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सफलता की नई इबारत: बयाना के BSSO गजेंद्र सिंह गुर्जर बने असिस्टेंट प्रोफेसर, MBC वर्ग में पाई प्रदेश में पहली रैंक

विशेष रिपोर्ट: गांव टुंडपुरा (भरतपुर) के एक ही परिवार के 4 बच्चे सरकारी सेवा में, शिक्षा की ताकत से बदला आने वाली पीढ़ियों का भविष्य

बयाना/राजस्थान। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित कॉलेज शिक्षा विभाग में सहायक आचार्य (Assistant Professor – EAFM) भर्ती परीक्षा के परिणाम घोषित होते ही भरतपुर जिले के बयाना क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है। वर्तमान में बयाना में ब्लॉक सामाजिक सुरक्षा अधिकारी (BSSO) के पद पर कार्यरत श्री गजेंद्र सिंह गुर्जर ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर न केवल अपने माता-पिता का सिर फक्र से ऊंचा किया है, बल्कि पूरे क्षेत्र और समाज का नाम रोशन किया है।

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गजेंद्र सिंह गुर्जर ने अपनी कड़ी मेहनत, अटूट धैर्य और दृढ़ संकल्प के बल पर संपूर्ण राजस्थान में 55वीं रैंक हासिल की है। वहीं, अपनी श्रेणी एमबीसी (MBC – Most Backward Classes) में उन्होंने पूरे प्रदेश में प्रथम (1st) स्थान प्राप्त कर एक अनूठी मिसाल कायम की है। उनकी इस अभूतपूर्व उपलब्धि पर उनके परिजनों, मित्रों और पूरे समाज ने मिठाई खिलाकर और आतिशबाजी कर उन्हें बधाई दी।

सपने से मंज़िल तक: संघर्ष और निरंतरता की अनूठी कहानी

जीवन में कुछ उपलब्धियाँ केवल एक नौकरी या पद प्राप्त करने तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि वे वर्षों के संघर्ष, त्याग, आत्मविश्वास और निरंतर परिश्रम की कहानी बयां करती हैं। गजेंद्र सिंह की यह सफलता भी रातों-रात नहीं मिली, बल्कि यह उनके कड़े सेवा-संघर्ष और ‘सफलता के बाद भी रुकना नहीं’ के सिद्धांत का परिणाम है।

अपनी इस गौरवमयी यात्रा को साझा करते हुए नवनियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसर गजेंद्र सिंह गुर्जर भावुक हो उठते हैं। उन्होंने बताया:

“सहायक आचार्य (Assistant Professor) का पद हमेशा से मेरा ड्रीम जॉब रहा है। वर्षों से जिस लक्ष्य को मन में संजोए रखा, आज उसे प्राप्त कर पाना मेरे जीवन के सबसे सुखद क्षणों में से एक है। हर पड़ाव ने मुझे कुछ नया सिखाया, आत्मविश्वास दिया और अपने अंतिम लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।”

गजेंद्र सिंह की राजकीय सेवा का सफरनामा:

वर्ष 2020: उद्योग विभाग (राजस्थान सरकार) में आर्थिक अन्वेषक (Economic Investigator) के पद पर प्रथम चयन।

द्वितीय पड़ाव: सांख्यिकी विभाग में सहायक सांख्यिकी अधिकारी (Assistant Statistical Officer – ASO) के रूप में कार्य करने का अवसर मिला।

तृतीय पड़ाव: पंचायती राज विभाग में प्रगति प्रसार अधिकारी एवं वर्तमान में ब्लॉक सामाजिक सुरक्षा अधिकारी (BSSO), बयाना के पद पर सेवाएं।

अंतिम मंज़िल: आरपीएससी द्वारा आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर (EAFM) के रूप में सर्वोच्च रैंक के साथ अंतिम चयन।

गजेंद्र सिंह ने अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपने पूज्य माता-पिता, गुरुजनों, परिवार, शुभचिंतकों और ईश्वर की असीम कृपा को दिया है। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक के रूप में अब वे विद्यार्थियों के ज्ञान, व्यक्तित्व निर्माण और समाज के विकास में अपना सर्वोत्तम योगदान देने का प्रयास करेंगे।

टुंडपुरा का ‘तंवर परिवार’: शिक्षा का वो गढ़ जहाँ गढ़ी जा रही हैं सफलताएं

गजेंद्र सिंह की यह सफलता केवल व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि इसके पीछे उनके परिवार, विशेषकर उनके पिता की दूरदर्शी सोच और तपस्या है। बयाना तहसील के गाँव टुंडपुरा के रहने वाले सेवानिवृत्त अध्यापक श्री रमेश जी तंवर ने अपनी मेहनत, त्याग और दूरदृष्टि से यह साबित कर दिया कि शिक्षा ही वह अचूक शक्ति है जो पूरे परिवार और आने वाली पीढ़ियों का भाग्य बदल सकती है।

आज टुंडपुरा का यह ‘तंवर परिवार’ पूरे राजस्थान और गुर्जर समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत (Role Model) बन चुका है। कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने समाज को हमेशा ‘पढ़ो और आगे बढ़ो’ का जो संदेश दिया था, यह परिवार उस संदेश को धरातल पर सच साबित कर रहा है। आज यदि कर्नल साहब होते, तो इस परिवार की सफलता देखकर उनकी छाती भी गर्व से चौड़ी हो जाती।

एक ही घर से सफलता की फेहरिस्त:

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रमेश जी तंवर के चार बेटे और पुत्रवधू शिक्षा की बदौलत आज देश और समाज की सेवा में ऊंचे पदों पर आसीन हैं:

गजेंद्र सिंह गुर्जर: पूर्व में कई पदों पर रहने के बाद अब आरपीएससी के माध्यम से असिस्टेंट प्रोफेसर (EAFM) में चयनित (MBC वर्ग में प्रथम रैंक)।

श्रीमती रीना देवी (पुत्रवधू): गजेंद्र सिंह गुर्जर की धर्मपत्नी, जो वर्तमान में सरकारी नर्सिंग ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं और स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान दे रही हैं।

रामवीर सिंह गुर्जर (पुत्र): अदम्य साहस का परिचय देते हुए राजस्थान पुलिस (कोटा) में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

हरिओम गुर्जर (पुत्र): प्रादेशिक राजधानी जयपुर में एक सफल बिजनेसमैन के रूप में परिवार की आर्थिक रीढ़ को मजबूत कर रहे हैं।

भूपेंद्र गुर्जर (पुत्र): परिवार की प्रशासनिक सेवा की विरासत को आगे बढ़ाते हुए वर्तमान में जयपुर में रहकर RAS (राजस्थान प्रशासनिक सेवा) की सिविल तैयारी में जुटे है

समाज के लिए एक सशक्त संदेश

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इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि यदि ग्रामीण परिवेश के बच्चों को सही मार्गदर्शन, संस्कार और शिक्षा का माहौल मिले, तो वे विपरीत परिस्थितियों में भी इतिहास रच सकते हैं। सलाम है ऐसे माता-पिता को जिन्होंने अभावों में रहकर भी अपने बच्चों को इस योग्य बनाया, और सलाम है समाज की उन बेटियों और बहुओं को जिन्होंने अपनी मेहनत से घूंघट के पीछे से निकलकर सफलता के आसमान को छुआ है।

टुंडपुरा का यह परिवार आज केवल तंवर परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के हाथ मजबूत कर रहा है। गजेंद्र सिंह गुर्जर का असिस्टेंट प्रोफेसर बनना इस बात का प्रतीक है कि लगन और शिक्षा के मार्ग पर चलकर दुनिया का कोई भी मुकाम असंभव नहीं है। समूचा राजस्थान आज गजेंद्र सिंह के उज्ज्वल भविष्य और मंगलमय जीवन की कामना कर रहा है।

– विशेष ब्यूरो रिपोर्ट, बयाना (भरतपुर)

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