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सरकारी अस्पताल का ये कैसा हाल? बेड के नीचे कुत्ता, टॉयलेट में गंदगी; बंसी पहाड़पुर CHC पर उठे सवाल

बंसी पहाड़पुर/भरतपुर। अस्पताल वह स्थान है जहां मरीज बीमारी से राहत और बेहतर उपचार की उम्मीद लेकर पहुंचता है। ऐसे में अस्पताल के वार्ड में मरीजों के बेड के नीचे कुत्ता सोता दिखाई दे, शौचालय में पीक जैसे निशान और गंदगी नजर आए तथा अस्पताल के विभिन्न हिस्सों में कचरा और सामान बिखरा मिले, तो स्वास्थ्य केंद्र की साफ-सफाई और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

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ऐसी ही तस्वीरें भरतपुर जिले के आदर्श सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) बंसी पहाड़पुर से सामने आई हैं। सनातनी संत रिपोर्टर द्वारा मौके पर दर्ज की गई तस्वीरों में अस्पताल की व्यवस्थाओं से जुड़ी कई स्थितियां दिखाई देती हैं। इन्हीं व्यवस्थाओं को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने भी नाराजगी जताते हुए स्वास्थ्य विभाग से सुधार की मांग की है।

वार्ड में बेड के नीचे सोता दिखाई दिया कुत्ता

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अस्पताल के वार्ड से सामने आई तस्वीर सबसे ज्यादा ध्यान खींचती है। मरीजों के लिए लगाए गए बेड के नीचे एक कुत्ता सोता हुआ साफ दिखाई दे रहा है।

अस्पताल के वार्ड जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी आवारा पशु का पहुंच जाना कई सवाल खड़े करता है। मरीज यहां उपचार के लिए भर्ती होते हैं और अस्पताल में स्वच्छता तथा संक्रमण नियंत्रण की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

ऐसे में सवाल उठता है कि कुत्ता वार्ड के अंदर कैसे पहुंचा? अस्पताल के वार्ड की निगरानी किस प्रकार की जा रही है? आवारा पशुओं को वार्ड में प्रवेश करने से रोकने की क्या व्यवस्था है?

हालांकि तस्वीर में कुत्ते का बेड के नीचे होना दिखाई देता है, लेकिन इसके कारण किसी मरीज को संक्रमण होने की पुष्टि नहीं हुई है। स्थानीय लोगों ने जरूर इस स्थिति को लेकर संक्रमण के संभावित खतरे की चिंता व्यक्त की है।

टॉयलेट में गंदगी और पीक जैसे निशान

अस्पताल के शौचालय क्षेत्र की तस्वीरें भी साफ-सफाई की स्थिति पर सवाल खड़े करती हैं। तस्वीरों में फर्श और आसपास के हिस्सों में गंदगी दिखाई देती है, जबकि कुछ स्थानों पर पान अथवा गुटखे की पीक जैसे निशान भी नजर आते हैं।

अस्पताल में स्वच्छ शौचालय मरीजों और उनके साथ आने वाले परिजनों के लिए बुनियादी आवश्यकता है। विशेष रूप से ऐसे स्वास्थ्य केंद्र में, जहां आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं, नियमित साफ-सफाई और निगरानी आवश्यक है।

यह भी महत्वपूर्ण है कि अस्पताल को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी केवल कर्मचारियों की नहीं है। अस्पताल आने वाले मरीजों और तीमारदारों को भी परिसर में गुटखा-पान थूकने या कचरा फैलाने से बचना चाहिए। लेकिन अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी भी है कि ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने और नियमित सफाई की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

वार्ड और परिसर में भी दिखी अव्यवस्था

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अस्पताल की अन्य तस्वीरों में कुछ स्थानों पर सामान अस्त-व्यस्त तथा कचरा बिखरा दिखाई देता है। वार्ड के आसपास की स्थिति को लेकर भी स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं।

जब किसी स्वास्थ्य केंद्र को “आदर्श सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र” के रूप में विकसित किया जाता है तो स्थानीय नागरिकों की अपेक्षाएं भी बढ़ जाती हैं। लोगों को उम्मीद होती है कि उन्हें साफ-सुथरा परिसर, व्यवस्थित वार्ड, चिकित्सकों की उपलब्धता और आवश्यक जांच सुविधाएं अपने क्षेत्र में ही मिलेंगी।

इन्हीं दिखाई दे रही व्यवस्थाओं को लेकर जब सनातनी संत रिपोर्टर ने स्थानीय ग्रामीणों से बातचीत की तो उन्होंने भी कई शिकायतें सामने रखीं।

ग्रामीणों ने कहा—PHC के समय व्यवस्थाएं थीं बेहतर

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स्थानीय ग्रामीण एवं राजपूत महासभा के अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह ने स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जाहिर की।

पुष्पेंद्र सिंह का कहना है कि जब यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के स्थान पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) संचालित था, उस समय व्यवस्थाएं अपेक्षाकृत बेहतर थीं। CHC बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होगा, लेकिन उनके अनुसार अब व्यवस्थाओं से जुड़ी शिकायतें लगातार सुनने को मिलती हैं।

उन्होंने चिकित्सकों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि क्षेत्र के मरीज बड़ी उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं, इसलिए यहां पर्याप्त चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध रहनी चाहिए।

ये पुष्पेंद्र सिंह द्वारा लगाए गए आरोप और उनका व्यक्तिगत पक्ष हैं। सनातनी संत रिपोर्टर इन सभी दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता।

देवेंद्र सिंह ने भी उठाए साफ-सफाई पर सवाल

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स्थानीय ग्रामीण देवेंद्र सिंह ने भी अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर कई आरोप लगाए। उन्होंने वार्ड में कुत्तों के पहुंचने और साफ-सफाई की स्थिति को लेकर चिंता जताई।

उनका कहना है कि मरीज पहले से बीमारी की अवस्था में अस्पताल पहुंचते हैं, ऐसे में वार्ड में साफ-सफाई और संक्रमण नियंत्रण की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए।

ग्रामीणों की शिकायतों के साथ अस्पताल में बेड के नीचे कुत्ता दिखाई देने वाली तस्वीर भी सामने है। हालांकि इससे किसी प्रकार का संक्रमण फैलने की पुष्टि इस समाचार में नहीं की जा रही है।

सोनोग्राफी सुविधा पर भी ग्रामीणों के सवाल

अस्पताल की साफ-सफाई के अलावा सोनोग्राफी सुविधा को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं।

स्वास्थ्य केंद्र में सोनोग्राफी सुविधा के लिए केंद्र स्थापित किया गया है। अस्पताल परिसर में लगे शिलापट्ट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसका उद्घाटन तत्कालीन बयाना विधायक अमर सिंह जाटव द्वारा किया गया था।

ग्रामीणों का आरोप है कि सोनोग्राफी की व्यवस्था होने के बावजूद संबंधित चिकित्सक अथवा विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

यह एक महत्वपूर्ण विषय है, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र में ही सोनोग्राफी जैसी जांच उपलब्ध होने से मरीजों को दूसरे शहर या बड़े अस्पताल तक जाने की आवश्यकता कम हो सकती है।

हालांकि सोनोग्राफी सेवा वास्तव में कितने समय से प्रभावित है, संबंधित विशेषज्ञ का पद रिक्त है अथवा सेवा उपलब्ध नहीं होने के पीछे कोई अन्य तकनीकी या प्रशासनिक कारण है—इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी स्वास्थ्य विभाग से होना बाकी है।

इसलिए सोनोग्राफी को लेकर कही गई बातों को फिलहाल ग्रामीणों की शिकायत के रूप में ही प्रस्तुत किया जा रहा है।

चिकित्सा अधिकारी गौरव कपूर से मांगा जवाब

मामले में स्वास्थ्य विभाग का पक्ष जानने के लिए सनातनी संत रिपोर्टर ने भरतपुर के चिकित्सा अधिकारी गौरव कपूर से संपर्क किया।

उन्हें अस्पताल की व्यवस्थाओं, सामने आई तस्वीरों और ग्रामीणों द्वारा की गई शिकायतों के बारे में बताया गया।

बातचीत के दौरान उन्होंने संबंधित खबर और उपलब्ध सामग्री उन्हें भेजने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि सामग्री देखने के बाद ही वह मामले पर प्रतिक्रिया दे पाएंगे।

समाचार तैयार किए जाने तक उनका विस्तृत पक्ष प्राप्त नहीं हुआ था। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

सवाल किसी व्यक्ति का नहीं, स्वास्थ्य व्यवस्था का

इस पूरे मामले में उद्देश्य किसी चिकित्सक, कर्मचारी अथवा अधिकारी को बिना जांच दोषी ठहराना नहीं है। सवाल उस सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का है, जिस पर आसपास के हजारों ग्रामीण अपनी चिकित्सा जरूरतों के लिए निर्भर रहते हैं।

सामने आई तस्वीरों के बाद कुछ सवाल स्वाभाविक हैं—वार्ड में बेड के नीचे कुत्ता कैसे पहुंचा? शौचालय और वार्ड की नियमित सफाई तथा निगरानी किस प्रकार हो रही है? अस्पताल में चिकित्सकों की वर्तमान उपलब्धता क्या है? सोनोग्राफी सुविधा की वास्तविक स्थिति क्या है?

ग्रामीणों ने अपनी शिकायतें सामने रख दी हैं और अस्पताल की कुछ स्थितियां कैमरे में भी दर्ज हुई हैं। अब स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक जवाब और कार्रवाई का इंतजार है।

यदि विभाग इन शिकायतों की जांच कर व्यवस्थाओं में आवश्यक सुधार करता है तो इसका सीधा लाभ बंसी पहाड़पुर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को मिलेगा।

नोट: इस समाचार में तस्वीरों में स्पष्ट दिखाई देने वाली परिस्थितियों को उसी रूप में प्रस्तुत किया गया है। ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोप उनके कथन हैं। जिन दावों की स्वतंत्र अथवा विभागीय पुष्टि नहीं हुई है, उन्हें पुष्ट तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है। संबंधित अधिकारी/विभाग का विस्तृत पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी उचित स्थान दिया जाएगा।

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