भरतपुर/बयाना। (सनातनी संत रिपोर्टर)
कृषि पर्यवेक्षक संयुक्त समन्वय समिति, राजस्थान के बैनर तले कृषि विभाग के कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर सरकार के समक्ष मांग-पत्र प्रस्तुत किया है। समिति द्वारा जारी मांग-पत्र में वेतन विसंगतियों को दूर करने, पदों का पुनर्गठन करने, पदोन्नति के अवसर बढ़ाने तथा विभागीय सुविधाओं में सुधार करने सहित कुल 11 प्रमुख मांगें रखी गई हैं। मांग-पत्र पर प्रदेशभर के कृषि पर्यवेक्षकों, वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षकों एवं सहायक कृषि अधिकारियों के हस्ताक्षर भी किए गए हैं।
समिति का कहना है कि कृषि विभाग किसानों और कृषि विकास से जुड़े कार्यों की रीढ़ है, लेकिन विभागीय कर्मचारियों की कई समस्याएं वर्षों से लंबित हैं। ऐसे में सरकार को कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र समाधान करना चाहिए।
वेतन विसंगति दूर करने की प्रमुख मांग

मांग-पत्र में सबसे प्रमुख मांग सातवें वेतन आयोग के तहत उत्पन्न वेतन विसंगतियों को दूर करने की रखी गई है। समिति ने मांग की है कि पे-ग्रेड की तीन लेवल एल-5, एल-6 और एल-7 को एक करके वेतन स्तर 9840 किया जाए। इसके साथ ही पे-ग्रेड 2800 को दो लेवल एल-8 और एल-9 को भी एकीकृत करने की मांग की गई है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में समान प्रकृति के कार्य करने वाले कर्मचारियों के बीच वेतन संबंधी असमानता बनी हुई है, जिससे असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
पंचायत स्तर पर पद सृजन की मांग
समिति ने मांग-पत्र में प्रत्येक ग्राम पंचायत पर कृषि पर्यवेक्षक का पद स्वीकृत करने की मांग की है। साथ ही वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक के पदों का सृजन वर्तमान पदों के अनुपात में करने की बात कही गई है। समिति का मानना है कि पंचायत स्तर पर कृषि विभाग की मजबूत उपस्थिति किसानों को योजनाओं का लाभ पहुंचाने और तकनीकी सलाह उपलब्ध कराने में सहायक होगीइसके
अलावा कृषि पर्यवेक्षक, वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक और सहायक कृषि अधिकारी के पदों का अनुपात 4:1 रखने की मांग भी की गई है, जिससे पदोन्नति और कार्य विभाजन में संतुलन स्थापित हो सके।
उद्यान विभाग में नए पदों की मांग
मांग-पत्र में उद्यान विभाग के लिए भी पद सृजन की मांग रखी गई है। समिति ने प्रत्येक पंचायत समिति स्तर पर दो सहायक कृषि अधिकारी तथा आठ-आठ कृषि पर्यवेक्षक एवं वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक के पद स्वीकृत करने का प्रस्ताव रखा है। कर्मचारियों का कहना है कि उद्यानिकी गतिविधियों के विस्तार के साथ विभाग में मानव संसाधन की आवश्यकता भी बढ़ी है, जिसे ध्यान में रखते हुए नए पदों का सृजन आवश्यक है।
जिला और राज्य स्तर पर पद बढ़ाने की मांग
समिति ने मांग की है कि राज्य के सभी सहायक निदेशक कार्यालयों में प्रत्येक कृषि अधिकारी के साथ एक वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक का पद भी स्वीकृत किया जाए। इसके अतिरिक्त पंचायत समिति स्तर पर कृषि अधिकारी के पद सृजित करने तथा नव सृजित जिलों के कार्यालयों में भी सहायक कृषि अधिकारी और कृषि पर्यवेक्षकों के नए पदों की स्वीकृति देने की मांग की गई है।
समिति का तर्क है कि नए जिलों के गठन के बाद प्रशासनिक ढांचे का विस्तार तो हुआ है, लेकिन कृषि विभाग में उसी अनुपात में पद नहीं बढ़ाए गए हैं, जिससे कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ गया है।
रिफ्रेशमेंट भत्ता बढ़ाने की मांग
मांग-पत्र में विभागीय कर्मचारियों के लिए रिफ्रेशमेंट भत्ता बढ़ाने की मांग भी शामिल है। समिति का कहना है कि विभाग का अधिकांश कार्य फील्ड में होता है और कर्मचारियों को लगातार गांवों तथा खेतों में जाना पड़ता है। ऐसे में वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए रिफ्रेशमेंट भत्ता 1000 रुपये प्रतिमाह प्रदान किया जाए या पूर्व की भांति सीजनल समय में भत्ता दिया जाए।
बुंदबुआई और अतिरिक्त कार्यभार भत्ता
कृषि पर्यवेक्षकों और वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षकों के लिए 3750 रुपये प्रतिमाह बुंदबुआई भत्ता दिए जाने की मांग की गई है। इसके साथ ही अतिरिक्त कार्यभार संभालने वाले कर्मचारियों को 2500 रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त चार्ज भत्ता प्रदान करने की मांग भी उठाई गई है।
समिति का कहना है कि कई स्थानों पर कर्मचारियों को एक से अधिक क्षेत्रों का कार्य संभालना पड़ता है, जिससे जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं। ऐसे में अतिरिक्त कार्य के अनुरूप भत्ता दिया जाना उचित होगा।
किसान सेवा केंद्रों की सुविधाओं पर जोर

मांग-पत्र में किसान सेवा केंद्रों की स्थिति सुधारने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। समिति ने कहा है कि जहां किसान सेवा केंद्र नहीं बने हैं, वहां शीघ्र निर्माण कराया जाए। जब तक भवन तैयार नहीं होते, तब तक केंद्रों के लिए 1500 रुपये प्रतिमाह किराया उपलब्ध कराया जाए।
इसके अतिरिक्त किसान सेवा केंद्रों में साफ-सफाई और पेयजल व्यवस्था के लिए 1000 रुपये प्रतिमाह राशि स्वीकृत करने की मांग भी की गई है। कर्मचारियों का कहना है कि किसानों को बेहतर सेवाएं देने के लिए आधारभूत सुविधाओं का होना आवश्यक है।
स्टेशनरी और तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराने की मांग
समिति ने कृषि पर्यवेक्षकों एवं वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षकों के लिए स्टेशनरी सामग्री उपलब्ध कराने या इसके स्थान पर 500 रुपये प्रतिमाह स्टेशनरी भत्ता देने की मांग रखी है।
साथ ही सभी सहायक कृषि अधिकारी कार्यालयों में कंप्यूटर और प्रिंटर उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है। समिति का कहना है कि अधिकांश कार्य अब ऑनलाइन और डिजिटल माध्यम से किए जाते हैं, ऐसे में तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता बेहद जरूरी है।
नियमित बैठकों की मांग
कृषि पर्यवेक्षक संयुक्त समन्वय समिति ने मंडल, जिला और खंड स्तर पर नियमित बैठकों के आयोजन की मांग भी रखी है। समिति का मानना है कि समय-समय पर बैठकों के आयोजन से स्थानीय समस्याओं का त्वरित समाधान हो सकेगा और विभागीय कार्यों में पारदर्शिता एवं समन्वय बढ़ेगा।
पदोन्नति और भर्ती में आरक्षण की मांग
मांग-पत्र में विभागीय सीधी भर्तियों में कृषि पर्यवेक्षकों के लिए 15 प्रतिशत कोटा निर्धारित करने की मांग की गई है। इसके अतिरिक्त वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक से सहायक कृषि अधिकारी के पद पर पदोन्नति के लिए 75 प्रतिशत कोटा निर्धारित करने की मांग भी उठाई गई है।
समिति का कहना है कि इससे विभागीय कर्मचारियों को बेहतर कैरियर अवसर मिलेंगे और लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ेगा।
सरकार से सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा
कृषि पर्यवेक्षक संयुक्त समन्वय समिति ने राज्य सरकार से मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है। समिति का कहना है कि यदि इन मांगों को स्वीकार किया जाता है तो न केवल कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान होगा बल्कि कृषि विभाग की कार्यक्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा। इससे किसानों तक योजनाओं और तकनीकी सेवाओं की पहुंच अधिक प्रभावी ढंग से सुनिश्चित की जा सकेगी।
समिति के प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई है कि राज्य सरकार कृषि विभाग के कर्मचारियों की समस्याओं को समझते हुए शीघ्र उचित निर्णय लेगी और लंबे समय से लंबित मांगों का समाधान करेगी।

