सड़क किनारे और रेलवे लाइन के आसपास स्लरी डालने की जानकारी; उड़ती धूल से वाहन चालक परेशान, रीको प्रबंधन ने बताया—डंपिंग यार्ड के लिए उपयुक्त जमीन की तलाश जारी
बयाना। पत्थर कटाई से निकलने वाली स्टोन स्लरी का खुले स्थानों पर जमाव धरती की ऊपरी परत, हरियाली और खेती के लिए चिंता का विषय बन रहा है। बयाना के रीको औद्योगिक क्षेत्र की पत्थर कटाई इकाइयों से निकलने वाले इस अपशिष्ट के बेतरतीब निस्तारण को लेकर स्थानीय निवासियों और किसानों में आक्रोश है। मौके से प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्लरी को ट्रैक्टर-टैंकर और अन्य वाहनों से बाहर ले जाकर सड़क किनारे तथा रेलवे लाइन के आसपास अलग-अलग स्थानों पर खाली किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्लरी सूखने के बाद उसके बारीक कण हवा और वाहनों की आवाजाही से उड़ते हैं। इससे राहगीरों और विशेष रूप से बाइक चालकों की आँखों में धूल पहुँचती है। वहीं किसानों को चिंता है कि यह सामग्री खेतों और पानी के बहाव वाले रास्तों तक पहुँची तो मिट्टी तथा फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
मिट्टी के छिद्र बंद होने और जलभराव का जोखिम
स्टोन स्लरी पत्थर कटाई के दौरान निकलने वाले बारीक चूर्ण और पानी का मिश्रण होती है। किसी स्थान पर बार-बार डाले जाने से इसकी परत प्राकृतिक मिट्टी को ढक सकती है। महीन कण मिट्टी के छिद्रों में जमा होने से पानी का जमीन में समाना प्रभावित हो सकता है। इससे सतह पर जलभराव और मिट्टी की प्राकृतिक संरचना में बदलाव की आशंका रहती है।
पत्थर प्रसंस्करण अपशिष्ट से संबंधित पर्यावरण दस्तावेजों में अनुचित निस्तारण से मिट्टी, पानी और हवा की गुणवत्ता प्रभावित होने की चिंता दर्ज है। हालांकि बयाना में जमा सामग्री से नुकसान की वास्तविक सीमा जानने के लिए स्थल निरीक्षण और नमूनों की जाँच आवश्यक है।
किसानों को फसल और उत्पादन प्रभावित होने की चिंता
स्लरी के खुले में निस्तारण को लेकर स्थानीय किसानों में भी नाराजगी है। खेतों तक यह सामग्री पहुँचने पर मिट्टी की ऊपरी परत ढक सकती है और जल निकासी प्रभावित हो सकती है। ऐसी परिस्थितियों में बीजों के अंकुरण, पौधों की जड़ों और फसलों की बढ़त पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
सूखी स्लरी की धूल फसलों की पत्तियों पर जमा होने से उनकी सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। इससे उत्पादन घटने और किसानों को आर्थिक नुकसान होने का जोखिम है। फिलहाल किसी खेत में नुकसान की मात्रा अथवा उपज में कमी का प्रमाणित आकलन उपलब्ध नहीं है। कृषि विभाग और प्रदूषण नियंत्रण मंडल की संयुक्त जाँच से ही स्थानीय स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
तस्वीरों में टैंकर और सड़क किनारे जमाव
उपलब्ध तस्वीरों में एक ओर ट्रैक्टर से जुड़ा टैंकर और उसके पीछे जमीन की ओर जाता पाइप दिखाई देता है। दूसरी ओर सड़क किनारे टैंकर वाहन खड़ा है और आसपास हल्के रंग की सामग्री का जमाव नजर आता है। निकट ही पेड़-पौधे और झाड़ियाँ मौजूद हैं।
ये दृश्य संबंधित स्थानों के निरीक्षण की आवश्यकता दर्शाते हैं। हालांकि केवल तस्वीरों के आधार पर सामग्री का स्रोत, उसकी संरचना, मात्रा अथवा किसी विशेष इकाई की जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती। इसके लिए वाहन की पहचान और अपशिष्ट परिवहन तथा निस्तारण के रिकॉर्ड की जाँच जरूरी है।
उड़ती धूल से बाइक चालकों को परेशानी
क्षेत्रवासियों के अनुसार, सड़क किनारे जमा स्लरी सूखने पर बारीक धूल बन जाती है। तेज हवा चलने और भारी वाहनों के गुजरने से इसके कण सड़क पर फैलते हैं। बाइक चालकों और राहगीरों की आँखों में धूल जाने से जलन तथा आगे देखने में परेशानी होती है।
चलते वाहन पर अचानक आँखों में कण पहुँचने से चालक का ध्यान भटक सकता है। ऐसे में सड़क सुरक्षा को लेकर भी चिंता है। हालांकि स्लरी के कारण किसी विशेष दुर्घटना की पुष्टि नहीं हुई है। सड़क किनारे जमा सामग्री को सुरक्षित ढंग से हटाने और नए निस्तारण पर निगरानी की आवश्यकता है।
हरियाली और जल निकासी पर भी संभावित असर
पेड़-पौधों के आसपास लगातार स्लरी जमा होने से जड़ों तक पानी पहुँचने की परिस्थितियाँ बदल सकती हैं। घास और छोटे पौधों के ऊपर मोटी परत जमने से उनकी बढ़त प्रभावित होने की आशंका है। इससे स्थानीय जीव-जंतुओं के प्राकृतिक परिवेश पर भी असर पड़ सकता है।
बारिश में स्लरी बहकर नालियों और निचले भूभाग तक पहुँच सकती है। रेलवे लाइन के आसपास बताए जा रहे स्थानों पर यह जाँचना जरूरी है कि सामग्री जल निकासी में बाधा तो नहीं बन रही। रेलवे संरचना को नुकसान होने का कोई तकनीकी प्रमाण उपलब्ध नहीं है; संबंधित विभाग के निरीक्षण से स्थिति स्पष्ट होगी।
नरेश वर्मा बोले—डंपिंग यार्ड के लिए प्रयास जारी
इस विषय में रीको के वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक नरेश वर्मा से बातचीत की गई। उन्होंने बताया कि स्लरी के निस्तारण के लिए डंपिंग यार्ड बनवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उनके अनुसार, अलापुरी में 0.67 हेक्टेयर जमीन आवंटित हुई थी, लेकिन वह इस कार्य के लिए उपयुक्त नहीं थी।
वर्मा ने बताया कि इसके बाद थाना डांग में भी जगह बताई गई थी, लेकिन वह भी उपयुक्त नहीं मिली। उन्होंने कहा कि निस्तारण के लिए उचित स्थान उपलब्ध कराने को लेकर मुख्यालय और संबंधित विभागों के साथ लगातार प्रयास जारी हैं।
स्थायी समाधान तक अंतरिम व्यवस्था जरूरी
रीको प्रबंधन का कहना है कि उपयुक्त जमीन तलाशने के प्रयास चल रहे हैं। लेकिन डंपिंग यार्ड बनने तक स्लरी कहाँ एकत्र होगी और उसका सुरक्षित निस्तारण कैसे होगा, यह प्रश्न बना हुआ है।
स्थानीय निवासियों और किसानों की नाराजगी को देखते हुए संबंधित विभागों को बताए गए स्थलों का निरीक्षण, मिट्टी और पानी की जाँच तथा अपशिष्ट परिवहन की निगरानी करनी चाहिए। पत्थर उद्योग स्थानीय रोजगार का महत्वपूर्ण आधार है। इसके साथ खेती, हरियाली और आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली निस्तारण व्यवस्था भी जरूरी है। अब क्षेत्रवासियों को ऐसी ठोस व्यवस्था की जरूरत है, जिससे खुले स्थानों पर स्लरी का जमाव रुके और दैनिक परेशानी से राहत मिले।

