श्रीपथ पुनर्निर्माण समिति ने भगवान गणेश और महिषासुर मर्दिनी की प्रतिमाओं के गायब होने की जताई आशंका; बयाना की ऐतिहासिक धरोहरों को पर्यटन से जोड़ने की भी उठी मांग
बयाना, 27 सितंबर 2026। राजस्थान के गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम के रविवार को बयाना दौरे के दौरान श्रीपथ पुनर्निर्माण समिति के अध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र रामस्वरूप गुर्जर ने उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में वर्ष 2014 में बयाना क्षेत्र में मिलीं भगवान गणेश और मां चामुंडा स्वरूप महिषासुर मर्दिनी की प्राचीन प्रतिमाओं की जांच कराने, उन्हें बरामद करने तथा ऐतिहासिक धरोहर स्थल पर स्थापित कराने की मांग की गई है।
डॉ. शैलेंद्र गुर्जर ने ज्ञापन में बताया कि वर्ष 2014 में बयाना के प्राचीन श्रीपथ क्षेत्र से दो प्रतिमाएं मिली थीं। इनमें एक भगवान गणेश और दूसरी मां चामुंडा अथवा महिषासुर मर्दिनी की संगमरमर की प्रतिमा बताई गई है। ज्ञापन के अनुसार दोनों प्रतिमाएं लगभग 10वीं से 11वीं शताब्दी की तथा करीब एक हजार वर्ष पुरानी मानी गई थीं। हालांकि प्रतिमाओं की सही प्राचीनता और पुरातात्विक महत्व की आधिकारिक पुष्टि विशेषज्ञ जांच के बाद ही हो सकती है।
प्रतिमाएं अपने निर्धारित स्थान पर नहीं होने का दावा
समिति ने ज्ञापन में दावा किया कि वर्तमान में दोनों प्रतिमाएं अपने स्थान पर उपलब्ध नहीं हैं। समिति ने उनके चोरी होने अथवा अनधिकृत रूप से कहीं ले जाए जाने की आशंका जताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
डॉ. गुर्जर ने गृह राज्यमंत्री से अनुरोध किया कि पुलिस और पुरातत्व विभाग की संयुक्त टीम गठित कर यह पता लगाया जाए कि प्रतिमाएं मिलने के बाद उन्हें किसके संरक्षण में दिया गया था, उनका आधिकारिक रिकॉर्ड कहां है और वर्तमान में वे किस स्थान पर हैं।
ज्ञापन में उस स्थान अथवा मकान की भी जांच कराने की मांग की गई है, जहां से कथित रूप से ये प्रतिमाएं निकली थीं। समिति ने कहा है कि जांच में यदि किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए।
बयाना के ऐतिहासिक धरोहर स्थल पर स्थापित करने की मांग

श्रीपथ पुनर्निर्माण समिति ने प्रतिमाएं बरामद होने के बाद उन्हें किसी सुरक्षित संग्रहालय अथवा बयाना के उपयुक्त ऐतिहासिक धरोहर स्थल पर संरक्षित एवं स्थापित करने की मांग भी रखी है। समिति का कहना है कि प्राचीन प्रतिमाएं किसी एक व्यक्ति या संस्था की संपत्ति नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत हैं। इसलिए उनका संरक्षण प्रशासन और पुरातत्व विभाग की प्राथमिकता में होना चाहिए।
समिति ने यह भी मांग की कि वर्ष 2014 में प्रतिमाएं मिलने से संबंधित पुलिस, प्रशासन और पुरातत्व विभाग के अभिलेखों की जांच कर घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए। इससे प्रतिमाओं के संबंध में फैले भ्रम को दूर करने में सहायता मिलेगी।
पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है बयाना का ऐतिहासिक किला
बयाना केवल स्थानीय आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां पहाड़ी पर स्थित प्राचीन विजयगढ़ अथवा बयाना किला अपने भीतर विभिन्न कालखंडों की स्थापत्य विरासत समेटे हुए है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की केंद्रीय संरक्षित स्मारकों की सूची में बयाना का प्राचीन किला, उसके स्मारक, किले की दीवारें, चौबुर्जा दरवाजा और उससे जुड़े पहुंच मार्ग शामिल हैं।
किला परिसर और आसपास प्राचीन द्वार, मंदिरों के अवशेष, ऐतिहासिक स्तंभ, बावड़ियां तथा विभिन्न शासनकाल से जुड़ी संरचनाएं मौजूद हैं। वर्ष 2025 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा किले के बुर्ज से रानी महल की ओर जाने वाले सीढ़ीदार मार्ग के संरक्षण और पुनरुद्धार से संबंधित कार्य भी सूचीबद्ध किया गया था। इससे स्पष्ट होता है कि बयाना किले का पुरातात्विक महत्व सरकारी स्तर पर भी मान्य है।
पर्यटन मानचित्र पर मिल सकती है नई पहचान
यदि बयाना किले, प्राचीन बावड़ियों, मंदिरों, स्तंभों और क्षेत्र में मिलने वाली पुरातात्विक धरोहरों का व्यवस्थित संरक्षण किया जाए तो बयाना को भरतपुर जिले के महत्वपूर्ण विरासत पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। भरतपुर आने वाले पर्यटकों को केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, लोहागढ़, डीग और बंध बारेठा के साथ बयाना के ऐतिहासिक स्थलों से भी जोड़ा जा सकता है।
इसके लिए किले तक सुरक्षित एवं सुगम पहुंच मार्ग, दिशासूचक बोर्ड, पेयजल, प्रकाश, सुरक्षा व्यवस्था, प्रशिक्षित गाइड और ऐतिहासिक जानकारी वाले सूचना पट्ट लगाए जाने की आवश्यकता है। पुरातत्व विभाग, पर्यटन विभाग, जिला प्रशासन और स्थानीय निकाय मिलकर योजनाबद्ध तरीके से कार्य करें तो इससे न केवल विरासत का संरक्षण होगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी विकसित हो सकते हैं।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
प्रतिमाओं के गायब होने अथवा चोरी होने संबंधी आशंका श्रीपथ पुनर्निर्माण समिति द्वारा दिए गए ज्ञापन में व्यक्त की गई है। फिलहाल प्रशासन या पुलिस की ओर से प्रतिमाओं के चोरी होने की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। मामले की वास्तविक स्थिति अभिलेखों और संबंधित लोगों से पूछताछ के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अब देखना होगा कि गृह राज्यमंत्री को सौंपे गए इस ज्ञापन पर प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और करीब 12 वर्ष पुराने इस मामले की जांच के लिए क्या कोई विशेष टीम गठित की जाती है।

