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बांध बारैठा अभयारण्य में सक्रिय चीता केपी-3 ने किया बछड़े का शिकार, वन विभाग हाईअलर्ट पर

बयाना। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध कूनो नेशनल पार्क से निकलकर राजस्थान के बांध बारैठा वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में पहुंचे चीता केपी-3 की गतिविधियां लगातार चर्चा का विषय बनी हुई हैं। पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से यह चीता अभयारण्य और उसके आसपास के इलाकों में सक्रिय है। वन विभाग के अनुसार चीता लगभग प्रतिदिन अपना ठिकाना बदल रहा है, जिससे उसकी निगरानी में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों की सतर्कता और बढ़ गई है। सोमवार सुबह चीता खेरी घटिया क्षेत्र में पहुंच गया, जहां उसने एक गाय के बछड़े का शिकार कर लिया। घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों में चर्चा शुरू हो गई और मौके पर लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि चीता केपी-3 लगातार लंबी दूरी तय कर रहा है। बीते दिनों उसे सिकंदरा और नहरौली क्षेत्र में देखा गया था। इसके बाद उसकी लोकेशन बदलते हुए खेरी घटिया क्षेत्र में दर्ज की गई। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार चीते का इस प्रकार लगातार क्षेत्र बदलना उसके प्राकृतिक व्यवहार का हिस्सा हो सकता है, क्योंकि वह नए क्षेत्र में भोजन, पानी और सुरक्षित आवास की तलाश करता है। हालांकि आबादी वाले क्षेत्रों के नजदीक उसकी मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग अतिरिक्त सावधानी बरत रहा है।

बांध बारैठा वाइल्ड लाइफ रेंज के रेंजर जितेंद्र चौधरी ने बताया कि चीते की हर गतिविधि पर लगातार नजर रखी जा रही है। कूनो नेशनल पार्क की विशेष टीम और बांध बारैठा रेंज का स्टाफ संयुक्त रूप से उसकी निगरानी में जुटा हुआ है। चीते के गले में लगे जीपीएस रेडियो कॉलर के माध्यम से उसकी लोकेशन का पता लगाया जा रहा है। इस तकनीक की मदद से वन विभाग को चीते की गतिविधियों की सटीक जानकारी मिल रही है, जिससे आवश्यकतानुसार सुरक्षा और निगरानी संबंधी कदम उठाए जा रहे हैं।

जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह करीब 7:30 बजे खेरी घटिया क्षेत्र में पानी की टंकी के पास चीते ने एक गाय के बछड़े का शिकार किया। स्थानीय लोगों ने जब इस घटना की जानकारी वन विभाग को दी तो विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने क्षेत्र का निरीक्षण किया और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे चीते के नजदीक जाने या उसे देखने के लिए भीड़ न लगाएं, क्योंकि इससे वन्यजीव के व्यवहार में बदलाव आ सकता है और किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में चीते की मौजूदगी को लेकर उत्सुकता के साथ-साथ चिंता भी दिखाई दे रही है। कई लोग चीते को देखने के लिए उसके संभावित मूवमेंट वाले क्षेत्रों की ओर पहुंच रहे हैं। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना बेहद आवश्यक है। विभाग के कर्मचारियों द्वारा लगातार गांवों में लोगों को जागरूक किया जा रहा है और यह बताया जा रहा है कि यदि कहीं चीता दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दें।

वन विभाग का मानना है कि फिलहाल चीता किसी व्यक्ति पर हमला करने जैसी स्थिति में नहीं देखा गया है। उसका मुख्य उद्देश्य भोजन और सुरक्षित क्षेत्र की तलाश है। इसके बावजूद विभाग किसी भी संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं कर रहा है। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है और कर्मचारियों को चौबीस घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है। जीपीएस ट्रैकिंग के माध्यम से चीते की गतिविधियों का रिकॉर्ड भी तैयार किया जा रहा है, जिससे उसके मूवमेंट पैटर्न को समझने में मदद मिलेगी।

उल्लेखनीय है कि कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्वास परियोजना के तहत अफ्रीकी चीतों को बसाया गया था। इनमें से कुछ चीते समय-समय पर अपने निर्धारित क्षेत्र से बाहर निकलकर अन्य इलाकों में पहुंच जाते हैं। चीता केपी-3 भी ऐसे ही वन्यजीवों में शामिल है, जिसकी गतिविधियों पर विशेषज्ञों और वन अधिकारियों की विशेष नजर बनी हुई है। वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है, वहीं ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा और जागरूकता बनाए रखना भी उतना ही जरूरी हो गया है।

फिलहाल वन विभाग की टीमें लगातार क्षेत्र में गश्त कर रही हैं और चीते की हर गतिविधि पर नजर रख रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि लोगों के सहयोग से ही वन्यजीव संरक्षण और जनसुरक्षा दोनों उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया जा सकता है। चीते के अगले मूवमेंट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं और वन विभाग स्थिति पर पूरी तरह नियंत्रण बनाए हुए है।

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