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दल अलग, चुनावी राह अलग, मगर मुस्कान एक: बयाना के वार्ड 3 की तस्वीर ने दिखाया लोकतंत्र का खूबसूरत चेहरा

भाजपा की सीप शर्मा, कांग्रेस की नीतू सैनी और निर्दलीय सानू सोनी व सरिता सैनी चुनावी मैदान में रहीं आमने-सामने, लेकिन एक साथ तस्वीर ने दिया सौहार्द और आपसी सम्मान का संदेश

बयाना। चुनाव में मुकाबला होना स्वाभाविक है। प्रत्याशी अलग होते हैं, राजनीतिक विचार अलग होते हैं, चुनाव चिह्न अलग होते हैं और समर्थक भी अपने-अपने उम्मीदवार की जीत के लिए पूरी ताकत लगाते हैं। लेकिन इन तमाम राजनीतिक मतभेदों के बीच यदि आपसी सम्मान और सामाजिक सौहार्द कायम रहे, तो यही लोकतंत्र की असली खूबसूरती कही जा सकती है।

बयाना नगरपालिका के वार्ड नंबर 3 से सामने आई चार महिला प्रत्याशियों की एक तस्वीर इसी लोकतांत्रिक भावना को अभिव्यक्त करती नजर आती है। वार्ड से सीप शर्मा भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी, नीतू सैनी कांग्रेस प्रत्याशी, जबकि सानू सोनी और सरिता सैनी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतरीं। चुनाव में चारों एक-दूसरे की प्रतिद्वंद्वी रहीं, लेकिन सामने आई तस्वीर में सभी एक साथ सहजता और मुस्कान के साथ खड़ी दिखाई दे रही हैं।

सामान्य नजर से देखें तो यह महज चार प्रत्याशियों की एक सामूहिक तस्वीर है, लेकिन लोकतंत्र के नजरिए से इसका संदेश कहीं बड़ा है—चुनावी मुकाबला अपनी जगह है, लेकिन व्यक्तिगत सम्मान और सामाजिक रिश्ते अपनी जगह।

अलग दल, अलग दावेदारी, लेकिन लोकतंत्र सबका

वार्ड नंबर 3 में चुनावी मुकाबले की खास बात यह रही कि यहां प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी अपनी दावेदारी पेश की। भाजपा और कांग्रेस की प्रत्याशियों के सामने दो निर्दलीय महिला प्रत्याशी भी मैदान में रहीं। प्रत्येक ने मतदाताओं के सामने अपनी बात रखी और अपने पक्ष में जनसमर्थन जुटाने का प्रयास किया।

लोकतंत्र में यही व्यवस्था नागरिकों को विकल्प देती है। प्रत्याशी जनता के सामने जाते हैं, अपनी प्राथमिकताएं बताते हैं और अंततः मतदाता तय करते हैं कि उन्हें अपना प्रतिनिधि किसे बनाना है।

लेकिन राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का अर्थ व्यक्तिगत कटुता नहीं होना चाहिए। इस दृष्टि से चारों प्रत्याशियों का एक साथ मुस्कुराते हुए तस्वीर खिंचवाना एक सकारात्मक संदेश देता है।

मतभेद हो सकते हैं, मनभेद जरूरी नहीं

चुनावी माहौल में कई बार आरोप-प्रत्यारोप और तीखी राजनीतिक बयानबाजी भी देखने को मिलती है। समर्थक भी अपने प्रत्याशी के पक्ष में उत्साह के साथ खड़े होते हैं। कभी-कभी यही राजनीतिक प्रतिस्पर्धा व्यक्तिगत संबंधों तक पहुंच जाती है।

ऐसे में वार्ड नंबर 3 की यह तस्वीर मानो यह संदेश देती है कि मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन उन्हें मनभेद में बदलना आवश्यक नहीं।

चुनाव कुछ दिनों की लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, जबकि सामाजिक संबंध वर्षों तक चलते हैं। मतदान समाप्त हो जाता है, परिणाम घोषित हो जाता है और किसी एक प्रत्याशी को जनादेश मिलता है, लेकिन उसके बाद सभी को उसी शहर, उसी वार्ड और उसी समाज में मिलकर रहना होता है।

जीत किसी एक की, लेकिन वार्ड सबका

स्थानीय निकाय चुनाव का संबंध सीधे आम नागरिकों की रोजमर्रा की जरूरतों से होता है। सड़क, नाली, पेयजल, सफाई, सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विषयों पर नगरपालिका और पार्षद की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

चुनाव में जीत किसी एक प्रत्याशी की होती है, लेकिन निर्वाचित होने के बाद पार्षद की जिम्मेदारी केवल अपने समर्थकों या उसे मतदान करने वाले नागरिकों तक सीमित नहीं रहती। जनप्रतिनिधि पूरे वार्ड का प्रतिनिधि होता है।

इसी तरह चुनाव हारने वाले प्रत्याशी भी उसी समाज का हिस्सा बने रहते हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव परिणाम किसी व्यक्ति के सामाजिक योगदान या सार्वजनिक जीवन में उसकी भूमिका का अंत नहीं होता।

यही कारण है कि चुनाव के दौरान कायम रहने वाला आपसी सम्मान चुनाव के बाद वार्ड के हित में सहयोग की मजबूत बुनियाद बन सकता है।

महिला भागीदारी की भी खास तस्वीर

वार्ड नंबर 3 की इस तस्वीर का एक महत्वपूर्ण पक्ष महिलाओं की राजनीतिक और लोकतांत्रिक भागीदारी भी है। चार महिला प्रत्याशियों का एक ही वार्ड से चुनावी मैदान में उतरना स्थानीय शासन में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को रेखांकित करता है।

नगर निकाय लोकतंत्र की उस महत्वपूर्ण कड़ी में शामिल हैं, जहां जनप्रतिनिधि नागरिकों की समस्याओं से सीधे रूबरू होते हैं। ऐसे में महिलाओं का चुनावी प्रक्रिया में प्रत्याशी के रूप में सामने आना केवल चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय निर्णय प्रक्रिया में उनकी बढ़ती भागीदारी को भी दर्शाता है।

भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय—अलग-अलग राजनीतिक पहचान के बावजूद चार महिलाओं का लोकतांत्रिक प्रक्रिया में एक साथ भाग लेना अपने आप में उल्लेखनीय है।

समर्थकों के लिए भी तस्वीर में छिपा संदेश

इस तस्वीर का संदेश केवल प्रत्याशियों तक सीमित नहीं है। चुनाव के दौरान अपने पसंदीदा उम्मीदवार के समर्थन में सक्रिय रहने वाले कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के लिए भी इसमें एक सीख देखी जा सकती है।

यदि एक ही पद के लिए आमने-सामने चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी एक साथ खड़े होकर मुस्कुरा सकते हैं, तो अलग-अलग प्रत्याशियों का समर्थन करने वाले नागरिक भी एक-दूसरे की राजनीतिक पसंद का सम्मान कर सकते हैं।

लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद का प्रत्याशी चुनने का अधिकार है। किसी की राजनीतिक पसंद अलग होने मात्र से सामाजिक संबंध खराब हों, यह स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा के अनुकूल नहीं माना जा सकता।

चुनाव खत्म होते हैं, रिश्ते नहीं

नगरपालिका चुनाव विशेष रूप से स्थानीय समाज से जुड़े होते हैं। यहां प्रत्याशी और मतदाता अक्सर एक-दूसरे को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं। कोई पड़ोसी होता है, कोई परिचित, कोई रिश्तेदार तो कोई वर्षों से उसी मोहल्ले और शहर का साथी।

ऐसे में यह बात और महत्वपूर्ण हो जाती है कि चुनावी प्रतिस्पर्धा सामाजिक दूरियों में परिवर्तित न हो।

सीप शर्मा, नीतू सैनी, सानू सोनी और सरिता सैनी की एक साथ खिंची यह तस्वीर इसी कारण सामान्य चुनावी तस्वीर से अलग दिखाई देती है। इसमें चार अलग-अलग दावेदार हैं, लेकिन एक ही फ्रेम में दिखाई देती मुस्कान लोकतंत्र के सौहार्दपूर्ण स्वरूप को सामने रखती है।

तस्वीर रहेगी याद, परिणाम बताएगा मतदाता का फैसला

चुनाव का अंतिम फैसला मतदाताओं के हाथ में होता है। किस प्रत्याशी को कितना समर्थन मिला और जनता ने किसे अपना प्रतिनिधि चुना, यह चुनाव परिणाम तय करता है। लेकिन परिणाम से इतर भी चुनाव कुछ ऐसी तस्वीरें छोड़ जाते हैं, जो लंबे समय तक याद रहती हैं।

बयाना नगरपालिका के वार्ड नंबर 3 की यह तस्वीर भी उन्हीं में शामिल की जा सकती है।

दल अलग हैं, राजनीतिक रास्ते अलग हैं और चुनावी दावेदारी भी अलग है, लेकिन लोकतंत्र सभी का साझा है।

शायद इस तस्वीर का सबसे सुंदर संदेश भी यही है—

“प्रतिद्वंद्वी हैं, दुश्मन नहीं; मुकाबला चुनाव तक, आपसी सम्मान हमेशा।”

फोटो परिचय: बयाना नगरपालिका वार्ड नंबर 3 की भाजपा प्रत्याशी सीप शर्मा, कांग्रेस प्रत्याशी नीतू सैनी तथा निर्दलीय प्रत्याशी सानू सोनी और सरिता सैनी एक साथ। चुनावी प्रतिस्पर्धा के बीच चारों की यह तस्वीर आपसी सम्मान और लोकतांत्रिक सौहार्द का सकारात्मक संदेश देती है।

संपादकीय टिप्पणी: यह आलेख किसी प्रत्याशी या राजनीतिक दल के समर्थन अथवा विरोध में नहीं है। “सनातनी संत रिपोर्टर” का उद्देश्य इस तस्वीर के माध्यम से चुनावी प्रतिस्पर्धा के बीच दिखाई दिए आपसी सम्मान, महिला भागीदारी और लोकतांत्रिक सौहार्द को रेखांकित करना है।

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