
भरतपुर/बयाना। एक तरफ डॉक्टर डिस्चार्ज स्लिप में साफ तौर पर लिख रहे हैं कि मरीज को आगे अस्पताल में भर्ती रखकर इलाज की आवश्यकता है, वहीं दूसरी तरफ ECHS रेफरल में “Admission : NO” दर्ज कर केवल OPD मंजूरी दिए जाने से पूर्व सैनिक परिवार में नाराजगी है। मामला अब ECHS व्यवस्था और उसके नियमों पर सवाल खड़े कर रहा है।
जानकारी के अनुसार बयाना निवासी 14 वर्षीय नंदिनी राजावत को गंभीर मानसिक स्थिति के चलते निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टर की डिस्चार्ज समरी में “Bipolar Affective Disorder Currently Mixed With Psychotic Features” जैसी गंभीर मानसिक बीमारी का उल्लेख किया गया है। साथ ही मरीज में अनिद्रा, आक्रामक व्यवहार, असामान्य हरकतें, लगातार रोना, बिना मतलब बातें करना और खाना नहीं खाने जैसी समस्याएं बताई गईं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि डिस्चार्ज स्लिप में स्पष्ट लिखा गया कि मरीज दवा नहीं ले रही है और उसे आगे भी अस्पताल में भर्ती रखकर उपचार की आवश्यकता है। परिजनों का कहना है कि इसी आधार पर मरीज को जयपुर के उच्च अस्पताल में भर्ती कराने की उम्मीद थी।
लेकिन जब ECHS से रेफरल बनवाया गया तो उसमें “Patient Type : OPD” और “Admission : NO” दर्ज किया गया। परिवार का आरोप है कि जब डॉक्टर पहले ही भर्ती उपचार की जरूरत बता चुके थे, तब भी ECHS द्वारा केवल OPD मंजूरी देना समझ से परे है।
परिजनों ने बताया कि जब इस संबंध में ECHS कार्यालय में पूछताछ की गई तो अधिकारियों ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि रेफरल प्रक्रिया में मरीज को पहले OPD के माध्यम से ही भेजा जाता है और सीधे IPD मंजूरी नहीं दी जाती।
अब परिवार सवाल उठा रहा है कि अगर मरीज पहले से गंभीर हालत में भर्ती थी और डॉक्टर ने आगे अस्पताल में भर्ती रखने की सिफारिश भी की थी, तो फिर ECHS रेफरल में “Admission : NO” क्यों लिखा गया? क्या नियम मरीज की गंभीर स्थिति से ऊपर हैं?
यह मामला अब पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की वास्तविक स्थिति पर बड़ा सवाल बन गया है। परिवार का कहना है कि सरकार पूर्व सैनिकों के सम्मान और स्वास्थ्य सुरक्षा की बात करती है, लेकिन जमीन पर गंभीर मरीजों को भी भर्ती सुविधा के बजाय केवल OPD प्रक्रिया तक सीमित रखा जा रहा है।
