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नगला हवेली में जलभराव और कीचड़ से ग्रामीण परेशान, बोले—समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन, चुनाव में मतदान बहिष्कार की चेतावनी

रूपवास/भरतपुर। भरतपुर जिले के रूपवास उपखंड की नौहरदा ग्राम पंचायत के नगला हवेली में रास्ते पर जलभराव और कीचड़ की समस्या को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से बस्ती में आवागमन के लिए बेहतर रास्ते और जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मौके की तस्वीरों में भी रास्ते पर काफी पानी जमा दिखाई दे रहा है और ग्रामीण पानी के बीच खड़े होकर अपनी समस्या बताते नजर आ रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार नगला हवेली की इस बस्ती में करीब 70 परिवार रहते हैं। बारिश के दौरान कच्चे रास्ते पर पानी जमा होने और कीचड़ बनने से पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और मरीजों को उठानी पड़ती है।

बच्चों का स्कूल जाना हो रहा प्रभावित

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स्थानीय लोगों का कहना है कि रास्ते की खराब स्थिति के कारण छोटे बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है। रास्ते में जगह-जगह पानी और दलदल जैसी स्थिति बनने से बच्चों के गिरने का भी डर रहता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि केवल अस्थायी व्यवस्था के बजाय सड़क और पानी की निकासी का स्थायी समाधान कराया जाए।

ग्रामीणों का दावा है कि समस्या लंबे समय से बनी हुई है और इसे लेकर संबंधित स्तर पर कई बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली।

गर्भवती महिला को लेकर परिवार ने जताई चिंता

एक ग्रामीण ने बताया कि उनके परिवार में गर्भवती महिला की डिलीवरी का समय नजदीक है। ग्रामीण का कहना है कि रास्ते की वर्तमान स्थिति ऐसी है कि एंबुलेंस का घर तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में किसी आपात स्थिति में मरीज को मुख्य रास्ते तक पहुंचाना बड़ी चुनौती बन सकता है।

ग्रामीणों ने कहा कि सड़क केवल सुविधा का विषय नहीं है, बल्कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं से भी सीधे जुड़ी हुई है। इसलिए प्रशासन को समस्या की गंभीरता को देखते हुए जल्द कार्रवाई करनी चाहिए।

ग्रामीण का आरोप—विकास की बात की तो वोट को लेकर कही गई बात

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विरोध के दौरान एक ग्रामीण ने वीडियो में सरपंच पर गंभीर आरोप भी लगाया। ग्रामीण का दावा है कि जब विकास कार्य कराने की मांग की गई तो सरपंच की ओर से कथित रूप से कहा गया कि “तुमने मुझे क्या वोट दिए हैं, जो तुम्हारा कार्य कराया जाए?”

हालांकि इस आरोप को लेकर जब सनातनी संत रिपोर्टर ने सरपंच से उनका पक्ष जाना तो उन्होंने ग्रामीण के आरोप से साफ इनकार किया। सरपंच ने कहा कि उन्होंने इस तरह की कोई बात नहीं कही और उनके ऊपर लगाए जा रहे आरोप गलत हैं।

सनातनी संत रिपोर्टर ग्रामीण द्वारा लगाए गए इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। निष्पक्षता के तहत ग्रामीण का आरोप और संबंधित सरपंच का पक्ष दोनों प्रकाशित किए जा रहे हैं।

सरपंच बोले—समस्या से अवगत, कार्य स्वीकृत

वहीं रास्ते और जलभराव की समस्या पर सरपंच ने बताया कि ग्राम पंचायत को मामले की जानकारी है। सरपंच के अनुसार पहले संबंधित रास्ते की भूमि को लेकर समस्या थी और वह पंचायत के अधिकार क्षेत्र में नहीं होने के कारण वहां कार्य कराने में परेशानी आ रही थी।

सरपंच का कहना है कि अब ग्रामीणों की ओर से रास्ते को लेकर सहमति मिलने और कार्य में विरोध नहीं किए जाने की बात सामने आने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। उनके मुताबिक कार्य स्वीकृत करा लिया गया है और करीब 15 दिन के अंदर काम शुरू कराने की बात कही गई है।

ग्रामीण बोले—‘15 दिन कहते-कहते सात साल निकल गए’

दूसरी तरफ ग्रामीण पंचायत के इस आश्वासन से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें पहले भी समस्या के समाधान के लिए समय दिया जाता रहा है। उनका आरोप है कि “15 दिन में काम होगा” जैसे आश्वासन सुनते-सुनते करीब सात साल निकल गए, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।

ग्रामीणों का कहना है कि इस बार वे केवल आश्वासन नहीं चाहते, बल्कि मौके पर वास्तविक कार्य शुरू होते देखना चाहते हैं।

आंदोलन और मतदान बहिष्कार की चेतावनी

समस्या को लेकर नाराज ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अब भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे अपनी मांग को लेकर आंदोलन करने पर विचार करेंगे।

कुछ ग्रामीणों ने आगामी पंचायती राज चुनाव में मतदान के बहिष्कार की चेतावनी भी दी। यह ग्रामीणों द्वारा विरोध के दौरान व्यक्त किया गया पक्ष है। ग्रामीणों का कहना है कि बुनियादी रास्ते जैसी सुविधा के लिए भी वर्षों इंतजार करना पड़ रहा है, इसलिए वे चाहते हैं कि प्रशासन सीधे मामले का संज्ञान ले।

बस्ती के विकास को लेकर भी उठाए सवाल

कुछ ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि इस बस्ती में अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय से जुड़े परिवारों की संख्या अधिक है और आसपास की अन्य बस्तियों की तुलना में यहां बुनियादी सुविधाओं की स्थिति कमजोर है। ग्रामीणों ने इस आधार पर भी विकास कार्यों में उपेक्षा का आरोप लगाया है।

हालांकि सनातनी संत रिपोर्टर इस तुलनात्मक दावे अथवा किसी प्रकार के भेदभाव के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। इस संबंध में ग्रामीणों का कथन उनके पक्ष के रूप में प्रकाशित किया जा रहा है।

ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि बस्ती तक सुगम रास्ता तैयार कराया जाए और जल निकासी की ऐसी व्यवस्था हो जिससे बारिश के दौरान दोबारा रास्ता तालाब जैसी स्थिति में न बदले।

अब ग्रामीणों की निगाह पंचायत की ओर से बताए गए 15 दिन के समय पर है। यदि निर्धारित अवधि में काम शुरू होता है तो वर्षों से रास्ते की समस्या झेलने का दावा कर रहे परिवारों को राहत मिल सकती है। वहीं काम शुरू नहीं होने की स्थिति में ग्रामीणों ने अपना विरोध तेज करने की बात कही है।

डिस्क्लेमर: खबर मौके पर उपलब्ध तस्वीरों, ग्रामीणों के बयानों और ग्राम पंचायत के पक्ष के आधार पर तैयार की गई है। आरोपों को आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है। जहां स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है, वहां इसका स्पष्ट उल्लेख किया गया है।

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