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भरतपुर: रोडवेज बस में छूटा 30 तोला सोना और 3 लाख नकद, चालक-परिचालक की ईमानदारी बनी मिसाल

भरतपुर। वर्तमान समय में जहां अक्सर खोए हुए सामान के वापस मिलने की उम्मीद बहुत कम रह जाती है, वहीं भरतपुर में रोडवेज बस के चालक और परिचालक ने ईमानदारी की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है। एक यात्री का बैग रोडवेज बस में छूट गया, जिसमें करीब 30 तोला सोना और 3 लाख रुपये नकद रखे हुए थे। बैग मिलने के बाद चालक और परिचालक ने बिना किसी लालच के उसे सुरक्षित रखा और पुलिस को सौंप दिया। पुलिस की तत्परता और रोडवेज कर्मचारियों की ईमानदारी के चलते पूरा सामान सुरक्षित उसके वास्तविक मालिक को वापस मिल गया।

जानकारी के अनुसार यह मामला भरतपुर शहर के अटलबंद थाना क्षेत्र का है। एक यात्री यात्रा के दौरान अपना बैग रोडवेज बस में भूल गया। कुछ समय बाद जब उसे बैग के गायब होने का पता चला तो उसके होश उड़ गए, क्योंकि बैग में बड़ी मात्रा में सोने के आभूषण और लाखों रुपये नकद रखे हुए थे। यात्री ने तुरंत संबंधित अधिकारियों और पुलिस को सूचना दी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। पुलिस महानिरीक्षक भरतपुर रेंज कैलाशचंद विश्नोई और पुलिस अधीक्षक राजेश मीना के निर्देशन में पुलिस टीम को सक्रिय किया गया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुख्यालय धर्मेंद्र यादव तथा सहायक पुलिस अधीक्षक शहर वृत्त आशिमा वासवानी के नेतृत्व में अटलबंद थाना प्रभारी हेमेन्द्र चौधरी ने मामले की निगरानी की और बैग की तलाश शुरू करवाई।

सूचना के आधार पर पुलिस ने संबंधित रोडवेज बस की पहचान की। जांच के दौरान पता चला कि लोहागढ़ डिपो की बस संख्या RJ 05 PA 7178 में यात्री का बैग छूटा था। पुलिस ने तुरंत बस से संपर्क किया। इस दौरान बस चालक जितेन्द्र सिंह और परिचालक कान्हा बीएस ने अपनी जिम्मेदारी और ईमानदारी का परिचय देते हुए बताया कि उन्हें बस में एक बैग मिला था, जिसे उन्होंने सुरक्षित रख लिया है ताकि उसका वास्तविक मालिक मिलने पर उसे वापस सौंपा जा सके।

जब पुलिस टीम बस तक पहुंची तो चालक और परिचालक ने बैग पुलिस के सुपुर्द कर दिया। पुलिस ने बैग की जांच की तो उसमें करीब 30 तोला सोने के जेवरात और 3 लाख रुपये नकद मिले। सामान की मात्रा और उसकी कीमत को देखते हुए यह मामला बेहद संवेदनशील था। पुलिस ने पूरी सावधानी बरतते हुए बैग के मालिक की पहचान सुनिश्चित की और आवश्यक दस्तावेजों तथा विवरणों का मिलान किया।

सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद बैग और उसमें रखा पूरा सामान संबंधित यात्री को वापस सौंप दिया गया। अपना कीमती सामान सुरक्षित वापस मिलने पर यात्री ने राहत की सांस ली और पुलिस तथा रोडवेज कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। उसने कहा कि उसे उम्मीद नहीं थी कि लाखों रुपये और सोने से भरा बैग इतनी आसानी से वापस मिल जाएगा, लेकिन चालक, परिचालक और पुलिस की ईमानदारी के कारण उसका विश्वास कायम हुआ है।

इस घटना के बाद आम लोगों के बीच भी पुलिस और रोडवेज विभाग की सराहना हो रही है। सोशल मीडिया पर भी लोग चालक और परिचालक की ईमानदारी की प्रशंसा कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे उदाहरण समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और लोगों का सरकारी तंत्र पर विश्वास मजबूत करते हैं।

पुलिस अधिकारियों ने चालक जितेन्द्र सिंह और परिचालक कान्हा बीएस की विशेष रूप से सराहना की है। उनका कहना है कि यदि दोनों कर्मचारी चाहें तो बैग को छिपा सकते थे, लेकिन उन्होंने अपने कर्तव्य और नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता देते हुए ईमानदारी का परिचय दिया। इसी प्रकार पुलिस टीम ने भी त्वरित कार्रवाई करते हुए कम समय में बैग को खोजकर उसके मालिक तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यह घटना इस बात का प्रमाण है कि आज भी समाज में ऐसे लोग मौजूद हैं जो ईमानदारी और जिम्मेदारी को सर्वोपरि मानते हैं। भरतपुर में सामने आया यह मामला न केवल रोडवेज कर्मचारियों की सत्यनिष्ठा का उदाहरण है, बल्कि पुलिस और आम नागरिकों के बीच विश्वास को मजबूत करने वाली प्रेरणादायक घटना भी है। अधिकारियों ने इस पूरे प्रकरण को अनुकरणीय बताते हुए संबंधित कर्मचारियों और पुलिस टीम को बधाई दी है।

खबर: सोशल मीडिया पर प्रकाशित विभिन्न लेख एवं सनातनी संत रिपोर्टर सूत्र रिपोर्ट

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