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राजस्थान की राजनीति में सादगी, ईमानदारी और जनसेवा का जब भी जिक्र होगा, स्वर्गीय श्री बृजेन्द्र सिंह सूपा जी का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाएगा। बयाना की माटी से निकलकर प्रदेश की राजनीति में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले सूपा जी का जीवन संघर्ष और सिद्धांतों की एक खुली किताब है।

आइए जानते हैं उनके सरपंच से राज्य मंत्री बनने तक के सफर और उस ऐतिहासिक वीरता की कहानी, जिसके लिए देश उन्हें हमेशा याद रखेगा।

प्रारंभिक जीवन और संघर्ष

श्री बृजेन्द्र सिंह सूपा जी का जन्म 1 मई 1953 को भरतपुर जिले के ग्राम सूपा (बयाना) में हुआ था। उनके पिता श्री कुंवर सिंह जी और माता श्रीमती रुक्मिणी देवी जी थीं। नियति ने उनकी परीक्षा बचपन में ही लेनी शुरू कर दी थी; मात्र 5 वर्ष की आयु में उनके पिता का देहांत हो गया। लेकिन अपनी माता के दिए हुए उच्च संस्कारों के कारण उन्होंने मुश्किलों को अपनी ताकत बनाया और समाज सेवा की राह चुनी।

सरपंच से विधानसभा तक का सफर

सूपा जी का राजनीतिक करियर ज़मीनी स्तर से शुरू हुआ। उनके सफर के कुछ मुख्य पड़ाव इस प्रकार हैं:

1980: ग्राम पंचायत पालीडांग के सरपंच बनकर जनसेवा की शुरुआत की।

विधानसभा: बयाना-बसेड़ी क्षेत्र की जनता ने उन पर अटूट भरोसा जताया, जिसके चलते वे 8वीं, 10वीं और 11वीं विधानसभा में कुल 3 बार विधायक चुने गए।

जिला प्रमुख: वर्ष 1989-90 में उन्होंने भरतपुर के जिला-प्रमुख के रूप में जिले के विकास कार्यों को गति दी।

राज्य मंत्री का दर्जा: उनकी निष्ठा को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने वर्ष 2012-13 में उन्हें पशुधन विकास बोर्ड का अध्यक्ष (राज्य मंत्री) नियुक्त किया।

राजघाट की वीरता: जब आतंकियों से टकराए सूपा जी

सूपा जी के जीवन की सबसे साहसी घटना 2 अक्टूबर 1986 की है। दिल्ली के राजघाट पर तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी पर हुए आतंकी हमले के दौरान सूपा जी वहां मौजूद थे। उस हमले में वे घायल हुए, लेकिन अपनी परवाह किए बिना उन्होंने आतंकी की पहचान की और उसे सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी इस बहादुरी ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।

किसानों और मजदूरों के मसीहा

वे न केवल एक राजनेता थे, बल्कि किसानों और मजदूरों के सच्चे हितैषी भी थे। किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव के रूप में उन्होंने हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज को बुलंद किया। शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीब कल्याण उनके जीवन के मुख्य उद्देश्य रहे।

एक युग का अंत

सिद्धांतों की राजनीति करने वाले श्री बृजेन्द्र सिंह सूपा जी 11 अक्टूबर 2019 को देवलोक गमन कर गए। आज वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा किए गए विकास कार्य और उनकी स्वच्छ छवि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

By Sanatani Sant Reporter

I am an exserviceman presently sadhak Bageshwar Balaji. Presently Working as a religious and social news reporter .

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