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कुएं की मिट्टी ढहने से दो सगे भाइयों की दर्दनाक मौत, गांव में पसरा मातम

राजस्थान: करौली । जिले के सपोटरा क्षेत्र के अमरगढ़ गांव में शनिवार को एक बेहद दर्दनाक हादसा हो गया, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। गांव के मोतीपुरा मार्ग स्थित एक पुराने कुएं में पानी की मोटर निकालने के दौरान अचानक कुएं की मिट्टी ढह गई, जिससे दो सगे भाई करीब 15 फीट गहरी मिट्टी में दब गए। ग्रामीणों ने ढाई घंटे तक लगातार रेस्क्यू अभियान चलाकर दोनों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने दोनों भाइयों को मृत घोषित कर दिया।

मृतकों की पहचान अमरगढ़ निवासी कमलेश (32) और मुकेश (35) पुत्र रामविलास के रूप में हुई है। इस हादसे के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं ग्रामीण भी इस दर्दनाक घटना से गहरे सदमे में हैं।

मोटर निकालने के दौरान हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार अमरगढ़ गांव के मोतीपुरा मार्ग पर स्थित एक पुराना कुआं काफी समय से उपयोग में लिया जा रहा था। कुएं में लगी पानी की मोटर मिट्टी में दब गई थी, जिसे निकालने के लिए दोनों भाई कई दिनों से कुएं को और गहरा कर रहे थे। बताया जा रहा है कि शनिवार को भी दोनों भाई कुएं में उतरकर मिट्टी हटाने और मोटर निकालने का काम कर रहे थे।

करीब 40 फीट गहरे कुएं में अचानक ऊपर की मिट्टी भरभराकर नीचे गिरने लगी। इससे दोनों भाई मिट्टी के नीचे दब गए। हादसा इतना अचानक हुआ कि उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला। कुएं से चीख-पुकार सुनते ही आसपास के लोग मौके की ओर दौड़े।

गांव में मची अफरा-तफरी

घटना के बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंच गए। बताया जा रहा है कि मौके पर तत्काल कोई सरकारी राहत संसाधन उपलब्ध नहीं था, जिसके चलते ग्रामीणों ने खुद ही बचाव अभियान शुरू किया।

रस्सियों, फावड़ों और अन्य साधनों की मदद से ग्रामीण कुएं में उतरे और मिट्टी हटाने का प्रयास शुरू किया। करीब ढाई घंटे तक लगातार चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद दोनों भाइयों को बाहर निकाला गया। हालांकि तब तक उनकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी।

ग्रामीणों ने तुरंत दोनों को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

दो सगे भाइयों की एक साथ मौत से परिवार पूरी तरह टूट गया है। गांव में हर आंख नम दिखाई दी। मृतक मुकेश की पत्नी की करीब 13 वर्ष पहले ही मौत हो चुकी थी। उसके परिवार में एक बेटी है, जो अब पिता के साये से भी वंचित हो गई।

वहीं छोटे भाई कमलेश के परिवार में पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं। कमलेश की मौत के बाद अब परिवार के सामने आर्थिक और सामाजिक संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों भाई मेहनतकश और सरल स्वभाव के थे तथा परिवार का पालन-पोषण मजदूरी और खेती से करते थे।

प्रशासन और पुलिस पहुंची मौके पर

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया और ग्रामीणों से घटना की जानकारी ली। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि पुराने कुओं में सुरक्षा इंतजामों की भारी कमी रहती है। बिना तकनीकी सहायता और सुरक्षा उपकरणों के लोग खुद ही कुएं साफ करने या मोटर निकालने का काम करते हैं, जिससे ऐसे हादसों का खतरा बढ़ जाता है।

ग्रामीणों ने उठाए सवाल

घटना के बाद ग्रामीणों में प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर भी नाराजगी दिखाई दी। लोगों का कहना है कि यदि समय पर राहत दल और आधुनिक उपकरण मौके पर पहुंच जाते तो शायद दोनों भाइयों की जान बचाई जा सकती थी।

ग्रामीणों ने बताया कि रेस्क्यू के दौरान उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। मिट्टी लगातार नीचे खिसक रही थी, जिससे बचाव कार्य और भी जोखिम भरा बन गया था। इसके बावजूद ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर दोनों भाइयों को बचाने में जुटे रहे।

गांव में पसरा सन्नाटा

रविवार को अमरगढ़ गांव में मातम पसरा रहा। हर गली और चौपाल पर इसी हादसे की चर्चा होती रही। गांव के लोगों का कहना है कि उन्होंने पहली बार इतना दर्दनाक हादसा देखा है। दो भाइयों की एक साथ मौत ने पूरे गांव को झकझोर दिया।

महिलाएं परिजनों को ढांढस बंधाती नजर आईं, जबकि बच्चे और बुजुर्ग भी गमगीन दिखाई दिए। गांव के कई लोगों ने परिवार की आर्थिक मदद करने की बात भी कही।

सुरक्षा को लेकर जरूरी सवाल

यह हादसा एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में पुराने कुओं की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने कुओं की खुदाई या सफाई के दौरान पर्याप्त सुरक्षा उपाय जरूरी हैं। मिट्टी धंसने का खतरा हमेशा बना रहता है, खासकर बरसात और गर्मी के मौसम में।

बिना तकनीकी विशेषज्ञों की सलाह और सुरक्षा उपकरणों के ऐसे कार्य करना जानलेवा साबित हो सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और संसाधनों के अभाव के कारण लोग खुद ही जोखिम उठाने को मजबूर हो जाते हैं।

प्रशासन से सहायता की मांग

हादसे के बाद ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की मांग की है। गांव वालों का कहना है कि परिवारों के सामने अब बड़ा संकट खड़ा हो गया है और सरकारी सहायता बेहद जरूरी है।

लोगों ने यह भी मांग उठाई कि पुराने कुओं और जल स्रोतों की समय-समय पर जांच कराई जाए तथा ऐसे कार्यों के लिए सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।

अमरगढ़ गांव का यह दर्दनाक हादसा न केवल दो परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति बन गया है, बल्कि पूरे इलाके को गहरे दुख में छोड़ गया है। मेहनत-मजदूरी कर परिवार चलाने वाले दो भाइयों की एक साथ मौत ने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। अब गांव के लोग यही दुआ कर रहे हैं कि ईश्वर इस दुख की घड़ी में परिवार को हिम्मत दे।

खबर: मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार की गई है ।

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