दौसा जिले की महवा तहसील का ग्राम खोहरा मुल्ला बना पर्यावरण संरक्षण और विकास की मिसाल
राजस्थान का नाम सुनते ही लोगों के मन में तपता रेगिस्तान, गर्म हवाएं, दूर-दूर तक फैली बंजर जमीन और धूलभरी सड़कें उभर आती हैं। लेकिन पूर्वी राजस्थान के दौसा जिले में एक ऐसा गांव भी मौजूद है, जिसे देखकर कोई भी व्यक्ति पहली नजर में यही कह उठे — “क्या यह सच में राजस्थान है?”
दौसा जिले की महवा तहसील स्थित ग्राम खोहरा मुल्ला आज अपनी अद्भुत हरियाली, स्वच्छ वातावरण और विकास कार्यों के कारण पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। गांव की सड़कों पर चलते ही ऐसा महसूस होता है मानो किसी पहाड़ी पर्यटन स्थल में प्रवेश कर रहे हों। सड़क के दोनों किनारों पर दूर-दूर तक खड़े विशाल छायादार वृक्ष, हरियाली से ढकी सड़कें, ठंडी हवाओं का एहसास और साफ-सुथरा वातावरण गांव को एक अलग पहचान देते हैं।
ग्राम खोहरा मुल्ला, पोस्ट खोहरा मुल्ला, तहसील महवा, जिला दौसा, राजस्थान का यह गांव आज केवल एक गांव नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामूहिक जनसहयोग की जीवंत मिसाल बन चुका है। ग्रामीणों के अनुसार वर्षों पहले यह क्षेत्र भी राजस्थान के अन्य सामान्य गांवों की तरह सूखा और बंजर दिखाई देता था। गर्मियों में तेज धूल उड़ती थी, सड़कें तपती रहती थीं और राहगीरों के लिए पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता था। लेकिन समय के साथ गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल गई।
आज गांव में प्रवेश करते ही सड़क के दोनों ओर कतारों में लगे विशाल वृक्ष यात्रियों का स्वागत करते दिखाई देते हैं। तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच इन पेड़ों की ठंडी छांव लोगों को राहत देती है। हरियाली इतनी घनी दिखाई देती है कि पहली नजर में विश्वास करना कठिन हो जाता है कि यह वही राजस्थान है, जिसकी पहचान अक्सर रेगिस्तान और भीषण गर्मी से की जाती है।
ग्रामीण बताते हैं कि इस बदलाव के पीछे वर्षों की मेहनत, सामूहिक सोच और प्रकृति के प्रति प्रेम छिपा हुआ है। गांव में लगातार पौधरोपण अभियान चलाए गए। केवल पौधे लगाने तक ही काम सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्हें बचाने और बड़ा करने की जिम्मेदारी भी गांव के लोगों ने मिलकर निभाई। लोगों ने पौधों को नियमित पानी दिया, सुरक्षा की व्यवस्था की और उन्हें परिवार के सदस्य की तरह संभाला। यही कारण है कि कभी छोटे दिखाई देने वाले पौधे आज विशाल छायादार वृक्ष बन चुके हैं।
गांव की हरियाली की चर्चा होते ही राजस्थान के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के विकास, पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण को लेकर उनकी सोच ने क्षेत्र को नई दिशा देने का काम किया। लोगों के अनुसार उन्होंने गांव में हरियाली बढ़ाने और विकास कार्यों को गति देने के लिए लोगों को प्रेरित किया।
ग्रामीण बताते हैं कि पहले गर्मियों के दौरान सड़क पर कुछ देर खड़ा रहना भी मुश्किल होता था। लेकिन आज पेड़ों की वजह से वातावरण पहले की तुलना में काफी ठंडा महसूस होता है। गांव की सड़कों पर पेड़ों की घनी छांव राहगीरों को राहत देती है। सड़क किनारे बैठे बुजुर्ग, पेड़ों की छांव में खेलते बच्चे और हरियाली के बीच गुजरते वाहन गांव की बदलती तस्वीर को साफ दर्शाते हैं।
गांव के युवाओं का कहना है कि हरियाली केवल सुंदरता नहीं बढ़ाती, बल्कि लोगों का जीवन भी बदल देती है। पेड़ों की वजह से धूल कम उड़ती है, वातावरण शुद्ध रहता है और गांव में सकारात्मक माहौल दिखाई देता है। गांव के कई युवा अब पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता फैलाने का काम भी कर रहे हैं।
खोहरा मुल्ला गांव की पहचान अब केवल एक सामान्य ग्रामीण क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की मिसाल के रूप में होने लगी है। राजस्थान जैसे राज्य में, जहां कई क्षेत्रों में पानी और हरियाली आज भी बड़ी चुनौती मानी जाती है, वहां यह गांव उम्मीद की नई कहानी लिखता नजर आता है।
ग्रामीणों के अनुसार पौधरोपण अभियान के दौरान लोगों को यह समझाया गया कि पेड़ केवल पर्यावरण नहीं बचाते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित करते हैं। शायद यही कारण है कि गांव में हर परिवार पेड़ों को अपनी जिम्मेदारी मानता है। गांव के कई लोग अपने घरों और खेतों के आसपास भी लगातार पौधे लगाते रहे हैं।
गांव की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सड़कें हैं। राज्य मार्ग से गांव की ओर जाते समय सड़क के दोनों किनारों पर खड़े विशाल वृक्ष ऐसा दृश्य तैयार करते हैं कि लोग वाहन रोककर फोटो और वीडियो बनाने लगते हैं। सोशल मीडिया के दौर में यह गांव तेजी से लोगों का ध्यान आकर्षित कर सकता है, क्योंकि राजस्थान में इतनी घनी हरियाली बहुत कम गांवों में देखने को मिलती है।
खोहरा मुल्ला केवल हरियाली तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां विकास कार्यों की झलक भी साफ दिखाई देती है। सड़क, बिजली, पानी और स्वच्छता जैसी सुविधाओं ने गांव की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब जनप्रतिनिधियों की सोच सकारात्मक हो और जनता उसका साथ दे, तो कोई भी क्षेत्र बदला जा सकता है। यहां विकास केवल कागजों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जमीन पर दिखाई देता है।
गांव के लोगों का मानना है कि यदि हर गांव इसी तरह पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दे, तो राजस्थान की तस्वीर भी बदल सकती है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि पहले जहां लोग गर्मी से परेशान रहते थे, वहीं आज पेड़ों की वजह से गांव का वातावरण काफी सुखद महसूस होता है।
गांव में आने वाले कई लोग इस हरियाली को देखकर आश्चर्य व्यक्त करते हैं। कई लोग यह सवाल पूछते हैं कि आखिर इतनी हरियाली संभव कैसे हुई? तब ग्रामीण मुस्कुराकर जवाब देते हैं कि यह वर्षों की मेहनत, सामूहिक सोच और प्रकृति के प्रति प्रेम का परिणाम है।
खोहरा मुल्ला गांव यह संदेश देता है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो तो राजस्थान जैसी गर्म धरती पर भी हरियाली की नई कहानी लिखी जा सकती है। यहां की सड़कें केवल रास्ते नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती दिखाई देती हैं। पेड़ों की लंबी कतारें मानो यह कहती हैं कि यदि समाज और नेतृत्व साथ आ जाए, तो बंजर जमीन भी हरियाली की पहचान बन सकती है।
आज जब पूरे देश में पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन को लेकर चर्चा हो रही है, तब दौसा जिले का यह गांव लोगों के सामने एक जीवंत उदाहरण बनकर खड़ा है। यहां की हरियाली यह साबित करती है कि विकास केवल बड़ी इमारतों से नहीं होता, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर भी किया जा सकता है।
ग्राम खोहरा मुल्ला आज केवल एक गांव का नाम नहीं रहा, बल्कि यह उस सोच का प्रतीक बन चुका है जिसमें विकास और पर्यावरण दोनों साथ-साथ चलते हैं। यहां की हरियाली केवल पेड़ों में नहीं, बल्कि लोगों की सोच, उनकी मेहनत और गांव के प्रति उनके प्रेम में भी दिखाई देती है।
और सच कहा जाए तो राजस्थान में बहुत कम ऐसे गांव होंगे, जहां सड़क पर कदम रखते ही ऐसा महसूस हो कि प्रकृति खुद मुस्कुराकर आपका स्वागत कर रही हो। दौसा जिले की महवा तहसील का ग्राम खोहरा मुल्ला आज उसी एहसास का नाम बन चुका है — जहां हरियाली केवल दिखाई नहीं देती, बल्कि महसूस भी होती है।
दोस्तों आपकी क्या राय है कमेंट अवश्य करें और अपने गांव की भी तस्वीर अपलोड करें। एक कदम हरियाली की ओर ” स्वच्छ भारत, हरा भरा भारत”

