बयाना (भरतपुर)। श्री भूदेव धाकड़ द्वारा आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति के बीच इस्कॉन संस्था के संत स्वामी कृष्ण दास जी महाराज ने अपने प्रेरणादायक प्रवचनों से उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक जीवन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह संसार दुखों का घर है और भगवान का नाम ही मनुष्य को इन दुखों से पार लगाने की शक्ति रखता है। जो व्यक्ति भगवान की शरण में रहता है, भगवान स्वयं उसकी रक्षा करते हैं तथा उस पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं।
स्वामी कृष्ण दास जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है। यह जीवन केवल भौतिक सुख-सुविधाओं को प्राप्त करने के लिए नहीं मिला है, बल्कि आत्मा और परमात्मा के संबंध को समझने के लिए मिला है। आज का मनुष्य बाहरी सुखों की तलाश में इतना व्यस्त हो गया है कि वह अपने वास्तविक स्वरूप और जीवन के मूल उद्देश्य को भूलता जा रहा है। इसी कारण उसे मानसिक अशांति, तनाव, भय और दुखों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि संसार में हर व्यक्ति किसी न किसी प्रकार के दुख से पीड़ित है। कोई धन की चिंता में है, कोई परिवार की समस्याओं से परेशान है, तो कोई स्वास्थ्य संबंधी कष्टों का सामना कर रहा है। इन सभी दुखों का मूल कारण भगवान से दूर होना है। जब जीव भगवान को भूल जाता है, तब वह माया के बंधन में फंस जाता है और जीवन में अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करता है।
महाराज जी ने कहा कि भगवान का नाम ही ऐसा दिव्य साधन है जो मनुष्य को हर प्रकार के दुख और संकट से मुक्ति दिला सकता है। जब कोई व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान का स्मरण करता है, तब उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं। भगवान का नाम केवल शब्द नहीं है, बल्कि उसमें स्वयं भगवान की शक्ति विद्यमान होती है। इसलिए नाम जप करने वाला व्यक्ति धीरे-धीरे आध्यात्मिक शांति और आनंद का अनुभव करने लगता है।
अपने प्रवचन के दौरान उन्होंने वर्तमान समय की परिस्थितियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज समाज में छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद और झगड़े बढ़ते जा रहे हैं। लोग एक-दूसरे के प्रति प्रेम और सम्मान की भावना खोते जा रहे हैं। स्वार्थ, ईर्ष्या और अहंकार के कारण परिवार टूट रहे हैं तथा समाज में अशांति का वातावरण बन रहा है। ऐसे समय में भगवान का नाम और आध्यात्मिक ज्ञान ही समाज को सही दिशा दे सकता है।
उन्होंने कहा कि जब मनुष्य भगवान की शरण में आता है तो उसके भीतर करुणा, प्रेम, दया और सहनशीलता जैसे गुण विकसित होते हैं। वह दूसरों का बुरा करने के बजाय उनके कल्याण की सोचता है। भगवान की भक्ति व्यक्ति के चरित्र को श्रेष्ठ बनाती है और उसे जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने की शक्ति देती है
स्वामी कृष्ण दास जी महाराज ने भगवद्भक्ति के महत्व को समझाते हुए कहा कि भगवान अपने भक्तों का विशेष ध्यान रखते हैं। जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान की सेवा और भक्ति करता है, भगवान कभी उसका साथ नहीं छोड़ते। जीवन में चाहे कितनी भी विपत्तियां क्यों न आ जाएं, भगवान अपने भक्त को उन कठिनाइयों से पार लगाने का मार्ग अवश्य प्रदान करते हैं। यही कारण है कि संत-महात्मा सदैव भगवान की शरण ग्रहण करने का संदेश देते हैं।
उन्होंने कहा कि यह भौतिक संसार एक भवसागर के समान है, जिसमें जीव जन्म और मृत्यु के चक्र में भटकता रहता है। इस भवसागर को पार करने के लिए भगवान का नाम ही नौका का कार्य करता है। जिस प्रकार समुद्र को पार करने के लिए नाव की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार संसार रूपी समुद्र को पार करने के लिए हरिनाम संकीर्तन और भगवान की भक्ति आवश्यक है।
प्रवचन के दौरान महाराज जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं से प्रतिदिन भगवान के नाम का जप करने का आग्रह किया। उन्होंने सभी लोगों से कम से कम एक माला जप करने का संकल्प लेने को कहा। उन्होंने बताया कि नियमित रूप से नाम जप करने से मन शांत होता है, विचार शुद्ध होते हैं और व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन कुछ समय भगवान के नाम के लिए निकाल ले, तो उसका जीवन सुख, शांति और संतोष से भर सकता है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ में मनुष्य ने अपने लिए समय निकालना तो सीख लिया है, लेकिन भगवान के लिए समय निकालना भूल गया है। यही कारण है कि उसके जीवन में संतोष का अभाव दिखाई देता है। जितनी अधिक भौतिक इच्छाएं बढ़ती हैं, उतनी ही अधिक अशांति भी बढ़ती है

