बयाना। कस्बे में बंदरों की बढ़ती समस्या अब लोगों के लिए परेशानी के साथ हादसों का कारण भी बनती दिखाई दे रही है। रेलवे स्टेशन से सटी देवी मंदिर कॉलोनी, वार्ड नंबर 30 में बंदरों से बचने के प्रयास के दौरान एक युवक के छत से नीचे गिरकर गंभीर रूप से घायल होने का मामला सामने आया है। परिजनों और स्थानीय लोगों के अनुसार हादसे में युवक के दोनों पैरों की एड़ियों में गंभीर फ्रैक्चर हुआ है। उसे बेहतर उपचार के लिए भरतपुर रेफर किया गया, जहां निजी अस्पताल में उसका उपचार जारी है।
जानकारी के अनुसार देवी मंदिर कॉलोनी निवासी मनोज छत पर मौजूद था। इसी दौरान वहां बंदरों का झुंड आ गया। परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदरों से खुद को बचाने के प्रयास के दौरान मनोज का संतुलन बिगड़ गया और वह छत से नीचे गिर गया। ऊंचाई से गिरने के कारण उसके दोनों पैरों में गंभीर चोट आई।
परिजन तत्काल लेकर पहुंचे डॉक्टर के पास
हादसे के बाद परिजन घायल मनोज को तत्काल उपचार के लिए स्थानीय निजी चिकित्सक के पास लेकर पहुंचे। परिजनों के मुताबिक वहां प्राथमिक जांच और एक्स-रे कराया गया। जांच के बाद दोनों पैरों की एड़ियों में गंभीर फ्रैक्चर की जानकारी दी गई।
चोट की गंभीरता को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद युवक को बेहतर चिकित्सा के लिए भरतपुर रेफर कर दिया गया।
परिजनों के अनुसार भरतपुर के एक निजी अस्पताल में चिकित्सकों ने जांच के बाद दोनों पैरों के ऑपरेशन की आवश्यकता बताई है। फिलहाल युवक अस्पताल में भर्ती है और उसका उपचार चल रहा है।
घटना के बाद कॉलोनीवासियों में नाराजगी
घटना के बाद देवी मंदिर कॉलोनी सहित आसपास के लोगों में बंदरों की समस्या को लेकर नाराजगी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से बंदरों का उपद्रव बना हुआ है। बंदर घरों की छतों और आसपास घूमते रहते हैं, जिससे खासकर बच्चों, बुजुर्गों और छतों पर जाने वाले लोगों में डर बना रहता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदरों की समस्या को केवल सामान्य परेशानी मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। जब बंदरों से बचने के प्रयास में कोई व्यक्ति गंभीर हादसे का शिकार हो जाए तो समस्या की गंभीरता और बढ़ जाती है।
वार्डवासियों ने नगर पालिका और संबंधित प्रशासन से इस समस्या का नियमानुसार स्थायी समाधान कराने की मांग की है।
लोगों की मांग—बंदरों की समस्या से जल्द मिले राहत
स्थानीय निवासियों का कहना है कि बंदरों के कारण कई बार लोगों को घरों की छतों और गलियों में परेशानी का सामना करना पड़ता है। लोगों ने मांग की है कि संबंधित नियमों और वन्यजीव संबंधी प्रावधानों का पालन करते हुए बंदरों को पकड़ने अथवा उनके प्रबंधन के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।
लोगों का कहना है कि किसी और बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
नगर पालिका अधिशासी अधिकारी बोले—आचार संहिता हटते ही लगाएंगे टेंडर
इस मामले में नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी से भी ‘सनातनी संत रिपोर्टर’ ने पक्ष लिया। अधिशासी अधिकारी के अनुसार वर्तमान में निकाय चुनाव को लेकर आचार संहिता प्रभावी है। आचार संहिता हटने के बाद बंदरों को पकड़वाने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
नगर पालिका की ओर से सामने आए इस पक्ष के बाद अब स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि आचार संहिता समाप्त होने के बाद बंदरों की समस्या के समाधान के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
हालांकि स्थानीय लोगों की चिंता यह है कि तब तक सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाए जाएंगे। उनका कहना है कि बंदरों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में लोगों को सावधानी बरतने के साथ प्रशासन की ओर से भी आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
शहर के दूसरे इलाकों की स्थिति पर भी ध्यान देने की जरूरत
देवी मंदिर कॉलोनी की यह घटना बंदरों की समस्या को लेकर एक बार फिर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करती है। यदि बयाना कस्बे के अन्य वार्डों में भी इसी तरह की समस्या बनी हुई है तो नगर पालिका के स्तर पर प्रभावित क्षेत्रों की जानकारी जुटाकर व्यापक कार्ययोजना तैयार किए जाने की आवश्यकता है।
विशेष रूप से घनी आबादी, स्कूलों, मंदिरों, बाजारों और आवासीय क्षेत्रों में बंदरों की अधिक मौजूदगी लोगों की सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय बन सकती है।
साथ ही नागरिकों को भी बंदरों को उकसाने, उनके बहुत करीब जाने अथवा उनसे बचने के दौरान घबराकर जोखिम उठाने से बचना चाहिए।
अब टेंडर प्रक्रिया पर रहेंगी लोगों की निगाहें
फिलहाल घायल युवक का भरतपुर में उपचार चल रहा है। दूसरी ओर घटना के बाद देवी मंदिर कॉलोनी के लोगों ने बंदरों की समस्या से जल्द राहत दिलाने की मांग तेज कर दी है।
नगर पालिका अधिशासी अधिकारी की ओर से आचार संहिता समाप्त होने के बाद बंदरों को पकड़वाने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई है। ऐसे में अब लोगों की निगाह इस बात पर रहेगी कि आचार संहिता समाप्त होने के बाद नगर पालिका कितनी जल्दी प्रक्रिया शुरू करती है और बंदरों की समस्या से प्रभावित क्षेत्रों को कब तक राहत मिलती है।
स्पष्टीकरण: युवक के बंदरों से बचने के प्रयास में छत से गिरने तथा चोटों की प्रकृति संबंधी विवरण परिजनों और स्थानीय स्तर से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। खबर में नगर पालिका अधिशासी अधिकारी का पक्ष भी शामिल किया गया है।

