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ऐसे माता-पिता है जो अपने ही पुत्र की मृत्यु की कामना करेंगे? क्या यह संभव है ? क्या इतना कठोर हृदय किसी माता-पिता का हो सकता है? क्या इस देश का कानून भी उन माता-पिता की बात मान सकता है ?
देश के इतिहास में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है अपने ही पुत्र की मृत्यु मांगने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे माता-पिता और कोर्ट ने कर दी उनकी पूरी इच्छा
जय हिंद वंदे मातरम जय श्री राम साथियों में सुरेंद्र फौजी सनातनी संत रिपोर्टर आज आपको देश में चर्चित हरीश राणा की खबर सुनाने जा रहा हूं
यह खबर आपको थोड़ा विचलित तो करेगी लेकिन यह सत्य है और मजबूरी भी उन माता-पिता की जो अपने पुत्र की मृत्यु की कामना कर रहे हैं |
सांसों की खामोश रिहाई देश में पहली बार इच्छा मृत्यु की इजाजत
भारत के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इच्छा मृत्यु की अनुमति दी है
कोर्ट ने 13 साल से ज्यादा समय से कोमा में 32 साल के हरीश राणा को लाइफ सपोर्ट यानी जीवन रक्षक मशीन हटाने की अनुमति दे दी है |
जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने इस मामले पर फैसला सुनाया | सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पैसिव युथेनिशिया पर व्यापक कानून बनाने पर विचार करने को भी कहा |
उधर कोर्ट ने दिल्ली एम्स को भी यह निर्देश दिया की लाइफ सपोर्ट हटाने के लिए खास योजना तैयार की जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके की पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज की गरिमा और सम्मान बना रहे |
हरीश राणा के पिता अशोक राणा ने कहा मैं बेटे का हत्यारा नहीं बनना चाहता, लेकिन उसे इस नर्क जैसी जिंदगी में तड़पते हुए भी नहीं देख सकता | मैंन दिल्ली का मकान बेचकर बेटे का इलाज कराया अब और इलाज करने की आर्थिक क्षमता नहीं रही उम्र ढल रही है अब हम बूढ़े हो रहे हैं हमारे बाद उसका क्या होगा उसे केगरिमा साथ जाने का हक मिलना चाहिए उसके अंग दूसरों को दान कर दें |
शायद आपकी आंखों में आंसू झलक आए होंगे क्या गुजरी होगी जब उन्होंने अपने ही पुत्र की मृत्यु की कामना की
कौन है हरीश राणा लिए जानते हैं
हरीश राणा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले हैं वर्ष 2013 में वह पंजाब यूनिवर्सिटी की पढ़ाई कर रहे थे | उसे समय वह चंडीगढ़ में एक पेइंग गेस्ट हॉस्टल में रहते थे | इसी दौरान एक हादसे में वह हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए इस दुर्घटना में उन्हें गंभीर सर की चोट ब्रेन इंजरी आई और उनकी स्थिति बेहद गंभीर हो गई |
दुर्घटना के बाद से हरीश राणा की हालत में कभी सुधर नहीं हो सका चिकित्सकों के अनुसार वह पिछले 13 वर्षों से परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट यानी कोमा में है | इसका मतलब है कि व्यक्ति जीवित तो रहता है लेकिन वह अपनी इच्छा से शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित नहीं कर सकता | और वह पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हो जाता है |
13 साल से मशीनों के सहारे जीवन
मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार हरीश राणा 100% विकलांगता और क्वाद्रीप्लेजिया से पीड़ित हैं |

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भगवान ऐसा किसी के साथ न करें साथियों यह खबर बेहद दुखद है हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि हरीश राणा की आत्मा को ईश्वर शांति दे जय हिंद जय सियाराम

By Sanatani Sant Reporter

I am an exserviceman presently sadhak Bageshwar Balaji. Presently Working as a religious and social news reporter .

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