गोवर्धन (मथुरा)।
धार्मिक नगरी गोवर्धन से एक बेहद हृदयविदारक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) के पावन अवसर पर गिरिराज महाराज की परिक्रमा करने आए दो मासूम बच्चों की पवित्र मानसी गंगा में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों की पहचान उत्तर प्रदेश के खेडी तातोड निवासी मनीष और प्रिंस के रूप में हुई है। सुबह-सुबह हुए इस भीषण हादसे के बाद परिक्रमा मार्ग में चीख-पुकार मच गई। दोनों मासूम बच्चों की माताओं का रो-रोकर बुरा हाल है, और उनके विलाप को देखकर वहाँ मौजूद हर श्रद्धालु की आँखें नम हो गईं।
इस दुखद घटना ने जहाँ एक ओर पीड़ित परिवार को कभी न भूलने वाला जख्म दिया है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्थाओं और घाटों पर तैनात रहने वाले गोताखोरों की मुस्तैदी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
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इन दिनों अधिक मास होने के कारण गोवर्धन धाम में आस्था का जनसैलाब उमड़ा हुआ है। देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु गिरिराज जी की सात कोसीय परिक्रमा लगाने के लिए मथुरा पहुँच रहे हैं। उत्तर प्रदेश के खेडी तातोड गाँव से भी श्रद्धालुओं का एक जत्था गोवर्धन आया था, जिसमें मनीष और प्रिंस नाम के दो बच्चे अपनी माताओं और परिजनों के साथ शामिल थे।
परिजनों के अनुसार, वे सभी पूरी श्रद्धा के साथ गिरिराज जी की परिक्रमा कर रहे थे। सुबह के समय जब यह जत्था गोवर्धन के केंद्र में स्थित पवित्र मानसी गंगा घाट पर पहुँचा, तो परंपरा के अनुसार सभी ने मानसी गंगा में स्नान करने का मन बनाया। मनीष और प्रिंस भी घाट की सीढ़ियों से उतरकर पानी में स्नान करने लगे।
इसी दौरान, घाट की सीढ़ियों पर जमा काई या अत्यधिक फिसलन के कारण एक बच्चे का पैर फिसल गया। उसे डूबता देख दूसरे बच्चे ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन गहराई का अंदाजा न होने के कारण दोनों ही बच्चे गहरे पानी की चपेट में आ गए। देखते ही देखते दोनों मासूम आँखों से ओझल हो गए। परिजनों ने जब बच्चों को डूबते देखा तो घाट पर कोहराम मच गया।
घाट पर मची चीख-पुकार, प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल

जब बच्चों की माताओं ने शोर मचाना शुरू किया, तो आसपास मौजूद अन्य श्रद्धालु और स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े। घाट पर चीख-पुकार मचने के काफी देर बाद स्थानीय गोताखोर और पुलिस बल मौके पर पहुँचा। स्थानीय लोगों और गोताखोरों ने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों बच्चों को पानी से बाहर निकाला।
बच्चों को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद दोनों को ‘मृत’ घोषित कर दिया। डॉक्टरों की घोषणा सुनते ही परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। दोनों माताओं का रो-रोकर बेहाल स्थिति में थीं; वे बार-बार अपने बच्चों के शवों से लिपटकर उन्हें उठाने की मिन्नतें कर रही थीं। इस दृश्य को देखकर अस्पताल परिसर में मौजूद हर व्यक्ति की रूह कांप गई।
अधिक मास में सुरक्षा के दावों की खुली पोल
गोवर्धन में अधिक मास के दौरान उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे। प्रशासन का कहना था कि घाटों पर बैरिकेडिंग की गई है और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए चौबीसों घंटे गोताखोरों की तैनाती की गई है। लेकिन इस हादसे ने इन सभी दावों की पोल खोलकर रख दी है।
स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के आरोप:
सुरक्षा घेरे (बैरिकेडिंग) का अभाव: श्रद्धालुओं का आरोप है कि मानसी गंगा के कई घाटों पर गहरे पानी की ओर जाने से रोकने के लिए कोई पुख्ता बैरिकेडिंग या चेन नहीं लगाई गई है।
चेतावनी बोर्ड की कमी: घाटों पर ऐसे कोई स्पष्ट संकेतक या चेतावनी बोर्ड नहीं हैं, जो नए आने वाले श्रद्धालुओं को पानी की गहराई या फिसलन के प्रति सचेत कर सकें।
समय पर गोताखोरों का न मिलना: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यदि हादसे के तुरंत बाद पेशेवर गोताखोर पानी में उतर जाते, तो शायद इन दो मासूमों की जान बचाई जा सकती थी।
मानसी गंगा का धार्मिक महत्व और लापरवाही का गठजोड़
गोवर्धन की परिक्रमा में मानसी गंगा का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने अपनी उंगली से इस गंगा को प्रकट किया था, इसलिए हर श्रद्धालु परिक्रमा की शुरुआत या समाप्ति पर यहाँ स्नान और आचमन जरूर करता है।
अत्यधिक भीड़ होने के कारण घाटों की नियमित सफाई नहीं हो पाती, जिससे सीढ़ियों पर काई (Slippery Moss) जम जाती है। यह काई इतनी खतरनाक होती है कि इस पर पैर पड़ते ही इंसान सीधे गहरे पानी में चला जाता है। मनीष और प्रिंस के साथ भी यही हुआ। धार्मिक आस्था के केंद्र में इस तरह की प्रशासनिक लापरवाही लगातार मासूमों की जान पर भारी पड़ रही है।
हादसे की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के आला अधिकारी भी मौके पर पहुँचे। पुलिस ने दोनों बच्चों के शवों को पंचनामा भरकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। स्थानीय पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा किया जाएगा।
पुलिस अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से भी अपील की है कि वे घाटों पर स्नान करते समय सावधानी बरतें और गहरे पानी में न जाएं। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों को घाट की सीढ़ियों पर अकेला न छोड़ें।
गोवर्धन के मानसी गंगा में हुआ यह हादसा बेहद दुखद और आंखें खोलने वाला है। आस्था के सफर का इस तरह मातम में बदल जाना किसी भी समाज और प्रशासन के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। हर साल लाखों-करोड़ों की कमाई करने वाले इन धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की बुनियादी सुरक्षा रामभरोसे नहीं छोड़ी जा सकती। प्रशासन को तुरंत मानसी गंगा के सभी घाटों पर जाल (Safety Nets), पुख्ता बैरिकेडिंग और चौबीसों घंटे लाइफगार्ड्स की तैनाती सुनिश्चित करनी होगी, ताकि भविष्य में फिर किसी मां की गोद सूनी न हो।
खबर: सनातनी संत रिपोर्टर सूत्र रिपोर्ट

