बांगर्रा में दिनभर मेले की रही रौनक, शाम होते ही अखाड़े में गूंजे पहलवानों के दांव-पेच; राजस्थान और उत्तर प्रदेश के पहलवानों ने दिखाया दमखम
बयाना/गढ़ी बाजना, 14 सितंबर। गढ़ी बाजना थाना क्षेत्र के बांगर्रा गांव स्थित प्रसिद्ध फकीरा बाबा के ताल पर आयोजित मेले में ग्रामीणों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। दिनभर मेले में लोगों की चहल-पहल बनी रही। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने मेले का आनंद लिया और खरीदारी की। वहीं शाम होते ही मेले का आकर्षण ताल के पास सजाए गए अखाड़े की ओर केंद्रित हो गया, जहां आयोजित दंगल में राजस्थान और उत्तर प्रदेश से आए पहलवानों ने अपने दांव-पेच और दमखम का प्रदर्शन किया।
दंगल में छोटी इनामी कुश्तियों से शुरू हुआ मुकाबलों का सिलसिला धीरे-धीरे बड़ी इनामी कुश्तियों तक पहुंचा। हर मुकाबले के साथ दर्शकों का उत्साह बढ़ता गया। दंगल की सबसे बड़ी और आखिरी कुश्ती 11 हजार रुपये की रही। इसमें उत्तर प्रदेश के रसीलपुर के हरेंद्र पहलवान और अकोला के इरफान पहलवान आमने-सामने उतरे। रोमांचक मुकाबले के बाद हरेंद्र पहलवान ने बाजी मारकर दंगल की आखिरी कुश्ती अपने नाम की।
दिनभर मेले में रही ग्रामीणों की चहल-पहल

फकीरा बाबा के ताल पर आयोजित मेले को लेकर सुबह से ही ग्रामीणों में उत्साह देखने को मिला। बांगर्रा के साथ आसपास के गांवों से लोग मेले में पहुंचते रहे। ग्रामीणों ने मेले में लगी दुकानों पर खरीदारी की, वहीं बच्चों और युवाओं ने मनोरंजन का आनंद लिया।
दिन चढ़ने के साथ मेले में लोगों की संख्या बढ़ती गई। परिवारों के साथ पहुंचे ग्रामीणों ने मेले का आनंद लिया। लोगों की आवाजाही और खरीदारी के कारण दिनभर मेला परिसर में रौनक बनी रही।
ग्रामीण क्षेत्रों में लगने वाले परंपरागत मेलों में दंगल हमेशा से लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा है। बांगर्रा में आयोजित इस मेले में भी शाम का समय आते-आते लोगों का ध्यान अखाड़े की तरफ बढ़ने लगा। पहलवानों के मुकाबले शुरू होने से पहले ही बड़ी संख्या में दर्शक अखाड़े के चारों ओर जमा हो गए।
अखाड़े में उतरे राजस्थान और उत्तर प्रदेश के पहलवान
दंगल शुरू होने के बाद एक के बाद एक पहलवान अखाड़े में उतरे। राजस्थान के स्थानीय और आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे पहलवानों के साथ उत्तर प्रदेश से आए पहलवानों ने भी अपनी कुश्ती कला का प्रदर्शन किया।
मुकाबलों के दौरान पहलवानों ने प्रतिद्वंद्वी को चित करने के लिए कई तरह के दांव-पेच आजमाए। कभी एक पहलवान मुकाबले में मजबूत स्थिति में दिखाई देता तो अगले ही पल दूसरा पहलवान दांव पलटने का प्रयास करता। ऐसे रोमांचक क्षणों पर दर्शकों की तालियां और उत्साहवर्धन अखाड़े के माहौल को और जोशीला बनाते रहे।
दर्शक अपने पसंदीदा पहलवान का हौसला बढ़ाते दिखाई दिए। जैसे-जैसे बड़ी इनामी राशि की कुश्तियों का समय आया, अखाड़े के आसपास लोगों की उत्सुकता भी बढ़ती चली गई।
500 रुपये से 11 हजार रुपये तक की हुईं कुश्तियां
दंगल में अलग-अलग इनामी राशि की कई कुश्तियां आयोजित की गईं। इनमें 500 रुपये, 1100 रुपये, 2100 रुपये, 3100 रुपये, 5100 रुपये और 7100 रुपये की कुश्तियां शामिल रहीं।
इन मुकाबलों के बाद सभी की निगाह दंगल की सबसे बड़ी और अंतिम कुश्ती पर टिक गई। आखिरी कुश्ती के लिए 11 हजार रुपये की इनामी राशि निर्धारित की गई थी। इस मुकाबले को देखने के लिए अखाड़े के चारों तरफ बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।
छोटी कुश्तियों से शुरू हुआ दंगल जब अंतिम मुकाबले तक पहुंचा तो दर्शकों में खासा उत्साह दिखाई दिया। हर कोई यह जानने को उत्सुक था कि दंगल की सबसे बड़ी कुश्ती कौन सा पहलवान अपने नाम करेगा।
हरेंद्र और इरफान के बीच हुई आखिरी कुश्ती
दंगल का सबसे चर्चित मुकाबला उत्तर प्रदेश के रसीलपुर के हरेंद्र पहलवान और अकोला के इरफान पहलवान के बीच हुआ। दोनों पहलवानों के अखाड़े में उतरते ही दर्शकों की निगाहें मुकाबले पर टिक गईं।
शुरुआत से ही दोनों पहलवान एक-दूसरे पर बढ़त बनाने की कोशिश करते दिखाई दिए। दोनों ने प्रतिद्वंद्वी को पटखनी देने के लिए कई दांव आजमाए। मुकाबला काफी देर तक रोमांचक बना रहा और दोनों पहलवानों ने अपना दमखम दिखाया।
आखिरकार हरेंद्र पहलवान ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मुकाबले में बाजी मार ली। उनकी जीत के साथ ही अखाड़े में मौजूद समर्थकों और दर्शकों ने तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया। 11 हजार रुपये की यह अंतिम कुश्ती दंगल का मुख्य आकर्षण बन गई।
तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा अखाड़ा
दंगल के दौरान दर्शकों का उत्साह भी देखने लायक रहा। पहलवानों के अच्छे दांव पर दर्शक तालियां बजाते और आवाज लगाकर उनका हौसला बढ़ाते रहे। कई मुकाबले ऐसे रहे जिनमें पहलवानों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली।
देर शाम तक अखाड़े के आसपास लोगों की भीड़ बनी रही। दिन में जहां मेले की दुकानें और मनोरंजन लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे, वहीं शाम को कुश्ती के मुकाबलों ने पूरे आयोजन में अलग ही उत्साह भर दिया।
आयोजन समिति के सदस्यों ने संभाली व्यवस्था
मेले और दंगल को व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने में आयोजन समिति के सदस्यों ने जिम्मेदारी संभाली। आयोजन से जुड़े निर्वाण सिंह, साहब सिंह, सरपंच अमर सिंह, प्रताप सिंह, नरसिंह, रणबीर, सीताराम, राजेंद्र, शिववो सिंह, सुरेश, अतर सिंह, लजाराम, दीनदयाल ठेकेदार, बच्चू सिंह और गुमान सिंह सहित अन्य लोगों ने व्यवस्थाओं में सहयोग किया।
दंगल में पहलवानों के मुकाबलों को नियमानुसार संपन्न कराने के लिए रेफरियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वीरो पहलवान, पहलाद, नब्बो, रामप्रसाद, रामदयाल, पोसवेदर, विष्णु, सागर सिंह और अमर सिंह समंदर सहित अन्य लोगों ने रेफरी की भूमिका निभाई।
आयोजन समिति से जुड़े लोगों और ग्रामीणों के सहयोग से मेला एवं दंगल देर शाम तक चलता रहा।
ग्रामीण मेलों की परंपरा में दंगल बना आकर्षण
ग्रामीण अंचल में आयोजित होने वाले मेलों में कुश्ती और दंगल लंबे समय से लोगों के मनोरंजन और आपसी मेल-मिलाप का माध्यम रहे हैं। बांगर्रा के फकीरा बाबा ताल पर आयोजित मेले में भी यही तस्वीर देखने को मिली। एक ओर मेले में परिवारों और बच्चों की चहल-पहल रही तो दूसरी ओर अखाड़े में पहलवानों के दांव-पेच देखने के लिए युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक की भीड़ जुटी।
दिनभर चली मेले की रौनक और शाम को आयोजित दंगल ने आयोजन को खास बना दिया। अंतिम मुकाबले में हरेंद्र पहलवान की जीत के साथ दंगल का समापन हुआ। इसके बाद भी काफी देर तक ग्रामीणों के बीच आखिरी कुश्ती और पहलवानों के प्रदर्शन की चर्चा होती रही
