जल जीवन मिशन की टंकी बनी, पाइपलाइन भी बिछी, फिर भी बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग
भरतपुर/बयाना। राजस्थान के भरतपुर जिले की दहगांव ग्राम पंचायत के देहगांव गांव में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट ने ग्रामीणों का जीवन मुश्किल बना दिया है। गांव के जाटव मोहल्ले में पानी की गंभीर समस्या को लेकर महिलाओं और ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने आरोप लगाया कि उन्हें पीने के पानी के लिए करीब दो किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता है और कई बार तीन-तीन दिन तक घरों महिलाओं को नहाये बिना हो जाता है।
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जेठ माह की तपती गर्मी में जब तापमान लगातार बढ़ रहा है, तब ग्रामीणों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने सरकार और संबंधित विभागों के खिलाफ नाराजगी जताते हुए कहा कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन जब वास्तविक समस्याओं के समाधान की बात आती है तो कोई सुनवाई नहीं होती।
दो किलोमीटर दूर से लाना पड़ता है पानी
प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने बताया कि गांव में जल जीवन मिशन योजना के तहत पानी की टंकी का निर्माण किया गया है। गांव के कई हिस्सों में पानी की आपूर्ति भी हो रही है, लेकिन जाटव मोहल्ले के अनेक परिवार आज भी पानी के लिए परेशान हैं। महिलाओं का कहना है कि उन्हें सुबह से ही पानी की तलाश में निकलना पड़ता है और कई बार दो किलोमीटर दूर स्थित जल स्रोतों से पानी लाकर परिवार की जरूरतें पूरी करनी पड़ती हैं।
एक महिला ने बताया कि पानी का जलस्तर नीचा होने से कुएं एवं बावड़िया सूख गई इससे गांव में पीने, खाना बनाने और पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करना बेहद कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी में यह समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है।
पाइपलाइन बिछी, नल लगे लेकिन पानी नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि जल जीवन मिशन योजना के तहत मोहल्ले में पाइपलाइन बिछाई गई है और कई स्थानों पर नल भी लगाए गए हैं। इसके बावजूद अधिकांश घरों तक नियमित जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। कुछ महिलाओं ने आरोप लगाया कि उनकी गली तक पाइपलाइन ही नहीं पहुंचाई गई, जबकि अन्य लोगों का कहना है कि पाइपलाइन तो बिछी हुई है लेकिन उसमें पानी नहीं छोड़ा जा रहा।
इस स्थिति ने ग्रामीणों के बीच असंतोष पैदा कर दिया है। उनका कहना है कि जब सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर योजनाएं संचालित कर रही है तो उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक क्यों नहीं पहुंच रहा।
अधिकारियों ने दिया जल्द समाधान का आश्वासन
इस संबंध में जब जलदाय विभाग के अधिकारियों से बातचीत की गई तो विभागीय अधिकारी मानवेंद्र सिंह गुर्जर ने बताया कि जल जीवन मिशन की टंकी से पानी की सप्लाई की व्यवस्था मौजूद है। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ क्षेत्रों में तकनीकी और निर्माण संबंधी कारणों से पानी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
अधिकारी ने बताया कि पहले कार्य कर रहे ठेकेदार के स्तर पर कई कार्य लंबित रह गए थे, जिसके कारण समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हो पाया। अब विभाग द्वारा नया ठेकेदार नियुक्त किया गया है और शेष कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जा रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही प्रभावित क्षेत्रों में पानी की नियमित आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी।
ग्रामीणों ने लगाए लापरवाही के आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि योजना के निर्माण और क्रियान्वयन में कहीं न कहीं गंभीर लापरवाही बरती गई है। उनका कहना है कि यदि समय पर गुणवत्ता के साथ कार्य किया गया होता तो आज उन्हें पानी के लिए सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन नहीं करना पड़ता।
महिलाओं ने प्रशासन से मांग की कि जलापूर्ति व्यवस्था की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और जिन अधिकारियों, कर्मचारियों या ठेकेदारों की लापरवाही के कारण समस्या उत्पन्न हुई है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
सरकार की मंशा पर नहीं, क्रियान्वयन पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार की जल जीवन मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है। गांव में टंकी का निर्माण और पाइपलाइन बिछाने का कार्य भी इसी उद्देश्य के तहत किया गया। इसलिए सरकार की मंशा पर सवाल नहीं उठाए जा सकते।
हालांकि योजना के धरातल पर क्रियान्वयन को लेकर गंभीर प्रश्न जरूर खड़े हो रहे हैं। यदि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी ग्रामीणों को पानी के लिए संघर्ष करना पड़े तो यह संबंधित विभागों, अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
जिले के कई गांवों में सामने आ रही समान समस्याएं
देहगांव का मामला कोई अकेला उदाहरण नहीं है। भरतपुर जिले के कई गांवों से समय-समय पर जल जीवन मिशन की योजनाओं में देरी, अधूरे कार्य और जलापूर्ति बाधित होने जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं। कहीं पाइपलाइन अधूरी है तो कहीं टंकियां बनकर तैयार हैं लेकिन नियमित सप्लाई नहीं हो रही।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजनाओं की नियमित निगरानी और गुणवत्ता परीक्षण किया जाए तो ऐसी समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसके लिए विभागीय अधिकारियों, पंचायत प्रतिनिधियों और ठेकेदारों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
जांच और जवाबदेही की मांग
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार को इस पूरे मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं और इनका सीधा संबंध आम लोगों के जीवन से है। ऐसे में जहां भी योजनाओं के क्रियान्वयन में कमी या अनियमितता सामने आए, वहां निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
भीषण गर्मी के दौर में पानी जैसी बुनियादी आवश्यकता के लिए संघर्ष कर रहे देहगांव के लोगों की समस्या प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है। जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर तक नल से जल पहुंचाना है, लेकिन जब योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंचता तो जनता का विश्वास कमजोर होता है। अब देखना यह होगा कि विभाग द्वारा दिया गया आश्वासन कब तक धरातल पर उतरता है और जाटव मोहल्ले के लोगों को नियमित पेयजल आपूर्ति कब तक मिल पाती है।

