अपडेटेड: मई 2026 | स्थान: पेंच टाइगर रिजर्व के पास, मध्य प्रदेश

वीडियो की पृष्ठभूमि

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस रोंगटे खड़े कर देने वाले वीडियो में एक बाघ को गहरे कुएं के पानी में अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करते देखा जा सकता है। वीडियो में बाघ के साथ एक जंगली सुअर भी नजर आ रहा है। यह वीडियो मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के पिपरिया गांव का है, जो पेंच टाइगर रिजर्व के बफर जोन के करीब स्थित है।

पूरी खबर: कैसे हुआ यह हादसा?

यह घटना तब शुरू हुई जब एक बाघ का शावक शिकार की तलाश में जंगल से बाहर निकलकर खेतों की ओर आ गया। चश्मदीदों के मुताबिक, बाघ एक जंगली सुअर का पीछा कर रहा था। भागते समय अंधेरे या झाड़ियों की वजह से दोनों को सामने मौजूद गहरे कुएं का अंदाजा नहीं लगा और वे सीधे पानी में जा गिरे।

सुबह जब ग्रामीणों ने कुएं से दहाड़ने और छपाछप की आवाज सुनी, तो वहां भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी। वीडियो में दिख रहा संघर्ष उसी समय का है जब बाघ और सुअर दोनों एक-दूसरे से डरे हुए थे और बाहर निकलने का रास्ता ढूंढ रहे थे।

4 घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन

  • टीम: पेंच टाइगर रिजर्व के करीब 60 विशेषज्ञ और वनकर्मी।
  • तकनीक: हाइड्रोलिक क्रेन और एक बड़ी लोहे की जाली (खाटनुमा पिंजरा) का उपयोग किया गया।
  • चुनौती: बाघ अत्यधिक तनाव में था, इसलिए उसे बिना चोट पहुंचाए बाहर निकालना बड़ी चुनौती थी।
  • परिणाम: पहले बाघ को सफलतापूर्वक ऊपर खींचा गया और सुरक्षित पिंजरे में रखा गया। बाद में सुअर को भी बाहर निकाला गया।

बाघों के संरक्षण और संख्या पर एक नजर

भारत में बाघों की सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे अभियानों का असर अब जमीन पर दिख रहा है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, भारत अब दुनिया के 75% बाघों का घर है।

राज्य बाघों की संख्या (अनुमानित) संरक्षण की स्थिति
मध्य प्रदेश 785+ सबसे सुरक्षित (टाइगर स्टेट)
कर्नाटक 563 उत्कृष्ट प्रबंधन
उत्तराखंड 560 बढ़ती आबादी
अखिल भारतीय कुल 3,925 (औसत) निरंतर वृद्धि पर

संरक्षण के लिए चुनौतियां

विशेषज्ञों का कहना है कि बाघों की बढ़ती संख्या के साथ ही “मानव-वन्यजीव संघर्ष” भी बढ़ रहा है। जंगल के पास के खेतों में खुले कुएं इन जानवरों के लिए काल बन रहे हैं। सरकार अब ‘कुआं मुंडेर योजना’ के तहत किसानों को अनुदान दे रही है ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके।

हमारा संदेश: वन्यजीवों का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। यदि आपको अपने आस-पास कोई जंगली जानवर संकट में दिखे, तो शोर न मचाएं और न ही उसे पत्थर मारें। तुरंत टोल-फ्री हेल्पलाइन या वन विभाग को सूचित करें।