शिकायतकर्ता ने प्राकृतिक नाले पर पक्का निर्माण कर जल निकासी बाधित करने का लगाया आरोप, दूसरे पक्ष ने आरोपों से किया इनकार; नायब तहसीलदार बोले—जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति होगी स्पष्ट
बयाना, 6 अक्टूबर। बयाना-भरतपुर रोड पर बिडयारी के पास स्थित एक प्राकृतिक नाले को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद सामने आया है। एक पक्ष ने नाले पर कथित रूप से कब्जा कर पक्का निर्माण किए जाने और जल निकासी बाधित होने की आशंका जताते हुए उपखंड अधिकारी, बयाना को लिखित शिकायत सौंपी है। वहीं शिकायत में नामित दूसरे पक्ष ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा है कि नाले को बंद करने जैसी कोई बात नहीं है और जल निकासी का रास्ता निकाला जाएगा। प्रशासन ने भी मामले की जांच कराने की बात कही है।
शिकायत मां भगवती रोलर एंड फ्लोर मिल से जुड़ी सीमा सिंघल की ओर से दी गई है। शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि बयाना-भरतपुर रोड पर स्थित मिल के सामने से एक प्राकृतिक नाला गुजरता है, जो आसपास के क्षेत्र के वर्षा जल और अन्य पानी की निकासी का माध्यम है। शिकायतकर्ता के अनुसार इसी नाले पर कथित रूप से चिनाई और पक्का निर्माण कर दीवार बनाए जाने का प्रयास किया जा रहा है।
शिकायत में विकास उर्फ विक्की पुत्र कैलाश सिंघल का नाम लेते हुए आरोप लगाया गया है कि निर्माण के कारण नाले की भूमि एवं जल निकासी का रास्ता प्रभावित हो सकता है। शिकायतकर्ता ने प्रशासन से मांग की है कि मौके पर जांच कराई जाए और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर नाले की वास्तविक स्थिति एवं सीमा निर्धारित की जाए।
बरसात में जलभराव और नुकसान की आशंका
शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि प्राकृतिक नाले का बहाव बाधित होता है तो बरसात के दिनों में पानी की निकासी में परेशानी हो सकती है। इससे सड़क किनारे स्थित प्रतिष्ठानों, आसपास की भूमि और आमजन को जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि नाला लंबे समय से पानी निकासी का माध्यम रहा है। यदि इसके मार्ग में स्थायी अवरोध उत्पन्न हुआ तो पानी आसपास जमा हो सकता है और इससे आर्थिक नुकसान होने की भी आशंका है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है और वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच एवं राजस्व रिकॉर्ड के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
राजस्व नक्शे के आधार पर सीमांकन की मांग
उपखंड अधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में शिकायतकर्ता ने मांग की है कि राजस्व रिकॉर्ड, नक्शे और मौके की स्थिति का मिलान कर नाले की सीमा निर्धारित कराई जाए।
शिकायत में यह भी मांग की गई है कि जांच पूरी होने तक विवादित स्थल पर चल रहे निर्माण को रुकवाया जाए। यदि प्रशासनिक जांच में नाले की भूमि पर किसी प्रकार का अवरोध या अतिक्रमण पाया जाता है, तो उसे नियमानुसार हटाकर प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था को पूर्ववत कराया जाए।
साथ ही भविष्य में नाले की भूमि पर किसी प्रकार का निर्माण या अवरोध पैदा न हो, इसके लिए संबंधित पक्षों को पाबंद किए जाने की भी मांग की गई है।
नायब तहसीलदार संजय वर्मा बोले—मामला जानकारी में, जांच कराई जाएगी
मामले को लेकर नायब तहसीलदार संजय वर्मा ने बताया कि प्रकरण उनकी जानकारी में आया है और इसकी जांच की जाएगी।
उन्होंने कहा कि फिलहाल मामला प्रारंभिक स्तर पर ही सुनने में आया है। मौके की स्थिति देखने, राजस्व रिकॉर्ड की जांच करने तथा संबंधित पक्षों की जानकारी लेने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
नायब तहसीलदार संजय वर्मा ने कहा, “मामला मेरी जानकारी में है। इसकी छानबीन की जाएगी। जो भी निष्कर्ष निकलेगा, वह जांच और पूरी जानकारी के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। अभी मामला थोड़ा-बहुत सुनने में आया है।”
प्रशासन के इस रुख से फिलहाल यह स्पष्ट है कि किसी भी पक्ष के दावे को अंतिम नहीं माना गया है और मामले का फैसला जांच के आधार पर ही होगा।
विकास उर्फ विक्की ने आरोपों से किया इनकार
शिकायत में नामित विकास उर्फ विक्की सिंघल ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि नाले को बंद करने अथवा जल निकासी रोकने जैसी कोई मंशा नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि जल निकासी के लिए नाले की आवश्यकता है तो नाला निकाला जाएगा और पानी के रास्ते को बाधित नहीं किया जाएगा।
विकास उर्फ विक्की की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि शिकायतकर्ता की मिल से निकलने वाला गंदा पानी आसपास के खेतों की ओर आता है और इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि मामले को केवल नाले पर कब्जे के रूप में देखना सही नहीं होगा और वास्तविक स्थिति मौके की जांच के बाद ही सामने आएगी।
दोनों पक्ष एक-दूसरे पर लगा रहे आरोप
इस मामले में फिलहाल दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि नाले पर निर्माण कर प्राकृतिक जल निकासी प्रभावित की जा रही है, जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि नाला बंद नहीं किया जा रहा और वास्तविक विवाद मिल से निकलने वाले पानी को लेकर है।
ऐसे में यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि राजस्व रिकॉर्ड में संबंधित स्थान की प्रकृति क्या दर्ज है, नाले की चौड़ाई और सीमा कितनी है, वर्तमान निर्माण किस स्थान पर हो रहा है तथा पानी की स्वाभाविक निकासी किस ओर है।
इन सभी तथ्यों का निर्धारण प्रशासनिक जांच से ही संभव है।
जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
अब प्रशासन के स्तर पर मौके का निरीक्षण, राजस्व रिकॉर्ड का परीक्षण और दोनों पक्षों से जानकारी लिया जाना महत्वपूर्ण होगा। यदि जांच में नाले की भूमि पर अवैध निर्माण या अवरोध पाया जाता है तो प्रशासन नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है। वहीं यदि शिकायत के आरोप सही नहीं पाए जाते हैं तो स्थिति अलग हो सकती है।
फिलहाल मामले में किसी भी पक्ष के आरोपों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता।
यह समाचार शिकायत पत्र, शिकायतकर्ता के आरोप, नामित पक्ष की प्रतिक्रिया और नायब तहसीलदार के बयान पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
