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राजस्थान के भरतपुर जिले के ऐतिहासिक नगर बयाना में स्थित प्राचीन उषा मंदिर आज अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है। हजारों वर्षों की ऐतिहासिक विरासत को समेटे यह मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और प्राचीन स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण भी है। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि मंदिर के मुख्य द्वार के ठीक बगल में फैली गंदगी और कचरे के ढेर इसकी गरिमा को लगातार ठेस पहुंचा रहे हैं।

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कुछ दिन पूर्व भी इस मंदिर को लेकर के एक खबर आई थी जहां पर नशीली सीरप मंदिर के गर्भ ग्रह में नशीली दवाइयां, खांसी की सिरप एवं चमगादड़ों की पीठ से संबंधित कुछ फोटो और खबर भी वायरल हुए थे |

लेकिन बार बार इस तरह की तस्वीर आना चिंता का विषय तो है ही साथ ही प्रशासन की लापरवाही को भी दर्शाती है |

स्वच्छ भारत अभियान के बावजूद क्यों नहीं बदल रही तस्वीर?

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाए गए स्वच्छ भारत मिशन अभियान पर अरबों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। गांव से लेकर शहर तक सफाई के लिए जागरूकता अभियान चलाए गए, लेकिन धरातल पर आज भी कई स्थानों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

बयाना का उषा मंदिर इसका जीवंत उदाहरण बन चुका है। यहां सफाई व्यवस्था का अभाव साफ दिखाई देता है। यदि स्थानीय नागरिक स्वयं जिम्मेदारी नहीं समझेंगे तो केवल सरकारी योजनाओं से देश स्वच्छ नहीं बन सकता। स्वच्छता केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।

इतिहास और पौराणिक महत्व से जुड़ा है उषा मंदिर

उषा मंदिर का संबंध भगवान श्री कृष्ण की पौराणिक कथाओं से माना जाता है। लोक मान्यताओं और इतिहासकारों के अनुसार यह मंदिर बाणासुर की पुत्री उषा और भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध की प्रेम कथा से जुड़ा हुआ है। धार्मिक कथाओं के अनुसार उषा ने स्वप्न में अनिरुद्ध को देखा था और बाद में उनकी सहेली चित्रलेखा ने अनिरुद्ध को खोजकर उषा से मिलवाया। बाद में दोनों का विवाह हुआ और उसी स्मृति में इस मंदिर का निर्माण कराया गया

पुरातत्व विभाग और देवस्थान विभाग की जिम्मेदारी पर उठ रहे सवाल

यह मंदिर भारतीय पुरातत्व महत्व की धरोहर माना जाता है और स्थानीय लोगों के अनुसार इसका संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (chaeological Survey of India) तथा देवस्थान विभाग के अधीन आता है। इसके बावजूद मंदिर परिसर की सफाई और रखरखाव को लेकर गंभीर लापरवाही देखने को मिल रही है।

यदि कोई ऐतिहासिक धरोहर सरकारी संरक्षण में होने के बाद भी कचरे के ढेर और दुर्गंध के बीच दम तोड़ रही हो, तो यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि सांस्कृतिक विरासत के प्रति उदासीनता भी है। मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के आसपास नियमित सफाई नहीं होने से श्रद्धालुओं को काफी असुविधा होती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकला। कुछ दिन सफाई होती है, फिर स्थिति जस की तस हो जाती है। प्रशासन की ओर से न तो कचरा डालने वालों पर कार्रवाई होती है और न ही यहां उचित कूड़ेदान या निगरानी व्यवस्था की गई है।

पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है उषा मंदिर

बयाना ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण नगर माना जाता है। यहां का किला, प्राचीन मंदिर और पुरातात्विक धरोहरें देशभर के इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। उषा मंदिर भी उनमें प्रमुख स्थान रखता है।

यदि इस मंदिर का उचित संरक्षण और प्रचार-प्रसार किया जाए तो यह धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता है। इससे स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। लेकिन वर्तमान स्थिति पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए निराशाजनक बनी हुई है।

आखिर कब जागेगा प्रशासन?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर प्रशासन कब जागेगा? क्या किसी बड़ी दुर्घटना या जनआंदोलन का इंतजार किया जा रहा है? क्या ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा केवल कागजी योजनाओं तक सीमित रहेगी?

जरूरत इस बात की है कि:

  • मंदिर परिसर के आसपास नियमित सफाई कराई जाए।
  • कचरा डालने वालों पर जुर्माना लगाया जाए।
  • सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं।
  • स्थानीय नागरिकों को जागरूक किया जाए।
  • पर्यटन और पुरातत्व विभाग मिलकर संरक्षण योजना तैयार करें।
  • मंदिर के आसपास सौंदर्यीकरण कराया जाए।

नागरिकों को भी निभानी होगी जिम्मेदारी

किसी भी शहर या देश की पहचान केवल सरकार से नहीं बल्कि वहां रहने वाले लोगों से भी होती है। यदि नागरिक स्वयं सार्वजनिक स्थलों को गंदा करेंगे तो कोई भी योजना सफल नहीं हो सकती।

उषा मंदिर केवल पत्थरों से बना ढांचा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, इतिहास और आस्था की पहचान है। इसे बचाना हर नागरिक का कर्तव्य है। आने वाली पीढ़ियों को यदि हम अपनी विरासत सौंपना चाहते हैं, तो आज ही जागना होगा।

वरना वह दिन दूर नहीं जब इतिहास की यह अमूल्य धरोहर केवल तस्वीरों और किताबों तक सीमित होकर रह जाएगी।

पुरातत्व विभाग के कर्मचारी कुंजीलाल शर्मा का बयान _ यह सरासर गलत है हमने नगर पालिका अधिशाषी अधिकारी को इश विषय में कई बार अवगत कराया है. लिकिन कोई कोई कार्यवाही नहीं हुई | वह बोलती हैं की प्रतिदिन उठ्वालिया जाता है|

नगरपालिका अधिशाषी अधिकारी अनीता कुशवाह का बयान _ कचरा सुबह शाम उठालिया जाता है लोगों ने जगह बना दी है | जगह बदल बादेंगे हमारा एसा कोई इंटेंसन नहीं है की राष्ट्रीय स्मारक को कोई क्षति पहुचाएं |

By Sanatani Sant Reporter

I am an exserviceman presently sadhak Bageshwar Balaji. Presently Working as a religious and social news reporter .

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