भरतपुर/बयाना। भरतपुर जिले के बयाना उपखंड की थाना डांग गांव ग्राम पंचायत क्षेत्र में गऊघाट के पास गंभीर नदी पर बन रही पुलिया को लेकर ग्रामीणों और युवाओं में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। निर्माणाधीन पुलिया स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण और युवा एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन करते नजर आए। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिया निर्माण में गुणवत्ता के मानकों की अनदेखी की जा रही है, घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है तथा निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है।
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ग्रामीणों का कहना है कि यह पुलिया क्षेत्र के लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी मार्ग से ग्रामीणों का दैनिक आवागमन होता है। ऐसे में यदि निर्माण कार्य में लापरवाही बरती गई तो भविष्य में लोगों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसी आशंका को लेकर ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों व ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
तस्वीरों में भी साफ दिखाई दे रहा है कि बड़ी संख्या में युवा हाथ उठाकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे युवाओं का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर जनता के हितों से समझौता नहीं होने देंगे और यदि निर्माण कार्य में अनियमितताएं जारी रहीं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
ऊंचाई कम रखने का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुलिया की ऊंचाई आवश्यकता से कम रखी जा रही है। उनका कहना है कि बरसात के दिनों में गंभीर नदी का जलस्तर बढ़ जाता है। यदि पुलिया पर्याप्त ऊंचाई पर नहीं बनाई गई तो भविष्य में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है और आवागमन बाधित हो सकता है।
ग्रामीण भूपेश ने कहा कि पुलिया की ऊंचाई बढ़ाने से क्षेत्र के लोगों को दीर्घकालीन लाभ मिलेगा, लेकिन लागत कम करने के उद्देश्य से इसकी ऊंचाई कम रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि अभी इस विषय पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
गुणवत्ता पर उठे सवाल

विरोध कर रहे ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में इस्तेमाल की जा रही सामग्री की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। उनका कहना है कि निर्माण स्थल पर निर्धारित मानकों के अनुसार कार्य नहीं किया जा रहा है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण के दौरान आवश्यक तकनीकी प्रक्रियाओं का पालन नहीं हो रहा।
ग्रामीण वेद प्रकाश ने कहा कि निर्माण कार्य में पर्याप्त गुणवत्ता नियंत्रण नजर नहीं आ रहा है। उनका आरोप है कि कार्य में बेहतर गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग नहीं किया जा रहा, जिससे पुलिया की मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
वहीं ग्रामीण माधव सहित अन्य लोगों ने भी निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि यह केवल एक सरकारी परियोजना नहीं बल्कि क्षेत्र के हजारों लोगों की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा विषय है। इसलिए किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।
इस अवसर पर भूरा पहलवान, भूपेश, गंभीर लेखक, सतवीर, उदय सरपंच, वेदप्रकाश ठेकेदार, रामरूप भगत जी, युवा नेता माधव कांवर सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र के गणमान्य लोग एवं ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते मामले का संज्ञान नहीं लिया और निर्माण कार्य की जांच नहीं कराई तो एक बड़ा जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे निर्माण कार्य को तब तक नहीं होने देंगे जब तक उन्हें यह विश्वास नहीं हो जाता कि कार्य पूरी तरह मानकों के अनुरूप किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने कहा कि पुलिया कोई अस्थायी ढांचा नहीं है, बल्कि आने वाली कई पीढ़ियों के उपयोग के लिए बनाई जा रही है। ऐसे में निर्माण की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार और प्रशासन को जनता की चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान कई युवाओं ने कहा कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो वे जिला स्तर तक आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उनका कहना है कि जनहित के इस मुद्दे पर पूरा गांव एकजुट है और आवश्यकता पड़ने पर बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन भी किया जाएगा।
ठेकेदार ने आरोपों को किया खारिज
दूसरी ओर निर्माण कार्य करवा रहे ठेकेदार रवि ने ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। ठेकेदार का कहना है कि पुलिया का निर्माण पूरी तरह लोक निर्माण विभाग (PWD) के दिशा-निर्देशों और तकनीकी मानकों के अनुसार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कार्य में निर्धारित ग्रेड का सीमेंट और अन्य गुणवत्तापूर्ण सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। ठेकेदार के अनुसार निर्माण कार्य की निगरानी विभागीय अधिकारियों की देखरेख में हो रही है और किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं बरती जा रही।
ठेकेदार रवि ने यह भी कहा कि यदि ग्रामीणों को किसी प्रकार की शंका है तो संबंधित अधिकारियों के साथ उनकी बातचीत कराई जा सकती है ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके। उन्होंने दावा किया कि निर्माण कार्य पूरी पारदर्शिता और नियमों के अनुरूप किया जा रहा है।
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों से नहीं हो पाया संपर्क

मामले में प्रशासनिक पक्ष जानने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण करें और ग्रामीणों की शिकायतों को सुनें तो विवाद का समाधान निकल सकता है।
हालांकि अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आने के कारण फिलहाल ग्रामीणों के आरोपों और ठेकेदार के दावों के बीच स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। ऐसे में निष्पक्ष जांच ही पूरे मामले की वास्तविकता सामने ला सकती है।
जनता की मांग – जांच हो, तभी बने पुलिया
ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए। उनका कहना है कि विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंचकर निर्माण सामग्री, डिजाइन, ऊंचाई और अन्य तकनीकी पहलुओं का निरीक्षण करे। यदि सब कुछ मानकों के अनुरूप पाया जाता है तो ग्रामीणों को भी संतुष्टि होगी, लेकिन यदि अनियमितताएं मिलती हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी धन से बनने वाली परियोजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। जनता के टैक्स के पैसे से बनने वाले विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।
अब प्रशासन की ओर टिकी निगाहें
गऊघाट के पास गंभीर नदी पर बन रही इस पुलिया को लेकर गांव में माहौल गर्माया हुआ है। एक तरफ ग्रामीण और युवा गुणवत्ता संबंधी सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ठेकेदार निर्माण कार्य को पूरी तरह मानकों के अनुरूप बता रहा है। ऐसे में अब सबकी निगाहें प्रशासन और लोक निर्माण विभाग पर टिकी हैं।
यदि समय रहते शिकायतों की जांच कराई जाती है तो स्थिति सामान्य हो सकती है, लेकिन यदि ग्रामीणों की मांगों की अनदेखी हुई तो आने वाले दिनों में यह मामला बड़े जन आंदोलन का रूप ले सकता है। फिलहाल गांव के लोगों की मांग केवल इतनी है कि पुलिया निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच हो, गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मजबूत एवं सुरक्षित पुलिया का निर्माण कराया जाए।

