स्वतंत्र एवं निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए सहयोग करें 🙏 • आज की ताज़ा बड़ी खबरें लगातार अपडेट हो रही हैं • राजस्थान और राष्ट्रीय समाचार उपलब्ध हैं . सनातन धर्म से जुड़ी हर खबर पर नजर रखता है सनातनी संत रिपोर्टर

उज्जैन (मध्य प्रदेश)। सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों के बीच धर्मनगरी उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण से जुड़ा एक मामला इन दिनों श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। शहर के सती गेट क्षेत्र में स्थित प्राचीन ‘खड़े हनुमान’ मंदिर की प्रतिमा को सड़क चौड़ीकरण के चलते स्थानांतरित करने की कोशिश की गई, लेकिन कई प्रयासों के बावजूद प्रतिमा को हटाया नहीं जा सका। इसके बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसे हनुमानजी की महिमा और दैवीय संकेत के रूप में देख रहे हैं।

सिंहस्थ 2028 को लेकर चल रहा सड़क चौड़ीकरण

उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ को लेकर शहर में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की तैयारियां चल रही हैं। इसी क्रम में कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक सड़क को चौड़ा करने का कार्य किया जा रहा है।

इसी मार्ग के सती गेट क्षेत्र में खड़े हनुमानजी का प्राचीन मंदिर स्थित है। सड़क चौड़ीकरण के कारण मंदिर और प्रतिमा को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई।

मंदिर का ढांचा हटाया, प्रतिमा बनी चुनौती

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सितंबर के पहले सप्ताह में नगर निगम की कार्रवाई के दौरान मंदिर के आसपास के निर्माण को हटाने का काम किया गया। इसके बाद हनुमानजी की प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने का प्रयास शुरू हुआ।

बताया जा रहा है कि करीब आठ फीट ऊंची खड़े हनुमानजी की प्रतिमा को स्थानांतरित करने के लिए कई प्रयास किए गए, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हट सकी।

यही घटना अब पूरे मामले का सबसे चर्चित पहलू बन गई है।

श्रद्धालुओं ने माना दैवीय संकेत

प्रतिमा को हटाने के प्रयास सफल नहीं होने की जानकारी फैलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं में इस घटना को लेकर उत्सुकता बढ़ गई। कई भक्त इसे बजरंगबली की इच्छा और दैवीय संकेत के रूप में देख रहे हैं।

श्रद्धालुओं की आस्था है कि यदि बार-बार प्रयास के बावजूद प्रतिमा अपने स्थान से नहीं हट रही है तो हनुमानजी स्वयं इसी स्थान पर विराजमान रहना चाहते हैं।

हालांकि, दैवीय संकेत या चमत्कार होने की बात श्रद्धालुओं की धार्मिक मान्यता और आस्था है। इसे वैज्ञानिक या प्रशासनिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।

आखिर क्यों नहीं हिल रही प्रतिमा?

यह भी संभव है कि प्रतिमा की संरचना जमीन के भीतर अपेक्षा से अधिक गहराई तक हो अथवा उसका आधार काफी मजबूत हो। प्रतिमा की वास्तविक संरचना और जमीन के नीचे उसकी स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही तकनीकी कारणों के बारे में निश्चित रूप से कहा जा सकेगा।

इसीलिए पत्रकारिता की दृष्टि से यह कहना अधिक उचित है कि कई प्रयासों के बावजूद प्रतिमा को स्थानांतरित नहीं किया जा सका, जबकि श्रद्धालु इसे दैवीय संकेत मान रहे हैं।

प्रतिमा की उम्र को लेकर भी चर्चा

खड़े हनुमानजी की प्रतिमा और मंदिर की प्राचीनता को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं। स्थानीय स्तर पर इसे करीब 170 वर्ष पुराना और 1857 के आसपास के दौर से जुड़ा बताया जाता रहा है।

वहीं कुछ रिपोर्टों में प्रतिमा के इससे भी अधिक प्राचीन होने की संभावना जताई गई है। इसलिए प्रतिमा को निश्चित रूप से ‘170 वर्ष पुरानी’ बताने के बजाय ‘स्थानीय मान्यता के अनुसार करीब 170 वर्ष पुरानी’ लिखना अधिक सुरक्षित है।

प्रतिमा की वास्तविक आयु का निर्धारण विशेषज्ञ या पुरातात्विक जांच के बाद ही अधिक विश्वसनीय तरीके से किया जा सकता है।

सिंहस्थ से पहले बदल रहा उज्जैन

सिंहस्थ महाकुंभ दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल है। वर्ष 2028 में उज्जैन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और साधु-संतों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए शहर में सड़क, यातायात और अन्य बुनियादी व्यवस्थाओं पर काम किया जा रहा है।

लेकिन विकास कार्यों के बीच आने वाले प्राचीन धार्मिक स्थलों को लेकर प्रशासन के सामने आस्था और आधारभूत विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी रहती है।

सती गेट के खड़े हनुमानजी का मामला भी अब इसी कारण लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

आस्था के केंद्र बने ‘खड़े हनुमान’

प्रतिमा को हटाने के प्रयास सफल नहीं होने के बाद श्रद्धालुओं में खड़े हनुमानजी के प्रति आस्था और उत्सुकता और बढ़ी है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना से संबंधित तस्वीरें और वीडियो साझा किए जा रहे हैं।

भक्त इसे बजरंगबली की महिमा से जोड़ रहे हैं, जबकि प्रशासनिक और तकनीकी दृष्टि से प्रतिमा की संरचना को समझने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान खड़े हनुमानजी की प्रतिमा को स्थानांतरित करना आसान साबित नहीं हुआ। आगे प्रशासन प्रतिमा और सड़क चौड़ीकरण को लेकर क्या निर्णय करता है, इस पर स्थानीय श्रद्धालुओं की निगाहें बनी हुई हैं।

डिस्क्लेमर: इस समाचार में ‘दैवीय संकेत’ अथवा ‘चमत्कार’ संबंधी उल्लेख श्रद्धालुओं की आस्था और मान्यता के संदर्भ में हैं। Sanatani Sant Reporter इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं करता।

By Sanatani Sant Reporter

I am an exserviceman presently sadhak Bageshwar Balaji. Presently Working as a religious and social news reporter .

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed