
बयाना (भरतपुर): राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयाना आगमन से पहले प्रशासन ने अपनी साख बचाने के लिए जिस ‘विकास’ का प्रदर्शन किया था, उसकी पोल कुछ ही घंटों में खुल गई। ब्रह्मबाद रोड स्थित चुंगी ओवरब्रिज के पास आनन-फानन में बनाई गई सड़क किनारे की दीवार शाम होते-होते भरभरा कर ढह गई। दीवार के मलबे से निकले सच ने न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सरेआम हो रहे भ्रष्टाचार को भी उजागर कर दिया है।
सूखी बजरी और ईंटों का ‘अजूबा’
मौके पर मौजूद स्थानीय जनता ने जब ढही हुई दीवार का मुआयना किया, तो वे दंग रह गए। दीवार में सीमेंट और मसाले का नामोनिशान तक नहीं था। जनता का आरोप है कि ठेकेदार ने केवल सूखी बजरी के ढेर पर ईंटें रखकर दीवार खड़ी कर दी थी ताकि मुख्यमंत्री के काफिले को सब कुछ ‘चकाचक’ दिखे।
“यह जनता के पैसे की बर्बादी और सरेआम धोखाधड़ी है। क्या अधिकारियों को लगा कि सूखी बजरी पर टिकी दीवार जनता की आंखों में धूल झोंक देगी?”
— आक्रोशित स्थानीय निवासी
पीडब्ल्यूडी और ठेकेदार के बीच ‘नूरा-कुश्ती’
जब इस घटिया निर्माण को लेकर सवाल पूछे गए, तो जिम्मेदारी लेने के बजाय विभाग और ठेकेदार एक-दूसरे पर पल्ला झाड़ते नजर आए:
ठेकेदार का पक्ष:
ठेकेदार का कहना है कि यह काम उनके बजट या टेंडर का हिस्सा नहीं था। पीडब्ल्यूडी (PWD) विभाग के अधिकारियों ने उन पर दबाव बनाकर यह अतिरिक्त काम करवाया।
PWD अधिकारियों का पक्ष:
विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि बजट न होने के बावजूद उन्होंने ठेकेदार से कहकर यह काम केवल ‘दिखावे’ के लिए करवाया था।
बयाना की जनता के तीखे सवाल
- बयाना चुंगी ओवरब्रिज के पास हुए इस ‘कारनामे’ पर जनता अब सरकार और प्रशासन से सीधे जवाब मांग रही है:
क्या पूर्व मुख्यमंत्री को दिखाने के लिए किया गया यह ‘दिखावटी विकास’ भ्रष्टाचार की श्रेणी में नहीं आता?
2. अगर इस कच्ची दीवार के गिरने से कोई बड़ा हादसा हो जाता, तो जिम्मेदारी किसकी होती?
3. बिना बजट और बिना गुणवत्ता के काम करवाने वाले PWD अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
निष्कर्ष:यह घटना चीख-चीख कर कह रही है कि यहाँ विकास की नींव सीमेंट पर नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की सूखी बजरी पर टिकी है। अब देखना यह है कि क्या उच्चाधिकारी इस मामले में संज्ञान लेकर दोषियों पर कार्रवाई करेंगे?
