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जयपुर/श्रीगंगानगर। सनातनी संत रिपोर्टर

राजस्थान की वीर भूमि ने देश को हमेशा से योद्धा, कलावंत और जांबाज दिए हैं, लेकिन अब खेल के मैदान पर भी इस मरुधरा का परचम पूरी दुनिया में लहरा रहा है। क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले टेस्ट फॉर्मेट में आज राजस्थान के एक और लाल ने इतिहास के पन्नों पर अपना नाम सोने के अक्षरों से लिख दिया है। हम बात कर रहे हैं श्रीगंगानगर के 23 वर्षीय युवा लेफ्ट-आर्म स्पिनर मानव सुथार की, जिन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ मुल्लानपुर टेस्ट में अपने डेब्यू पर ही वो कारनामा कर दिखाया, जिसने भारतीय क्रिकेट के इतिहास को बदल कर रख दिया है।

जब भारतीय टीम के दो महान स्पिनर रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा इस टेस्ट मैच का हिस्सा नहीं थे, तब देश के करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों के मन में एक आशंका थी। लेकिन राजस्थान के पानी में कुछ अलग ही बात है। दबाव के इन क्षणों में मानव सुथार ने न केवल भारतीय स्पिन गेंदबाजी की कमान संभाली, बल्कि मैच में कुल 7 विकेट चटकाए। सबसे बड़ा धमाका उन्होंने अफगानिस्तान की पहली पारी में किया, जहाँ महज 33 रन देकर 6 विकेट (6/33) लेते हुए विपक्षी टीम की कमर तोड़ दी। भारत की एक पारी और 300 रनों की इस विशाल जीत के महानायक बनकर उभरे मानव ने यह साबित कर दिया कि मरुधरा की मिट्टी में टैलेंट की कोई कमी नहीं है।

तोड़ा आर. अश्विन का 15 साल पुराना रिकॉर्ड, रच दिया 38 साल का इतिहास

मानव सुथार का यह प्रदर्शन सिर्फ एक शानदार डेब्यू नहीं है, बल्कि आंकड़ों की दुनिया में आया एक बहुत बड़ा भूचाल है। इस युवा राजस्थानी शेर ने भारत के महानतम स्पिनरों में से एक रविचंद्रन अश्विन का 15 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है।

अश्विन को छोड़ा पीछे: आर. अश्विन ने नवंबर 2011 में वेस्टइंडीज के खिलाफ दिल्ली में अपने टेस्ट डेब्यू पर एक पारी में 47 रन देकर 6 विकेट (6/47) लिए थे। मानव सुथार ने आज सिर्फ 33 रन देकर 6 विकेट (6/33) झटके और डेब्यू पारी के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी आंकड़ों के मामले में अश्विन के 15 साल पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

38 साल बाद ऐसा करिश्मा: सिर्फ अश्विन ही नहीं, मानव सुथार का यह स्पेल पिछले 38 सालों में किसी भी भारतीय गेंदबाज द्वारा टेस्ट डेब्यू पर किया गया सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बन गया है। उनसे बेहतर आखिरी बार साल 1988 में नरेंद्र हिरवानी (8/61) ने किया था। इस एलीट क्लब में एंट्री करके मानव ने साबित कर दिया कि वे लंबी रेस के घोड़े हैं।

श्रीगंगानगर की तपती रेत से मुल्लानपुर के मैदान तक का सफर

राजस्थान का सीमावर्ती जिला श्रीगंगानगर, जो अपनी भीषण गर्मी और कड़ाके की ठंड के लिए जाना जाता है, आज वहां की हवाओं में एक अलग ही उल्लास है। मानव सुथार की इस सफलता की जड़ें इसी शहर की गलियों और धूल भरे मैदानों से जुड़ी हैं। एक बेहद साधारण परिवार से आने वाले मानव के लिए भारतीय जर्सी पहनने का सपना देखना भी किसी चुनौती से कम नहीं था।

गंगानगर जैसे शहर में जहाँ महानगरों जैसी हाई-टेक क्रिकेट अकादमियां नहीं थीं, वहां मानव ने अपनी उंगलियों की जादूगरी को निखारा। उनके पिता और स्थानीय कोचों ने उनकी प्रतिभा को समय रहते पहचाना। शुरुआत में जब वे टेनिस बॉल से क्रिकेट खेला करते थे, तब भी उनकी गेंदबाज़ी में वो ड्रिफ्ट और टर्न था जो बड़े-बड़े बल्लेबाजों को चकमा दे देता था। जब उन्होंने लेदर बॉल थामी, तो मानो उनकी फिरकी को पंख लग गए। तपती दोपहरी में घंटों पसीना बहाना और अपनी लाइन-लेंथ पर काम करना मानव की दिनचर्या बन गई थी। आज उनकी इसी तपस्या का परिणाम पूरा हिंदुस्तान देख रहा है।

घरेलू क्रिकेट में राजस्थान का मान बढ़ाया

मानव सुथार की यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है। भारतीय टेस्ट टीम तक पहुँचने से पहले उन्होंने घरेलू क्रिकेट में राजस्थान की टीम के लिए लगातार शानदार प्रदर्शन किया। रणजी ट्रॉफी और अन्य घरेलू टूर्नामेंट्स में राजस्थान की जर्सी पहनकर मानव ने कई मैचों में अपनी टीम को अकेले दम पर जीत दिलाई।

घरेलू सर्किट में उनकी सटीक गेंदबाजी, हवा में गेंद को फ्लाइट कराने की कला और बल्लेबाजों को लगातार एक ही जगह गेंद डालकर परेशान करने के धैर्य ने राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) के मैदानों पर खेलते हुए मानव ने हर सीजन के साथ खुद को मांजने का काम किया। आईपीएल में जब वे गुजरात टाइटंस (GT) का हिस्सा बने, तो उन्हें दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम शेयर करने का मौका मिला, जिसने उनके आत्मविश्वास को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया।

जब दिग्गज नहीं थे, तब मरुधरा का शेर दहाड़ा

यह टेस्ट मैच भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक बड़े बदलाव का गवाह था। नवंबर 2010 के बाद यह पहला मौका था जब टीम इंडिया बिना अश्विन और जडेजा के मैदान पर उतरी थी। क्रिकेट पंडितों का मानना था कि इन दो दिग्गजों की कमी को पूरा करना किसी भी युवा स्पिनर के लिए एवरेस्ट चढ़ने जैसा होगा। लेकिन मानव सुथार तो उस राजस्थान से आते हैं जहाँ की रगों में विपरीत परिस्थितियों से लड़ना लिखा है।

मैच में जब अफगानिस्तान की टीम संघर्ष कर रही थी, तब कप्तान ने गेंद मानव सुथार के हाथों में सौंपी। इसके बाद जो हुआ, वह इतिहास बन गया। मानव ने अपनी सधी हुई लाइन, शानदार लूप और खतरनाक टर्न से अफगानी बल्लेबाजों को क्रीज पर टिकने का मौका ही नहीं दिया। पहली पारी में 6 विकेट और दूसरी पारी में 1 विकेट (कुल 7 विकेट) लेकर उन्होंने अफगानिस्तान की पूरी पारी को अकेले दम पर समेट दिया।

राजस्थान में जश्न का माहौल: घर-घर बांटी जा रही मिठाई

मानव की इस ऐतिहासिक सफलता के बाद पूरे राजस्थान में, विशेषकर उनके गृह जिले श्रीगंगानगर और राजधानी जयपुर में दिवाली जैसा माहौल है। मानव के घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू हैं, तो वहीं उनके बचपन के दोस्तों और स्थानीय क्रिकेटरों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचकर जश्न मनाया।

सोशल मीडिया पर राजस्थान के मुख्यमंत्री से लेकर खेल जगत की तमाम बड़ी हस्तियों ने मानव सुथार को बधाई दी है। राजस्थान के खेल प्रेमियों का कहना है कि मानव ने यह साबित कर दिया है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो रेगिस्तान की मिट्टी से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के रत्न पैदा किए जा सकते हैं।

मरुधरा को अपने लाल पर गर्व है

मानव सुथार की कहानी केवल एक क्रिकेटर की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह राजस्थान के उन हजारों युवाओं के सपनों की उड़ान है जो छोटे शहरों में रहकर बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने दिखा दिया कि सुख-सुविधाओं की कमी आपके इरादों को नहीं डिगा सकती।

आज जब मानव सुथार का नाम दुनिया भर के क्रिकेट गलियारों में गूंज रहा है और बड़े-बड़े दिग्गज उनके रिकॉर्ड्स के आगे नतमस्तक हैं, तो हर राजस्थानी का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है। मरुधरा के इस नए सुल्तान ने अपनी फिरकी के जाल में न केवल विपक्ष को फंसाया है, बल्कि दुनिया भर के क्रिकेट प्रशंसकों का दिल भी जीत लिया है। शाबाश मानव! राजस्थान को अपने इस बेटे पर नाज़ है।

By Sanatani Sant Reporter

I am an exserviceman presently sadhak Bageshwar Balaji. Presently Working as a religious and social news reporter .

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