गंगा दशहरा के पावन अवसर पर भरतपुर जिले का बंद बरेठा बाँध सोमवार को सनातन संस्कृति, वैदिक परंपरा और जल संरक्षण के संदेश से पूरी तरह गुंजायमान हो उठा। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने “वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान” के तहत बांध मराठा बंध पहुंचकर जल देवता की पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों को जल संरक्षण तथा सनातन संस्कृति से जुड़ने का संदेश दिया।
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मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर पूरे क्षेत्र में सुबह से ही उत्साह का वातावरण बना हुआ था। प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, वहीं स्थानीय ग्रामीणों और भाजपा कार्यकर्ताओं में मुख्यमंत्री के स्वागत को लेकर भारी उत्साह देखने को मिला। गंगा दशहरा के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चार, कलश यात्रा, पारंपरिक लोकगीत और धार्मिक अनुष्ठानों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
कार्यक्रम स्थल पर जैसे ही मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर उतरा, वहां मौजूद लोगों ने “भजनलाल शर्मा जिंदाबाद” के नारों के साथ उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री लगभग दोपहर 1 बजकर 10 मिनट के आसपास हेलीपैड पर पहुंचे। हेलीपैड से उतरने के बाद उन्होंने सबसे पहले कलश यात्रा में शामिल महिलाओं से मुलाकात की। महिलाओं ने भरतपुर की पारंपरिक लोकसंस्कृति के अनुसार गीतों और भजनों के साथ मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया।
महिलाओं की कलश यात्रा बनी आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम में महिलाओं द्वारा निकाली गई भव्य कलश यात्रा विशेष आकर्षण का केंद्र रही। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर सनातन संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। ढोल-नगाड़ों और वैदिक मंत्रों के बीच निकली इस यात्रा ने पूरे क्षेत्र को धार्मिक ऊर्जा से भर दिया। मुख्यमंत्री स्वयं महिलाओं के बीच पहुंचे और उनका अभिवादन स्वीकार किया।
महिलाओं ने मुख्यमंत्री का स्वागत पारंपरिक भरतपुरी गीतों से किया। कई महिलाओं ने मुख्यमंत्री के सामने जल संरक्षण और धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए सरकार की पहल की सराहना भी की। मुख्यमंत्री ने भी महिलाओं की सहभागिता को समाज और संस्कृति के लिए प्रेरणादायक बताया।
वैदिक मंत्रों से गूंज उठा बंद बरेठा बाँध
गंगा दशहरा के अवसर पर वैदिक विद्वानों और वेद मित्रों द्वारा मंत्रोच्चार किया गया। जैसे ही वैदिक ध्वनियां वातावरण में गूंजने लगीं, पूरा बांध मराठा बंध आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। सनातन परंपरा के अनुसार जल को जीवन का आधार माना गया है और उसी भावना के साथ जल देवता की पूजा की गई।
मुख्यमंत्री ने व्यू पॉइंट पर पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की। वैदिक ब्राह्मणों ने वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजन संपन्न कराया। मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सुख-समृद्धि और अच्छी वर्षा की कामना की।
कार्यक्रम के दौरान “वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान” के महत्व पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी अभियान नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने का संकल्प है। सनातन संस्कृति सदियों से नदियों, जल स्रोतों और प्रकृति को पूजनीय मानती आई है और आज उसी विचार को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।
सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। जल, थल और आसपास के पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। कई स्थानों पर पुलिस जवानों और कमांडो को तैनात किया गया था।
कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश से पहले लोगों की जांच की जा रही थी। प्रशासनिक अधिकारियों की टीम लगातार व्यवस्था पर नजर बनाए हुए थी। मुख्यमंत्री के आगमन से लेकर उनके प्रस्थान तक सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सक्रिय रहीं।
इस अवसर पर कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और भाजपा पदाधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम में मंत्री जवाहर सिंह बेढम , भाजपा जिला अध्यक्ष शिवानी दायमा , पूर्व सांसद रंजीता कोली, बयाना विधायक डा रितु बनावत , विधायक बहादुर सिंह कोली, भाजपा कार्यकारिणी सदस्य भानु प्रताप सिंह राजावत, धर्म सिंह चौधरी, पूर्व विधायक बच्चू सिंह बंसीवाल, बयाना पंचायत समिति प्रधान मुकेश कोली तथा भाजपा बंध बरेठा मंडल अध्यक्ष सत्य प्रकाश छावड़ी सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।
इसके अलावा प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे और व्यवस्थाओं की निगरानी करते दिखाई दिए।
स्थानीय लोगों में दिखा भारी उत्साह
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर स्थानीय लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला। सुबह से ही लोग कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने लगे थे। कई ग्रामीण अपने परिवारों के साथ मुख्यमंत्री को देखने और कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे।
ग्रामीणों ने कहा कि पहली बार इस प्रकार धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल में जल संरक्षण का संदेश दिया गया है। लोगों का मानना था कि यदि समाज जल के महत्व को समझेगा तो भविष्य में पानी की समस्या से काफी हद तक बचा जा सकेगा।
मुख्यमंत्री के स्वागत के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की। “भजनलाल शर्मा जिंदाबाद” और “भारत माता की जय” के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
जल संरक्षण और सनातन संस्कृति का संदेश
कार्यक्रम में बार-बार यह संदेश दिया गया कि जल ही जीवन है और भारतीय संस्कृति में जल को देवता के रूप में पूजा जाता है। गंगा दशहरा के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि समाज को जागरूक करने का भी प्रयास था।
उपस्थित नेता एवं समाजसेवियों ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में लोग प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं, जबकि भारतीय संस्कृति हमेशा प्रकृति के संरक्षण की बात करती रही है। नदियां, तालाब, कुएं और जलाशय भारतीय सभ्यता का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने भी अपने सन्देश में जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यदि आज जल को बचाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है।
भरतपुर रवाना हुए मुख्यमंत्री
कार्यक्रम संपन्न होने के बाद मुख्यमंत्री स्थानीय लोगों से मिले और उनका अभिवादन स्वीकार किया। इसके बाद वे भरतपुर के लिए रवाना हो गए, जहां उन्होंने गंगा मंदिर पहुंचकर आरती और पूजा-अर्चना में भाग लिया।
गंगा दशहरा के अवसर पर भरतपुर में भी धार्मिक कार्यक्रमों की धूम रही। श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पूजा-अर्चना कर प्रदेश और देश की खुशहाली की कामना की।
लोकतंत्र और संस्कृति के संगम का बना संदेश
बंद बरेठा बाँध पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल सरकारी आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह लोकतंत्र, संस्कृति और जनभागीदारी का भी प्रतीक बन गया। जिस प्रकार आमजन, महिलाएं, जनप्रतिनिधि और प्रशासन एक मंच पर दिखाई दिए, उसने सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समरसता का संदेश दिया।
गंगा दशहरा को सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। यही कारण रहा कि कार्यक्रम में धार्मिक आस्था का विशेष उत्साह दिखाई दिया।
श्रद्धालुओं ने जल पूजन कर पर्यावरण संरक्षण और जल बचाने का संकल्प लिया। कई लोगों ने इसे केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ा अभियान बताया।
सनातन परंपरा से जुड़ा ऐतिहासिक आयोजन
स्थानीय लोगों के अनुसार बांध मराठा बंध पर इस प्रकार का आयोजन क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक रहा। वैदिक परंपरा, लोकसंस्कृति और जल संरक्षण को एक साथ जोड़कर जिस प्रकार कार्यक्रम आयोजित किया गया, उसने लोगों के मन में गहरी छाप छोड़ी।
पूरे आयोजन के दौरान सनातन संस्कृति की झलक स्पष्ट दिखाई दी। वैदिक मंत्रों, पूजा-अर्चना, कलश यात्रा और पारंपरिक स्वागत ने कार्यक्रम को धार्मिक भव्यता प्रदान की।
गंगा दशहरा के इस अवसर पर बांध मराठा बंध से दिया गया जल संरक्षण का संदेश आने वाले समय में समाज को जागरूक करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कार्यक्रम ने यह साबित किया कि जब संस्कृति और समाज साथ चलते हैं, तब जनजागरण का प्रभाव और अधिक व्यापक हो जाता है।
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