भरतपुर, राजस्थान।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भरतपुर दौरे के दौरान जिला स्तरीय अधिकारियों की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक लेकर विकास कार्यों और आमजन से जुड़ी मूलभूत सुविधाओं की गहन समीक्षा की। बैठक में पेयजल व्यवस्था, बिजली आपूर्ति, चिकित्सा सेवाएं, जलभराव की समस्या, जल संरक्षण अभियान और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण जैसे कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि भीषण गर्मी के इस दौर में आमजन को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए और सभी व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित होंबैठक
में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार आमजन को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। ऐसे में जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह जमीनी स्तर पर योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि गर्मी के मौसम में पेयजल संकट सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आता है, इसलिए किसी भी क्षेत्र में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए। जलदाय विभाग को निर्देशित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नियमित मॉनिटरिंग कर खराब पड़ी पाइपलाइनों और पेयजल योजनाओं को तुरंत दुरुस्त किया जाएमुख्यमंत्री
ने बिजली विभाग के अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि गर्मी के दौरान निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में ट्रिपिंग तथा लो-वोल्टेज जैसी समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाए ताकि आमजन को राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं में लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
बैठक के दौरान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अस्पतालों में दवाइयों की उपलब्धता, डॉक्टरों की उपस्थिति तथा आपातकालीन सेवाओं को मजबूत रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के कारण हीटवेव और मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए अस्पतालों में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से तैयार रहनी चाहिए। आमजन को समय पर उपचार मिले, इसके लिए चिकित्सा विभाग को संवेदनशीलता के साथ कार्य करने को कहा गया।
भरतपुर शहर और आसपास के क्षेत्रों में बरसात के दौरान होने वाले जलभराव की समस्या पर भी मुख्यमंत्री ने गंभीर चिंता जताई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए ठोस और बेहतर कार्ययोजना तैयार की जाए। नालों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था और ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत करने पर विशेष जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हर वर्ष लोगों को जलभराव से परेशानी नहीं झेलनी पड़े, इसके लिए दीर्घकालिक योजना पर काम किया जाए।
बैठक में मुख्यमंत्री ने भरतपुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भरतपुर अपनी ऐतिहासिक पहचान और विरासत के लिए देशभर में प्रसिद्ध है, इसलिए विकास कार्यों के साथ-साथ धरोहरों का संरक्षण भी जरूरी है। प्राचीन कुंडों और जल संरचनाओं के पुनरुद्धार को प्राथमिकता देने की बात कहते हुए मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को सक्रियता से कार्य करने के निर्देश दिए।
उन्होंने “वंदे गंगा जल संरक्षण-जन अभियान” के तहत जिले में चल रहे कार्यों की भी समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और समाज की भागीदारी के बिना यह अभियान सफल नहीं हो सकता। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार, तालाबों और कुंडों की सफाई तथा वर्षा जल संरक्षण के कार्यों में तेजी लाई जाए। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को जल बचाने के लिए प्रेरित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि केवल बैठकों तक सीमित रहने के बजाय फील्ड विजिट बढ़ाई जाए। अधिकारी गांवों और शहरों में जाकर वास्तविक स्थिति का जायजा लें तथा समस्याओं का मौके पर समाधान करें। उन्होंने कहा कि जनता को राहत पहुंचाना ही प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। टीम भावना के साथ कार्य करते हुए अधिकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएं।
बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे जिन्होंने जिले में चल रहे विकास कार्यों और योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री ने कई योजनाओं की धीमी गति पर नाराजगी जताते हुए समयबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा साफ है कि विकास कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता बनी रहे तथा आमजन को योजनाओं का सीधा लाभ मिले।
भरतपुर में मुख्यमंत्री की इस समीक्षा बैठक को प्रशासनिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद जिले में पेयजल, बिजली, चिकित्सा और जल निकासी जैसी व्यवस्थाओं में तेजी से सुधार देखने को मिल सकता है। साथ ही जल संरक्षण और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर भी प्रशासन अधिक सक्रिय नजर आएगा।
मुख्यमंत्री ने अंत में अधिकारियों से कहा कि जनता की समस्याओं के समाधान में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाए। आमजन का विश्वास बनाए रखना प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और सभी अधिकारी संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करें।
खबर: सनातनी संत रिपोर्टर सूत्र रिपोर्ट
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