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बयाना में 5 करोड़ की संदिग्ध दवाइयों के मामले में आगरा से तीन आरोपी गिरफ्तार, कुएं में कैसे पहुंची दवाओं की खेप?

खटनावली गांव के सूखे कुएं से मिले थे 274 कार्टन, जांच के तार आगरा तक पहुंचे; पुलिस रिमांड पर आरोपियों से पूछताछ जारी

बयाना (भरतपुर)। राजस्थान के भरतपुर जिले के बयाना क्षेत्र में करीब पांच करोड़ रुपये की संदिग्ध दवाइयों की बरामदगी के मामले में पुलिस ने आगरा से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। खटनावली गांव के एक सूखे कुएं से 274 कार्टन दवाइयां मिलने के बाद शुरू हुई जांच अब उत्तर प्रदेश के आगरा तक पहुंच गई है। पुलिस के अनुसार, दवाइयों की खेप आगरा से ट्रक में भरकर बयाना लाई गई थी। गिरफ्तार आरोपियों से यह पता लगाने के लिए पूछताछ की जा रही है कि दवाइयां कहां से लाई गई थीं, उन्हें कुएं में क्यों छिपाया गया और इस पूरे मामले में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।

सूखे कुएं से बरामद हुई थीं 274 कार्टन दवाइयां

मामले की शुरुआत सितंबर 2026 में हुई, जब बयाना तहसील के खटनावली गांव में एक खेत में बने सूखे कुएं से बड़ी मात्रा में दवाइयां बरामद हुईं। औषधि नियंत्रण विभाग को सूचना मिलने के बाद टीम ने स्थानीय पुलिस और ग्रामीणों की मदद से कुएं की तलाशी ली। तलाशी के दौरान दवाइयों के 274 कार्टन मिले, जिनकी अनुमानित बाजार कीमत करीब पांच करोड़ रुपये बताई गई।

बरामद दवाइयों में हृदय रोग, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और एलर्जी जैसी बीमारियों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल बताई गईं। इनमें लोसार-50, जानुमेट, केटोरोल-एम, एलेग्रा-एम और जालरा जैसी दवाइयों के नाम भी सामने आए। औषधि नियंत्रण विभाग ने दवाइयों के नमूने जांच के लिए भेजे और उनके निर्माण, बैच नंबर, एक्सपायरी डेट तथा सप्लाई चेन की पड़ताल शुरू की।

दवाइयां कुएं में छिपाने के पीछे क्या थी वजह?

इतनी बड़ी मात्रा में दवाइयों का एक सूखे कुएं में मिलना जांच का प्रमुख विषय बन गया। जांच एजेंसियों ने इस आशंका को ध्यान में रखते हुए पड़ताल शुरू की कि कहीं दवाइयों को अवैध तरीके से बाजार में बेचने की तैयारी तो नहीं थी। यह भी जांच की जा रही है कि कहीं एक्सपायरी डेट में बदलाव कर दवाइयों को दोबारा बाजार में उतारने की योजना तो नहीं बनाई गई थी।

हालांकि, दवाइयों को कुएं में छिपाने का वास्तविक उद्देश्य क्या था, इसका अंतिम खुलासा जांच और प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर ही हो सकेगा। फिलहाल दवाइयों की बरामदगी, उनके स्रोत और उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने वाले लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।

जांच में सामने आया आगरा का कनेक्शन

खटनावली गांव से दवाइयां बरामद होने के बाद राजस्थान के औषधि नियंत्रण विभाग ने उत्तर प्रदेश के संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी। इसके बाद आगरा के मलपुरा क्षेत्र में भी जांच की गई, जहां संबंधित मामले से जुड़ी दवाइयां बरामद होने की जानकारी सामने आई। इस संबंध में आगरा के मलपुरा थाने में भी मामला दर्ज किया गया।

दोनों स्थानों पर दवाइयां मिलने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया। एजेंसियां यह पता लगाने में जुट गईं कि क्या दोनों जगहों से बरामद दवाइयों के बीच सीधा संबंध है, उनकी आपूर्ति किसने की और उन्हें छिपाने या ठिकाने लगाने में किन लोगों की भूमिका रही।

आगरा जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लाए गए तीन आरोपी

इसी घटनाक्रम में सदर बयाना थाना पुलिस ने आगरा जेल में बंद तीन आरोपियों को इस प्रकरण में गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, 12 अक्टूबर 2026 को इकरार, शामिन उर्फ छोटू और सलुआ उर्फ मुकीम को प्रोडक्शन वारंट पर लाकर गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इकरार पुत्र नवाब, उम्र 30 वर्ष, निवासी सरोली रोड, रैना नगर धनौली, थाना मलपुरा, जिला आगरा; शामिन उर्फ छोटू पुत्र गुड्डू, उम्र 28 वर्ष, निवासी टेढ़ी बगिया, इस्लाम नगर, थाना ट्रांस यमुना, जिला आगरा; तथा सलुआ उर्फ मुकीम पुत्र हसन मोहम्मद, उम्र 26 वर्ष, निवासी टेढ़ी बगिया, इस्लाम नगर, थाना ट्रांस यमुना, जिला आगरा के रूप में हुई है।

पुलिस के मुताबिक, तीनों आरोपियों से पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ की जा रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि दवाइयों की खेप किसके निर्देश पर बयाना लाई गई और कुएं में कार्टन डालने की पूरी प्रक्रिया में कौन-कौन शामिल था।

दवा कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के घेरे में

इस मामले में दवाइयों की आपूर्ति, परिवहन और भंडारण से जुड़े लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों को यह पता लगाना है कि दवाइयों का वास्तविक स्रोत क्या था, उन्हें कहां रखा गया था और खटनावली गांव तक पहुंचाने की व्यवस्था किसने की थी।

मीडिया रिपोर्टों में दवा कारोबारी हिमांशु अग्रवाल और आशीष के फरार होने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, उनकी भूमिका और अन्य लोगों से जुड़े आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों के आधिकारिक निष्कर्षों से होनी बाकी है।

सदर बयाना थाने में दर्ज हुआ मामला

औषधि नियंत्रण अधिकारी भरतपुर कौमुदी सिंह की ओर से 30 सितंबर 2026 को दी गई शिकायत के आधार पर सदर बयाना थाने में मुकदमा संख्या 256/2026 दर्ज किया गया। पुलिस के उपलब्ध विवरण के अनुसार, मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 238, 271, 276, 277, 278 और 318(4) के तहत जांच की जा रही है।

पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार मीना के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बयाना रामगोपाल वसवाल के सुपरवीजन तथा वृत्ताधिकारी बयाना देवेन्द्र जाखड़ के नेतृत्व में कार्रवाई की गई। सदर थाना प्रभारी अवतार सिंह और उनकी टीम ने मामले की जांच करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।

पुलिस टीम की रही महत्वपूर्ण भूमिका

इस कार्रवाई में सदर थाना प्रभारी अवतार सिंह, हेड कांस्टेबल लाखन सिंह तथा कांस्टेबल विष्णु सिंह, संतराम, बलराम और हरिकिशन की भूमिका रही। पुलिस के अनुसार, मामले में आगे की जांच जारी है और दवाइयों की आपूर्ति से जुड़े अन्य तथ्यों का पता लगाया जा रहा है।

अब जांच के सामने हैं ये बड़े सवाल

करीब पांच करोड़ रुपये की दवाइयों का सूखे कुएं में मिलना कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। दवाइयां मूल रूप से कहां से आई थीं? क्या सभी दवाइयां नकली थीं या कुछ दवाइयां एक्सपायरी अवधि पार कर चुकी थीं? उन्हें कुएं में छिपाने का उद्देश्य क्या था? क्या दवाइयों को दोबारा बाजार में बेचने की तैयारी थी? और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं?

इन सवालों के जवाब पुलिस की पूछताछ, दवाइयों के नमूनों की प्रयोगशाला जांच और सप्लाई चेन से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद सामने आ सकेंगे। फिलहाल तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच आगे बढ़ रही है। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि और आरोपियों के दोष का निर्धारण न्यायालय द्वारा किया जाएगा।

स्रोत: भरतपुर पुलिस के उपलब्ध विवरण तथा मामले से संबंधित प्रकाशित समाचार रिपोर्टें।

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