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खुदा की इबादत में झुके सिर, सुरक्षा के लिए तैनात रहा जाब्ता

ईद की नमाज अदा कर मांगी मुल्क में अमन-चैन और भाईचारे की दुआ

राजस्थान बयाना। कस्बा सहित पूरे उपखंड क्षेत्र में गुरुवार को ईद उल अजहा (बकरीद) का पर्व धार्मिक आस्था, भाईचारे और उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही मुस्लिम समाज के लोगों में त्योहार को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया। लोगों ने नए वस्त्र पहनकर मस्जिदों और ईदगाहों का रुख किया, जहां अल्लाह की इबादत में हजारों सिर झुके और पूरे मुल्क में अमन-चैन, खुशहाली तथा भाईचारे की दुआ मांगी गई।

कस्बे के दमदमा रोड स्थित ईदगाह पर सुबह से ही लोगों की भीड़ उमड़ने लगी थी। नमाज से पहले ही ईदगाह परिसर और आसपास का क्षेत्र लोगों से भर गया। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी में खास उत्साह देखने को मिला। बच्चों ने रंग-बिरंगे कपड़े पहन रखे थे, जबकि युवाओं और बुजुर्गों ने एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद देकर त्योहार की खुशियां साझा कीं।

ईदगाह में मुस्लिम समाज की ओर से सामूहिक रूप से ईद की नमाज अदा की गई। नमाज के दौरान लोगों ने खुदा के सामने सिर झुकाकर देश और समाज में शांति, तरक्की और भाईचारे की दुआ मांगी। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर “ईद मुबारक” कहा और प्रेम व सद्भाव का संदेश दिया।

कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के जिला महासचिव असलम खान ने बताया कि इस मौके पर दिल्ली से आए मौलाना हामिद खान ने लोगों को संबोधित करते हुए इंसानियत, भाईचारे और आपसी सौहार्द का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हर इंसान को नेकी और ईमानदारी के रास्ते पर चलना चाहिए। सभी धर्मों और मजहबों का सम्मान करना ही सच्ची इंसानियत है। उन्होंने लोगों से अपील की कि त्योहारों को इस तरह मनाया जाए जिससे किसी भी समुदाय या व्यक्ति को परेशानी न हो।

कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के जिला महासचिव असलम खान ने बताया कि इस मौके पर दिल्ली से आए मौलाना हामिद खान ने लोगों को संबोधित करते हुए इंसानियत, भाईचारे और आपसी सौहार्द का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हर इंसान को नेकी और ईमानदारी के रास्ते पर चलना चाहिए। सभी धर्मों और मजहबों का सम्मान करना ही सच्ची इंसानियत है। उन्होंने लोगों से अपील की कि त्योहारों को इस तरह मनाया जाए जिससे किसी भी समुदाय या व्यक्ति को परेशानी न हो।

मौलाना ने अपने संबोधन में कहा कि ईद उल अजहा केवल कुर्बानी का पर्व नहीं बल्कि त्याग, सेवा और इंसानियत का संदेश देने वाला त्योहार है। यह पर्व हमें दूसरों की मदद करने, जरूरतमंदों का ख्याल रखने और समाज में प्रेम बढ़ाने की सीख देता है। उन्होंने युवाओं से शिक्षा और अच्छे संस्कारों को अपनाने का आह्वान भी किया।

ईद की नमाज के दौरान प्रशासन और पुलिस विभाग भी पूरी तरह मुस्तैद दिखाई दिया। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ईदगाह और प्रमुख स्थानों पर पुलिस जाब्ता तैनात रहा। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिसकर्मियों की विशेष निगरानी रही ताकि त्योहार शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हो सके।

नगरपालिका प्रशासन की ओर से ईदगाह परिसर में शीतल पेयजल की विशेष व्यवस्था की गई थी। भीषण गर्मी को देखते हुए लोगों के लिए पानी और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। नमाज अदा करने आए लोगों ने प्रशासन की व्यवस्थाओं की सराहना की।

त्योहार के दौरान महिलाओं और बच्चों में भी विशेष उत्साह दिखाई दिया। नमाज के बाद महिलाओं ने अपने परिजनों और परिचितों को ईद की बधाइयां दीं, जबकि बच्चों ने एक-दूसरे से मिलकर त्योहार की खुशियां मनाईं। कई स्थानों पर बच्चों ने ईदी मिलने पर खुशी जाहिर की और दिनभर उत्सव का माहौल बना रहा।

नमाज के बाद लोगों ने अपने घरों में पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लिया। सेवइयां, शीरखुर्मा और अन्य पकवानों की खुशबू घर-घर से आती रही। परिवारों और रिश्तेदारों के बीच मेल-मिलाप का दौर दिनभर चलता रहा। कई लोगों ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक भी खाने-पीने की सामग्री पहुंचाकर इंसानियत और सेवा की मिसाल पेश की।

ईद के मौके पर कस्बे में गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत तस्वीर भी देखने को मिली। हिन्दू समाज के लोगों ने भी अपने मुस्लिम भाइयों को गले मिलकर ईद की बधाइयां दीं। कई स्थानों पर विभिन्न समुदायों के लोगों ने मिलकर एक-दूसरे को मिठाई खिलाई और भाईचारे का संदेश दिया। इससे सामाजिक सद्भाव और एकता की भावना और मजबूत होती नजर आई।

कार्यक्रम के दौरान राशिद खान, अनवर खान, वकील खान, बच्चा खान, सुनहरी, कमरुद्दीन सहित मुस्लिम समाज के अनेक लोग मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में समाज में शांति, सद्भाव और आपसी प्रेम बनाए रखने की बात कही।

इसी प्रकार निकटवर्ती गांव कोठीखेड़ा में स्थित मस्जिद में भी ईद की नमाज अदा की गई। गांव में सुबह से ही त्योहार को लेकर उत्साह का माहौल बना हुआ था। नमाज के बाद लोगों ने देश में सुख-समृद्धि और भाईचारे की दुआ की। यहां भी हिन्दू और मुस्लिम समाज के लोगों ने मिलकर एक-दूसरे को ईद की शुभकामनाएं दीं। गांव में साम्प्रदायिक सौहार्द और सामाजिक एकता की मिसाल देखने को मिली।

ग्रामीणों ने कहा कि त्योहार केवल खुशी मनाने का अवसर नहीं होते, बल्कि समाज को जोड़ने और प्रेम बढ़ाने का माध्यम भी होते हैं। ईद जैसे पर्व आपसी दूरियों को मिटाकर लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने का काम करते हैं।

उपखंड क्षेत्र में ईद को लेकर बाजारों में भी रौनक दिखाई दी। कपड़ों, मिठाइयों और अन्य सामान की दुकानों पर लोगों की भीड़ लगी रही। युवाओं और बच्चों ने त्योहार के लिए खरीदारी की। कई दुकानदारों ने भी लोगों को ईद की शुभकामनाएं देते हुए आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया।

त्योहार के मद्देनजर प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी गई। पुलिस अधिकारियों ने लगातार क्षेत्र का भ्रमण कर स्थिति पर नजर बनाए रखी। हालांकि पूरे क्षेत्र में कहीं से भी किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली और पर्व शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।

ईद उल अजहा का यह पर्व एक बार फिर समाज को यह संदेश दे गया कि विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग जब मिल-जुलकर त्योहार मनाते हैं तो सामाजिक एकता और भाईचारा और अधिक मजबूत होता है। बयाना और आसपास के क्षेत्र में दिखाई दिया सौहार्दपूर्ण माहौल यही साबित करता है कि आपसी प्रेम, सम्मान और भाईचारा ही समाज की सबसे बड़ी ताकत है।

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