बयाना (भरतपुर)। खबर: (सनातनी संत रिपोर्टर)
राजस्थान के भरतपुर जिले के बयाना उपखंड के अंतर्गत आने वाले गांव सरायभम्बू (सर्रया नगला) में पेयजल संकट को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2015 में गांव में बनाई गई जल आपूर्ति टंकी सिर्फ 6 से 7 महीने ही संचालित हो सकी, जिसके बाद से यह आज तक बंद पड़ी है। लंबे समय से खराब पड़ी इस व्यवस्था के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि उन्होंने कई बार ग्राम पंचायत, संबंधित विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों को शिकायत दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। गांव में पानी की स्थायी व्यवस्था न होने के कारण लोग आज भी निजी स्रोतों या दूर-दराज से पानी लाने को मजबूर हैं।
2015 में बनी टंकी, 7 महीने में ही ठप हुई व्यवस्था

ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2015 में गांव में पेयजल आपूर्ति के लिए एक जल टंकी का निर्माण किया गया था, जिससे उम्मीद थी कि गांव में लंबे समय तक पानी की समस्या समाप्त हो जाएगी। लेकिन यह व्यवस्था केवल कुछ ही महीनों तक चली और तकनीकी खराबी या रखरखाव के अभाव में पूरी तरह बंद हो गई।
इसके बाद से आज तक इस टंकी को दोबारा चालू नहीं किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि समय-समय पर शिकायतें की जाती रहीं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला, समाधान नहीं।
ग्रामीणों में बढ़ता गुस्सा, प्रशासन पर लापरवाही के आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि पानी जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित रहना बेहद चिंताजनक है। गांव के ही कैप्टन सियाराम ने बताया कि उन्होंने स्वयं ग्रामीणों के साथ मिलकर वाटर बॉक्स, ग्राम पंचायत और संबंधित अधिकारियों तक कई बार शिकायत पहुंचाई, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि समस्या के समाधान के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि टंकी के पास जो भी उपकरण या ढांचा बचा है, वह भी धीरे-धीरे खराब हो रहा है, लेकिन उसकी मरम्मत या पुनः संचालन की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।
ग्राम पंचायत और जनप्रतिनिधियों पर सवाल
गांव के ही एक अन्य ग्रामीण सुरेंद्र गुर्जर ने ग्राम पंचायत और जनप्रतिनिधियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब भी ग्रामीण सरपंच से समस्या के समाधान की बात करते हैं, तो उन्हें बजट का अभाव बताकर टाल दिया जाता है।
सुरेंद्र गुर्जर ने आरोप लगाया कि सरकार बदलने के बाद भी गांव की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।उन्होंने कहा कि चुनावों के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
जब हमने गांव के सरपंच से संपर्क करना चाहा तो उनके बेटे ने फोन उठाया उन्होंने बोला मेरी मां सरपंच हैं हम जल्द ही इस टंकी का पता लगाएंगे कि यह किस विभाग की है एक ग्राम पंचायत के अधीन है या वाटर बॉक्स की ओर से जल्दी ही पानी की सप्लाई को पन सप्लाई को पुन शुरू करवाया जाएगा।
हमने जलदाय विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने की लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।
सड़क और नालियों की स्थिति भी खराब

ग्रामीणों ने केवल पानी की समस्या ही नहीं, बल्कि गांव की अन्य बुनियादी सुविधाओं की बदहाली पर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि सड़क किनारे बनी नालियां जाम पड़ी हैं और कई जगहों पर कचरा भरा हुआ है, जिससे गंदगी और संक्रमण का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों के अनुसार कई बार इन समस्याओं को अपने स्तर पर ठीक कराने की कोशिश भी की गई, जिसमें उन्होंने अपने निजी खर्च से भी कुछ काम करवाए, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो सका।
निजी खर्च से मरम्मत का दावा

कैप्टन सियाराम ने यह भी बताया कि गांव में जहां भी छोटी-मोटी खराबी आती है, उसे कई बार ग्रामीण अपने स्तर पर पैसे जुटाकर ठीक कराने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है और सरकारी व्यवस्था लगभग निष्क्रिय दिखाई देती है।
उनका कहना है कि ग्राम पंचायत और विभागीय स्तर पर इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, जिससे ग्रामीणों में निराशा बढ़ती जा रही है।
पानी के लिए निजी स्रोतों पर निर्भर ग्रामीण
पेयजल व्यवस्था ठप होने के कारण गांव के लोग पूरी तरह से निजी हैंडपंप, ट्यूबवेल और दूर-दराज के स्रोतों पर निर्भर हैं। गर्मियों के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब पानी की मांग बढ़ जाती है।
महिलाओं और बच्चों को कई किलोमीटर दूर से पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे उनकी दिनचर्या और स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है।
सरकारी योजनाओं पर उठते सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की ओर से गांवों में पेयजल और विकास के लिए कई योजनाएं चलाई जाती हैं, लेकिन सरायभम्बू गांव में उनका लाभ दिखाई नहीं दे रहा है। वर्षों से बंद पड़ी जल टंकी इस बात का उदाहरण बन गई है कि योजनाओं का क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर कितना कमजोर है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द इस टंकी की मरम्मत कर इसे पुनः चालू किया जाए और गांव में स्थायी पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
समाधान की उम्मीद में ग्रामीण
फिलहाल ग्रामीणों को प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार है। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन या बड़े स्तर पर विरोध करने को मजबूर होंगे।
सरायभम्बू गांव की यह स्थिति एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति को उजागर करती है, जहां योजनाएं तो बनती हैं, लेकिन उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच पाता।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन और संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या पर कब तक संज्ञान लेते हैं और ग्रामीणों को राहत कब मिलती है।
