
बयाना (भरतपुर)। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, जिन्होंने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर देश को आज़ादी दिलाई, आज उनकी यादों और प्रतीकों का संरक्षण करना प्रशासन के लिए शायद प्राथमिकता नहीं रह गया है। भरतपुर जिले के बयाना उपखंड के ऐतिहासिक गांधी चौक से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो स्थानीय नगर पालिका और प्रशासनिक सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
प्रतिमा के साये में अतिक्रमण का खेल
गांधी चौक स्थित गांधी जी के चबूतरे के बिल्कुल सामने और उसके इर्द-गिर्द जिस तरह से सब्जी की क्रेटें और बोरियाँ रखी गई हैं, वह न केवल गांधी जी की प्रतिमा की गरिमा को ठेस पहुँचाती हैं, बल्कि आम जनता के निकलने वाले मार्ग को भी बाधित करती हैं। चबूतरे के पास भारी मात्रा में अतिक्रमण स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
जिम्मेदार कौन? प्रशासन या नगर पालिका?
अतिक्रमण हटाना और सार्वजनिक स्थलों की गरिमा बनाए रखना नगर पालिका की प्राथमिक जिम्मेदारी है। लेकिन यहाँ स्थिति इसके ठीक उलट है। क्या प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे इस अतिक्रमण के पीछे कोई ‘चौथ वसूली’ का खेल है? या फिर अधिकारी जानबूझकर इस ओर से अपनी आँखें मूंदे बैठे हैं?
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह स्थान पूरी तरह से अवैध कब्जे की भेंट चढ़ जाएगा। प्रशासनिक व्यवस्था का इस तरह से सुस्त होना न केवल कानून का मज़ाक है, बल्कि यह बापू के आदर्शों का भी अपमान है।

