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10 जुलाई 2023 को हुआ था रूपवास खेल स्टेडियम का शिलान्यास, तीन साल में बदहाल हुई सरकारी संपत्ति

रूपवास/भरतपुर। रूपवास में खिलाड़ियों और युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए गए खेल स्टेडियम की मौजूदा स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। मौके पर मौजूद शिलापट्ट के अनुसार इस स्टेडियम का शिलान्यास 10 जुलाई 2023 को तत्कालीन बयाना-रूपवास विधायक अमर सिंह जाटव के कर-कमलों द्वारा किया गया था।

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शिलापट्ट पर स्पष्ट रूप से “राजस्थान सरकार खेल स्टेडियम रूपवास, (भरतपुर) का शिलान्यास” लिखा हुआ है। इसके नीचे मुख्य अतिथि के रूप में तत्कालीन विधायक अमर सिंह जाटव का नाम दर्ज है। शिलापट्ट पर यह भी उल्लेख है कि कार्यक्रम 10.07.2023 को संपन्न हुआ।

यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है कि उपलब्ध शिलापट्ट की तस्वीर के अनुसार यह लोकार्पण का नहीं, शिलान्यास का शिलापट्ट है। इसलिए स्टेडियम के निर्माण के बाद इसका वास्तविक लोकार्पण कब हुआ, इसका अलग आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आने पर ही उस तारीख को लोकार्पण की तारीख माना जाना चाहिए।

तीन साल भी पूरे नहीं हुए और सामने आई बदहाली

10 जुलाई 2023 को शिलान्यास हुए इस खेल परिसर की तस्वीरें अब इसकी देखरेख को लेकर सवाल खड़े कर रही हैं। मौके पर कई स्थानों पर भवन की हालत खराब दिखाई देती है। खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं, जालियों को नुकसान पहुंचा है और कमरों के अंदर कांच तथा मलबा बिखरा हुआ नजर आता है।

ऐसे में सवाल उठता है कि जिस परिसर को खिलाड़ियों के लिए तैयार किया गया था, वह इतने कम समय में इस हालत तक कैसे पहुंच गया?

बिजली के बोर्ड और उपकरणों को भी नुकसान

स्टेडियम के अंदर बिजली व्यवस्था की हालत भी चिंताजनक दिखाई देती है। कुछ बिजली के बोर्ड खुले हुए हैं और तार बाहर दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी बताया गया है कि बिजली के कुछ बोर्ड और उपकरण निकालकर ले जाए गए, जबकि कुछ सामग्री अभी भी मौजूद है।

यदि सरकारी भवन से बिजली के उपकरण या अन्य सामग्री गायब हुई है तो यह जांच का विषय है कि सामान कब गायब हुआ और इसकी जानकारी संबंधित जिम्मेदार संस्था को कब मिली।

सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार व्यवस्था की भूमिका पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।

टूटे शीशे और जालियां

स्टेडियम के कमरों में खिड़कियों के टूटे शीशे साफ दिखाई देते हैं। कई जगह जालियां भी क्षतिग्रस्त हैं। यदि परिसर में खिलाड़ियों और बच्चों की आवाजाही होनी है तो टूटे शीशे और खुले हुए हिस्से सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय हैं।यह स्थिति यह भी बताती है कि भवन की नियमित निगरानी और रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

शौचालयों की हालत खराब

स्टेडियम के शौचालयों की स्थिति भी तस्वीरों में खराब नजर आ रही है। शौचालय के दरवाजे टूटे हुए हैं और अंदर सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं दिखाई देती।खेल परिसर में खिलाड़ियों के लिए स्वच्छ शौचालय और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं जरूरी होती हैं। यदि स्टेडियम को दोबारा नियमित रूप से संचालित किया जाना है तो इन व्यवस्थाओं को प्राथमिकता से ठीक करना होगा।

जंग खा रहे गेट और ताले

स्टेडियम के गेट और तालों पर जंग दिखाई दे रही है। इससे लंबे समय से उचित रखरखाव नहीं होने की स्थिति सामने आती है।अगर किसी सरकारी परिसर में नियमित आवाजाही नहीं है तो उसकी सुरक्षा और निगरानी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, ताकि चोरी, तोड़फोड़ या अतिक्रमण जैसी घटनाओं को रोका जा सके।

छत का प्लास्टर और दीवारों की हालत

भवन के अंदर कुछ हिस्सों में प्लास्टर उखड़ा हुआ दिखाई दे रहा है। दीवारों की पेंटिंग भी जगह-जगह खराब हो चुकी है। फर्श पर मलबा पड़ा है।इन परिस्थितियों में स्टेडियम को दोबारा खिलाड़ियों के लिए खोलने से पहले भवन की तकनीकी जांच कराया जाना जरूरी है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भवन का प्रत्येक हिस्सा सुरक्षित है।

मैदान में बड़ी-बड़ी घास

स्टेडियम के बाहरी मैदान की तस्वीर भी अलग कहानी कहती है। मैदान में बड़ी-बड़ी घास और झाड़ियां उगी हुई हैं। जिस मैदान को खिलाड़ियों के अभ्यास और खेल गतिविधियों के लिए उपयोग होना चाहिए, वहां नियमित रखरखाव का अभाव साफ दिखाई देता है।बास्केटबॉल कोर्ट की स्थिति भी बेहतर नहीं दिखाई देती। वहां लगी नेट और अन्य व्यवस्थाएं खराब अवस्था में नजर आ रही हैं।

स्टेडियम की दीवार पर भी सवाल

मौके पर स्टेडियम की एक तरफ की दीवार झुकी हुई दिखाई देने की बात सामने आई है। यदि दीवार वास्तव में अपनी मूल स्थिति से झुकी हुई है तो इसकी तकनीकी जांच आवश्यक है।संबंधित विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि दीवार की स्थिति सुरक्षित है या उसकी मरम्मत की आवश्यकता है।

आखिर तीन साल में ऐसी स्थिति क्यों?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि 10 जुलाई 2023 को शिलान्यास हुए इस खेल स्टेडियम की हालत इतनी जल्दी खराब क्यों हो गई?

क्या निर्माण के बाद नियमित रूप से इसकी देखरेख की गई?क्या स्टेडियम के लिए चौकीदार या सुरक्षा व्यवस्था थी?

क्या समय-समय पर बिजली, दरवाजे, खिड़कियां, शौचालय और मैदान का निरीक्षण किया गया?

अगर सरकारी संपत्ति से सामान गायब हुआ तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?और यदि स्टेडियम का उपयोग नहीं हो रहा था तो इसे लंबे समय तक बंद रखने का कारण क्या था?

अब फिर मरम्मत के लिए फंड

नगरपालिका के जिम्मेदार अधिकारी से बातचीत में बताया गया है कि अब स्टेडियम के लिए दोबारा फंड उपलब्ध हुआ है और मरम्मत का काम कराया जाएगा।स्टेडियम की मरम्मत और उसे खिलाड़ियों के लिए उपयोगी बनाना निश्चित रूप से जरूरी है। लेकिन इसके साथ यह सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि कुछ ही वर्षों में सरकारी संपत्ति को इस स्थिति में पहुंचने से रोकने के लिए जिम्मेदारी किसकी थी?अगर अब सरकारी धन से दोबारा मरम्मत होगी तो जनता यह जानना चाहेगी कि पहले बनी संपत्ति की देखरेख में कहां कमी रही।

अमर सिंह जाटव के कार्यकाल से जुड़ा शिलापट्ट

स्टेडियम के बाहर लगा शिलापट्ट इस पूरे मामले का महत्वपूर्ण दस्तावेजी संकेत है। उस पर तत्कालीन बयाना-रूपवास विधायक अमर सिंह जाटव का नाम मुख्य अतिथि के रूप में दर्ज है और 10 जुलाई 2023 को शिलान्यास कार्यक्रम संपन्न होने की जानकारी अंकित है।

शिलापट्ट पर तत्कालीन जनप्रतिनिधियों और स्थानीय पदाधिकारियों के नाम भी दर्ज हैं।हालांकि, शिलापट्ट केवल शिलान्यास की तारीख की पुष्टि करता है। स्टेडियम का निर्माण कब पूरा हुआ और इसका औपचारिक लोकार्पण किस तारीख को हुआ, इसकी पुष्टि संबंधित विभाग या नगरपालिका के आधिकारिक रिकॉर्ड से किया जाना उचित होगा।

जनता के पैसे से बनी संपत्ति, जनता के काम आनी चाहिए

खेल स्टेडियम केवल भवन नहीं होता। यह क्षेत्र के युवाओं और खिलाड़ियों के भविष्य से जुड़ी सुविधा है। अगर लाखों रुपये खर्च करके स्टेडियम बनाया गया और उसका नियमित उपयोग ही नहीं हो पाया, तो यह गंभीर प्रशासनिक सवाल है।

जरूरत इस बात की है कि संबंधित जिम्मेदार अधिकारी मौके का निरीक्षण करें, क्षतिग्रस्त संपत्ति का आकलन करें, गायब सामान की जांच करें और मरम्मत के बाद स्टेडियम की नियमित देखरेख की स्थायी व्यवस्था करें।

रूपवास के युवाओं को यह जानने का अधिकार है कि उनके लिए बनाई गई खेल सुविधा आखिर कब पूरी तरह तैयार होगी और वे इसका नियमित लाभ कब उठा पाएंगे।

अब सवाल सिर्फ मरम्मत का नहीं है। सवाल यह भी है कि 10 जुलाई 2023 को शिलान्यास के बाद इतनी कम अवधि में सरकारी संपत्ति इस हालत तक कैसे पहुंची और इसकी जवाबदेही आखिर किसकी तय होगी?

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