिसाल बना बझेरा गांव

भरतपुर का बझेरा गांव अब केवल एक गांव नहीं, बल्कि मानवता और सेवा की नई पहचान बन गया है। यहां आने वाला हर व्यक्ति आश्रम की व्यवस्थाओं और सेवा भावना को देखकर भावुक हो जाता है।

आश्रम में रहने वाली कई महिलाएं ऐसी हैं जिन्हें कभी रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, सड़कों या मंदिरों के आसपास लावारिस हालत में पाया गया था। कुछ मानसिक रूप से अस्वस्थ थीं, कुछ परिवार द्वारा छोड़ी गई थीं, तो कुछ समाज की उपेक्षा का शिकार हो चुकी थीं।

अपना घर आश्रम ने इन सभी महिलाओं को केवल आश्रय ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें फिर से इंसान की तरह सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर भी दिया।

यहां सेवा करने वाले लोग आश्रम की महिलाओं को “रोगी” या “बेसहारा” नहीं कहते, बल्कि उन्हें “प्रभुजी” कहकर संबोधित करते हैं। यही भावना इस संस्था को दुनिया से अलग बनाती है।


संस्थापक डॉ. बीएम भारद्वाज बोले – यह सेवा भावना की जीत

अपना घर आश्रम के संस्थापक डॉ. बीएम भारद्वाज ने इस उपलब्धि पर भावुक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह रिकॉर्ड किसी भवन, संसाधन या संख्या का नहीं, बल्कि मानवता और सेवा भावना की जीत है।

उन्होंने कहा कि जब कोई बेसहारा महिला सड़क पर तड़पती मिलती है, तब समाज अक्सर उसे नजरअंदाज कर देता है। लेकिन अपना घर आश्रम ने हमेशा उन्हें “प्रभुजी” मानकर सेवा की है। यही सोच आज इस मुकाम तक लेकर आई है।

डॉ. भारद्वाज ने कहा कि आश्रम का उद्देश्य केवल आश्रय देना नहीं, बल्कि हर जरूरतमंद को सम्मान, सुरक्षा और अपनापन देना है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2000 में बझेरा गांव से शुरू हुई यह संस्था आज देशभर में मानव सेवा का विशाल अभियान बन चुकी है।


ढाई दशक में हजारों महिलाओं को परिवारों से मिलाया

पिछले लगभग 25 वर्षों में अपना घर आश्रम ने 14,710 बेसहारा महिलाओं का सफल इलाज और पुनर्वास किया है। इनमें से हजारों महिलाओं को उनके परिवारों से दोबारा मिलवाया गया।

कई महिलाएं मानसिक बीमारी या दुर्घटना के कारण अपने घर का रास्ता भूल चुकी थीं। आश्रम की टीम ने उनकी पहचान कर परिवारों तक पहुंचाने का कार्य किया।

कुछ महिलाएं ऐसी भी थीं जिन्हें परिवार ने स्वीकार करने से इंकार कर दिया था। ऐसी महिलाओं को आश्रम ने स्थायी आश्रय देकर जीवनभर की सुरक्षा प्रदान की।

आज आश्रम में रहने वाली कई महिलाएं सिलाई, साफ-सफाई, बागवानी और अन्य छोटे कार्यों में भाग लेकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।


देशभर में संचालित हो रहे हैं 57 आश्रम

अपना घर संस्था अब केवल भरतपुर तक सीमित नहीं रही। वर्तमान में देशभर में संस्था के 57 आश्रम संचालित हो रहे हैं, जिनमें कुल 12,000 से अधिक आवासी रह रहे हैं।

इनमें लगभग 6,500 महिला प्रभुजी शामिल हैं। संस्था का उद्देश्य देश के हर जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचना और उसे सम्मानपूर्वक जीवन देना है।

संस्था के विभिन्न आश्रमों में महिलाओं, बुजुर्गों, मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों और लावारिस मरीजों की सेवा की जाती है।


समाज के लिए प्रेरणा बना अपना घर आश्रम

आज जब दुनिया में स्वार्थ और भौतिकवाद तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे समय में अपना घर आश्रम मानवता की जीवंत मिसाल बनकर सामने आया है।

यह संस्था यह साबित करती है कि यदि सेवा भावना सच्ची हो तो सीमित संसाधनों में भी हजारों लोगों का जीवन बदला जा सकता है।

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज होना केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि उन हजारों लोगों की मेहनत और संवेदनशीलता का सम्मान है जिन्होंने वर्षों तक बिना किसी स्वार्थ के सेवा की।

भरतपुर का यह आश्रम अब केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का केंद्र बन चुका है। यहां की व्यवस्था, सेवा और समर्पण आने वाले समय में अन्य संस्थाओं के लिए उदाहरण बनेगी।


प्रदेश और देशभर से मिल रही बधाइयां

अपना घर आश्रम की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रदेशभर से बधाइयों का तांता लग गया। सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और आम लोगों ने संस्था को शुभकामनाएं दीं।

सोशल मीडिया पर भी लोग इस उपलब्धि को भारत के लिए गौरवपूर्ण क्षण बता रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि यह रिकॉर्ड मानवता की जीत है और दुनिया को भारत की सेवा संस्कृति का संदेश देता है।

भरतपुर जिले के लोगों में भी इस उपलब्धि को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। स्थानीय लोगों ने इसे पूरे जिले के लिए सम्मान की बात बताया।


मानवता की सेवा का विश्व रिकॉर्ड

अपना घर आश्रम ने यह साबित कर दिया कि दुनिया में सबसे बड़ी ताकत करुणा और सेवा है। जिन महिलाओं को कभी समाज ने ठुकरा दिया था, आज वही महिलाएं दुनिया के सबसे बड़े महिला आश्रय गृह का हिस्सा हैं।

भरतपुर के बझेरा गांव से उठी यह सेवा की लौ अब अंतरराष्ट्रीय पहचान बन चुकी है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज यह नाम आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा कि सच्ची मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।

By Sanatani Sant Reporter

I am an exserviceman presently sadhak Bageshwar Balaji. Presently Working as a religious and social news reporter .

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